Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to.
Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba.
It is our job to question the powers we cooperate with.
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
वोट चोरी से कभी सीटें चुरा�� जाती हैं, कभी पूरी सरकार।
लोकसभा के 240 BJP सांसदों में से, मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं - क्या उन्हें BJP की भाषा में “घुसपैठिए” कहें?
और हरियाणा? वहाँ तो पूरी सरकार ही “घुसपैठिया” है।
जो संस्थाएँ अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं - वो ख़ुद “remote controlled” हैं।
उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएँ, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।
कह दिया था - चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी।
आज कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा। एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है।
फरवरी से अब तक: ₹1,380 की बढ़ोतरी - सिर्फ़ 3 महीनों में 81% का इज़ाफ़ा।
चायवाला, ढाबा, होटल, बेकरी, हलवाई - हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा। और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा।
पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर।
भागलपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा जी के सड़क दुर्घटना में हुए असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
शोक संतप्त परिजनों, मित्रों और समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा हूं।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय जी के अस्वस्थ होने के समाचार से चिंतित हूं।
उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। आशा है कि वो जल्द से जल्द स्वस्थ हों और फिर से पूरी शक्ति के साथ जन सेवा में सक्रिय हों।
गुजरात के भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस की हमारी महिला सांसद गेनीबेन ठाकोर जी पर अभद्र टिप्पणी की है।
“नारी वंदन” का मुखौटा उतर गया।
यह सिर्फ़ शर्मनाक नहीं - यह BJP की मनुवादी, महिला-विरोधी विचारधारा का असली चेहरा है।
ये है BJP का “नारी वंदन”?
ये करेंगे महिलाओं का सशक्तिकरण?
��े देंगे अधिकार?
सत्ता को चुनौती देने वाली महिलाएं इन्हें बर्दाश्त नहीं - एक ही पल में इनकी विकृत मानसिकता सामने आ जाती है।
और प्रधानमंत्री तो, कांग्रेस की महिला सांसदों के सवालों से घबराकर, संसद छोड़कर पहले ही भाग चुके हैं।
मोदी जी ख़ुद कहते हैं, “नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।” - मगर BJP खुद ये भूल गई।
महिला-विरोधी BJP ये याद रखे - गुजरात के साथ पूरे हिंदुस्तान की महिलाएं हर अपमान का मु��हतोड़ जवाब देंगी।
Thank you to my brothers and sisters in Keralam for a truly decisive mandate.
Congratulations to every UDF leader and worker for a hard-fought, well-run campaign.
As I said before, Keralam has the talent, Keralam has the potential and now Keralam has a UDF government with a vision to harness both.
I look forward to seeing my Keralam family soon ♥️
I spoke to Thiru Vijay and congratulated him on TVK’s spectacular result.
This mandate reflects the rising voice of youth which cannot, and will not, be ignored.
My heartfelt thanks to the Congress workers of Tamil Nadu and Puducherry for their hard work and support.
I reiterate that the Congress party will continue to protect and serve the people of Tamil Nadu and Puducherry.
Assam and Bengal are clear cases of the election being stolen by the BJP with the support of the EC.
We agree with Mamata ji. More than 100 seats were stolen in Bengal.
We have seen this playbook before:
Madhya Pradesh.
Haryana.
Maharashtra.
Lok Sabha 2024 etc
चुनाव चोरी, संस्था चोरी - अब और चारा ही क्या है!
Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss.
They need to understand this clearly - the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy.
Put petty politics aside. This is not about one party or another. This is about 🇮🇳.
इंदिरा गांधी :
(The Iron Lady)
कहानी पाकि���्तान को दो हिस्सों में बांटने की :-
1971 का भारत-पाक युद्ध केवल दो देशों के बीच सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह मानवता, स्वतंत्रता और निर्णायक नेतृत्व की परीक्षा थी। इस संघर्ष में भारत ने न केवल एक नया राष्ट्र जन्मते देखा, बल्कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में अपने कूटनीतिक और सैन्य परिपक्वता का अद्वितीय प्रदर्शन किया।
मार्च 1971 में पाकिस्तान की सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत पूर्वी पाकिस्तान में व्यापक नरसंहार शुरू किया। बंगाली भाषा, संस्कृति और राजनीतिक पहचान के लिए लड़ रहे लोगों पर बेरहमी से हिंसा की गई। अनुमान है कि लगभग 30 लाख लोग मारे गए और एक करोड़ से अधिक शरणार्थी भारत में आ गए। इस अभूतपूर्व शरणार्थी संकट ने भारत के सीमावर्ती राज्यों में सामाजिक और आर्थिक दबाव पैदा कर दिया। केवल मानवीय ही नहीं, यह भारत की राष्ट्रीय सुर���्षा के लिए भी खतरा बन गया था।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस संकट को केवल सीमावर्ती समस्या नहीं मानती थीं। उनके लिए यह एक नैतिक और रणनीतिक संकट था। उन्होंने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठाने का निर्णय लिया। इंदिरा गांधी ने अक्टूबर 1971 में पश्चिमी देशों की यात्रा की, उन्होंने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि यह केवल एक राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि एक समूची आबादी के अस्तित्व का प्रश्न है।
अं���रराष्ट्रीय चुनौती -
भारत की सबसे बड़ी चुनौती थी- अमेरिका और चीन की संयुक्त रणनीति। अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर, पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह याह्या खान को चीन से संपर्क स्थापित करने की कुंजी मानते थे।
इस संकट के समय इंदिरा गांधी ने भारत की विदेश नीति को नए आयाम दिए। उन्होंने 9 अगस्त 1971 को सोवियत संघ के साथ 'भारत-सोवियत मैत्री और सहयोग की संधि' पर हस्ताक��षर किए। अमेरिका यात्रा में उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह झुकने वाली नहीं। यह समझौता शीत युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत के लिए एक सामरिक सुरक्षा कवच बना। धमकियों के बावजूद अमरीका पाकिस्तान की कोई मदद नहीं कर पाया और चीन न्यूट्रल रहा।
पाकिस्तान का हमला -
3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत के सैन्य हवाई ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद भारत ने पूर्वी मोर्चे पर आक्रमण आरंभ किया। जनरल सैम मानेकशॉ के ���ेतृत्व में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में रणनीतिक मोर्चे पर तेज़ी से बढ़त बनाई।
महज़ 13 दिनों के भीतर भारतीय सेना ने ढाका तक पहुँचकर 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। 16 दिसंबर 1971 को ढाका में जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण किया। यह विश्व इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था।
यह युद्ध केवल सैन्य जीत नही��� थी- यह राजनयिक, नैतिक और रणनीतिक जीत थी। बांग्लाद��श एक नए राष्ट्र के रूप में दुनिया के नक़्शे पर उभरा। भारत का सम्मान दुनिया भर में स्थापित हुआ। कश्मीर पर पाकिस्तान को भारत से 'शिमला संधि' करनी पड़ी।
इस विजय ने इंदिरा गांधी को देश के भीतर एक “शक्तिशाली राष्ट्रनेता” के रूप में स्थापित किया और उन्हें "आयरन लेडी" कहा गया।