विभाग वाले कहते हैं कि तू जूता साफ कर... यह कहते शिवम सोनकर फफक पड़ते है। नई उमंग और जीवन में आगे बढ़ने की चाह लिए शिवम सोनकर ने देश के बड़े शिक्षण संस्थान बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा का सपना संजोया था। लेकिन शिवम के सपने के आड़े उनकी जाति आ गई है। शिवम जाति से दलित हैं। इनका आरोप है कि उन्हें पीएचडी में दाखिला नहीं दिया जा रहा है, जबकि उन्होंने सामान्य वर्ग की परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया था। नेट क्वालिफाई कर चुके शिवम का आरोप है कि बीएचयू में आरक्षण प्रणाली में गड़बड़ी कर अनुसूचित जाति के आरक्षण को दरकिनार किया गया और उन्हें प्रवेश से वंचित कर दिया गया।
शिवम के साथ यह सब काशी में हो रहा है। काशी को लोग शिव की नगरी कहते रहे हैं। शिवम का नाम भी शिव के नाम पर ही है। लेकिन यहां शिवम के नाम से ज्यादा उनका उपनाम यानी सरनेम मायने रखता है।
क्रेडिट 👇
अशोक दास
मध्यप्रदेश के कटनी में दलित परिवार के 15 साल के बच्चे और उसकी मां के साथ थाना प्रभारी और पुलिस स्टॉफ की क्रूरता मानवता को झकझोर कर रख देने वाली है। यह घटना ना सिर्फ मप्र पुलिस की क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त दलितों के प्रति हिंसा की मानसिकता को भी उजागर करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी परीक्षाओं की पवित्रता का भंग होना और उसके बाद परीक्षाओं को रद्द करने की परम्परा विकसित हो रही है। इससे परीक्षार्थियों की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट बढते ही जा रहे हैं। सम्बंधित मुख्य संस्थानों को स्वयं ही परीक्षा आयोजित करनी चाहिए।
उद्योगपतियों के हजारों करोड़ कर्ज माफी से देश का विकास नहीं रुकेगा,हजारो करोड़ ले करके चंपत हो जाने देश का विकास नहीं रुकेगा, चुनावी चंदे के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार से देश का विकास नहीं रुकेगा,नेताओं के फिजूल खर्ची व उनके पेंशन देने से देश का विकास नही रुकेगा वाह रे #RBI