‘जंतर-मंतर’ को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित करना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी हार है।
शुक्र तो ये मनाइए कि प्रदर्शन करने के लिए ‘किसी भूमिगत’ जगह पर जाने को नहीं कहा गया, जहाँ भाजपा और उनके अंडरग्राउंड संगी-साथी अपनी ख़ुफ़िया मीटिंग करते हैं।
भाजपा बेहद डरी-सहमी हुई है। वो जनाक्रोश से बचने के लिए उन जगहों से जनता को दूर करना चाहती है जहाँ सत्ताधीश बैठते हैं। अच्छा तो ये होता कि लोकतंत्र में लोक के कल्याण के लिए प्रदर्शन हेतु ‘लोक कल्याण मार्ग’ पर ही कोई जगह दे दी जाए। इससे नामकरण को सही साबित करने का तर्क भी मिल जाएगा। सर्वोच्च सत्ता तक जब बात सीधे पहुँचेगी तो समाधान भी तुंरत निकलेगा।
ब्राह्मण घर की बेटी हूं...लोकतंत्र की लड़ाई अपनी जगह है..श्राप देती हूं..उस पुलिसवाले को जिसके इशारे पर मुझे बेवजह..टांगों से पकड़कर अपमानजनक तारीके से बस में डाला गया...एक श्राप मैंने 2022 में दिया था..एक आज देती हूं...असहाय व्यक्ति की हाय लोहे को भस्म कर देती है..ये तो फिर भी ज्ञानेश की मशीन से निकली सरकार के इशारे पर खाकी वर्दी वाला दुर्योधन है...
अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है।
जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी आवाज़ पूरे देश में गूंजेगी - पहले से कहीं ज़्यादा।
@AmitShah, जितनी पुलिस लानी है, 10 हज़ार, 20 हज़ार, 40 हज़ार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए।
हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!
सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते।
संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!
2014 से पहले BJP के धरने को रोकने के लिए कांग्रेस ने कभी ट्रेन, टैक्सी,मेट्रो को बंद नहीं किया न ही 50 हजार सेना पर पुलिस के जवान लगाए ,
बीजेपी वाले बापू के समाधि स्थल पर धरना लगाते थे सुषमा स्वराज जी तब उस धरने में नाचती थी।
क्या आपने किसी देश में चोर का इतना सम्मान देखा है?
पुलिस का काम चोर पकड़ने का है, लेकिन मोदी ने पूरे देश की पुलिस एक “चोर” बचाने में लगा दी है।
मोदी जी “ज्ञानू चोर” से आपका क्या रिश्ता है?
क्या ये रिश्ता “चोर-चोर मौसेरे भाई” का है?
पहले लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से।
#वोट_चोर_गद्दी_छोड़ मिलते हैं जंतर मंतर पर।
अयोध्या में उमड़े जनसैलाब के बीच आई हुई प्रेस-मीडिया को अधिक समय न दे पाने का खेद है।
अयोध्या के कार्यक्रम में आए सभी पत्रकारों का हार्दिक अभिनंदन और धन्यवाद!
अब तो अयोध्या आते रहेंगे…
समाजवादी पार्टी के संस्थापक, भारत के पूर्व रक्षामंत्री एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 'धरतीपुत्र'
श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव जी की चौथी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है - जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। महिला पत्रकारों के कैमरे छीने गए, उन्हें घसीटा गया। एक पत्रकार की शिकायत पर FIR तक दर्ज नहीं हुई।
कुछ हफ्तों पहले शाहीन और नफ़ीसा ने साकेत थाने के अंदर अपने साथ हुई हिंसा और बदसलूकी की आपबीती सुनाई है। सोचिए, थाने के अंदर - वो जगह जहां महिलाएं शिकायत लेकर जाती हैं।
जिन पर महिलाओं की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, वही आज उनके लिए ख़तरा बन रहे हैं। और दिल्ली पुलिस किसके अधीन है - यह पूरा देश जानता है।
साकेत थाने का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई हो। शाहीन, नफ़ीसा और जिनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने हिंसा और बदतमीज़ी की है उनको न्याय मिले।
अमित शाह जी - आप और आपकी पुलिस महिलाओं से डरती क्यों है?
उलटी गिनती शुरु हो गयी है 🥴
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आँध्र-प्रदेश के रायलसीमा में भाषण देने पहुँची..उनके मुँह खोलते ही जनता चिल्लाने लगी कि ‘पहले नौकरी दो’!
मंच पर बैठे CM चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और अनंत अंबानी हक्के-बक्के रह गए !
इतनी Hooting हुई कि वित्त मंत्री को भाषण बीच में ही ही रोकना पड़ा और चंद्रबाबू नायडू को उठकर जनता को शांत कराना पड़ा !
वक्त बदल रहा है 🔥🔥🔥
‘शिक्षक और अभ्यर्थी संवाद’ एक अनूठा अनुभव रहा। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए जिनसे युवाओं की अपेक्षाओं से हम सब परिचित होते रहें और शिक्षकों के साथ मिलकर हम नये देश की नई राहें बनाएं।
यूथ की उम्मीदों पर जो खरा उतरे, हम वो Neo-India बनाएंगे!
मेरी सुप्रीम कोर्ट से एक और उम्मीद है जिस तरह जनता से हर गलती का हिसाब लिया जा रहा है, उसी तरह जनता के नुकसान का हिसाब भी तय हो।
सड़क में गड्ढा मिले, खराब सड़क की वजह से accident हो, घंटों traffic में फँसकर fuel जले, घटिया construction कुछ महीनों में टूट जाए तो इसका जिम्मेदार कौन? उसकी भी वसूली क्या ठेकेदार और Company के बिजली बिल या Payment से काटेंगे?
माननीय Court से एक और अनुरोध है इतने सारे लंबित Case है कई लोग न्याय के इंतजार में है उसका भी कोई सुझाव का इंतजार रहेगा सालों से न्याय के लिए दबी file और Case का क्या होगा ?
उन्होंने मेरा इंटरव्यू लेने से मना कर दिया क्योंकि मैं यादव (OBC) हूँ। 🚨🚨
“मैं यादव हूँ, मैंने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों पास कर लिए हैं। लेकिन, जातिगत भेदभाव के कारण, केंद्रीय विद्यालय में PGT लेक्चरर की पोस्ट के लिए मेरा इंटरव्यू नहीं हुआ।”
ये आदमी गोरखपुर में जल भराव के लिए भी युगपुरुष मोदी जी को ट्रोल कर रहा है,
लेकिन लखनऊ वाले इंजन का नाम नहीं लेता है,
जिसका दाना, उसका गाना तो गाना ही पड़ेगा ना,