पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंड
डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंड
पनीर में पाम आयल ब्लेंड
हल्दी में क्रोमैट पाउडर ब्लेंड
दूध में पानी ब्लेंड
मिर्ची पाउडर में ईंट बुरादा ब्लेंड
सरकार में विपक्ष सांसद ब्लेंड
फ्लेक्स फ्यूल
फ्लेक्स फ़ूड
फ्लेक्स सरकार
One guy is looting money by forcing Ethanol
Another is land grabbing for his real estate empire
One is making money from leaking exam papers
Another is looting by selling the Nicobar Island
Top to bottom, everything is corrupt and compromised in this Modi govt.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में धार्मिक नगरी उज्जैन में मुख्यमंत्री मोहन यादव के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने का बड़ा खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उज्जैन मास्टर प्लान और सिंहस्थ मेला 2028 को लेकर प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर सड़कों के आसपास, मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी गई।
मास्टर प्लान के तहत कृषि भूमि को व्यावसायिक या आवासीय भूमि में बदला जा रहा है। खुलासा यह है कि मास्टर प्लान के सार्वजनिक होने से पहले ही परिवार ने उन स्थानों पर जमीन खरीदी, जिन्हें आगे चलकर व्यावसायिक या आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तित किया जाना था।
रिपोर्ट बहुत विस्तार से इस पूरे मामले की पड़ताल करती है। रिपोर्ट को देखकर या सुनकर आसानी से इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है कि यह सब महज संयोग नहीं है।
उज्जैन को विकसित करने के मास्टर प्लान के समानांतर मोहन यादव का परिवार भी विकसित होता दिखाई दे रहा है।
देखना होगा कि इतने बड़े आरोपों के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की क्या प्रतिक्रिया होती है।
अभी तक बाजार में सोर्स उतरे हैं या नहीं यह बताने की जमीन देश हित में खरीदी गयी! लैंड जिहाद से बचाने के लिए कैसे यह जरुरी था?
कैसे यह मास्टर स्ट्रोक था और देश की जमीन को देश विरोधी ताकतों के हाथों में जाने से बचा लिया गया!
आ रहा होगा! धीरज रखें! सोर्स पर भरोसा करें!
मुख्यमंत्री के परिवार का रियल एस्टेट के कारोबार में होना और उनकी ही सरकार के निर्णयों के तारों का उससे जुड़ना , एक गंभीर नैतिक संकट है ---- मोहन यादव लगातार भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं -------
भगवान राम के मंदिर की लूट के बाद….
अब महाकाल उज्जैन में भी मची है लूट,
जो मुनाफा कमा सके तो खुल कर कमाई की छूट !
“सरकार की ज़िम्मेवारी” बनाम “व्यक्तिगत हितों के टकराव” का इससे बड़ा मामला और सबूत क्या हो सकते हैं, जो @IndianExpress की इन्वेस्टीगेशन दिखा रही है ।
👉 श्री मोहन यादव का इस्तीफा कब होगा?
👉 सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से हितों में टकराव की जांच कब होगी?
इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के अनुसार “जिस ज़मीन के पास सड़क निकलेगी या फिर 2035 में कृषि भूमि से आवासीय या व्यावसायिक भूमि में बदलने के लिए चिन्हित किया गया है, वही ज़मींन मोहन यादव जी के रिश्तेदार ख़रीदे जा रहे!”
मोहन यादव (स्वयं)~17 एकड़
सीमा यादव (पत्नी)~11 एकड़
वैभव यादव (पुत्र)~17 एकड़
शालिनी ( बहु )~10 एकड़
निलेश (चचेरा भाई, पत्नी सहित)~ 108 एकड़
गोविंद (चचेरा भाई, परिवार सहित) ~47 एकड़
नारायण (भाई) ~19 एकड़
नंदलाल (भाई) ~17 एकड़
कलावती (बहन) ~17 एकड़
अभय (भतीजा) ~16 एकड़
रेखा (भाभी)~6 एकड़
ख़बरदार किसी ने कहा “भ्रष्टाचार की बू” आ रही है। इसे परिवार मोह भी नहीं कहा जाएगा। इसे जन कल्याण कहते हैं, वो अलग बात है “जन” में सिर्फ परिवार आ रहा है!
भाई बहन ,भाभी ,भतीजा भतीजी ,ममिया ससुर फूफिया चाचा, बहनोई ,साढ़ू सबके नाम ज़मीन ख़रीदेगा तेरा मोहन🤡
मुख्यमंत्री हो तो ऐसा हो वरना ज़िंदा तो….खैर हटाओ!!
यदि सरकार में हो और परिवार को लाभ न पहुँचे, तो धिक्कार है। पर हाँ, वो लोग पहले से ही रीयल एस्टेट के व्यवसाय में थे, इसलिए नीचे की न्यूज फेक मानी जानी चाहिए।
Bharat Tiwari के परिजनों से कोई संपर्क करवा दीजिए , हम भी अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं।
बाकी हम गाँव जाकर Interview करेंगे और साथ ही परिवार की आर्थिक मदद भी करना चाहेंगे । https://t.co/xjGJqfl9rs
भरत तिवारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री को अभी भोजपुर जिला के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।
.शाहपुर थाना प्रभारी, पुलिस की टीम पर हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिए
. भरत जिन मुद्दों पर प्रशासन और सरकार की नीतियों का विरोध कर रहा था उसकी जाँच होनी चाहिए
. गंगा में विलीन गांव जवईनिया के विस्थापितों को लेकर जो भी घपला, घोटाला के आरोपी हैं उनके खिलाफ जांच के आदेश देने चाहिए
. भरत तिवारी पेशेवर अपराधी नहीं था, उसने हथियार के साथ जो किया वो गलत था, लेकिन उसकी कीमत मौत नहीं थी
. सरकार के प्रतिनिधि को वहां जाना चाहिए
. शांति समिति की स्थापना, इलाके की समस्या सुनकर सुशासन की शब्दावली को स्थापित करना चाहिए
. निहत्थे पर गोली चलाने वाले कातिल हैं, एनकाउंटर का गलत इस्तेमाल बंद हो
मधुबनी के संतोष जी गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर में अच्छे पैकेज पर जॉब करते थे! जॉब को छोड़ गांव लौटे अपना कुछ करने! स्वदेश के शाहरुख ख़ान की तरह।इसके लिए अपना गांव चुना!
पूरी पूंजी लगाकर मधुबनी से सटे पाही गांव में एक रिसोर्ट खोला है! किसी भी अच्छे रिसोर्ट की बराबरी करता है!
अगर आपलोग इधर आते हैं और गांव में रिसोर्ट विलेज टूरिज्म का मजा लेना चाहते हैं तो आप यहाँ जरूर जाएं! ठीक नेशनल हाईवे के बगल में है!
ऐसे प्रयासों को समर्थन करना चाहिए! इनकी सफलता कई दूसरी सफल कहानिओं को जन्म देगी! कारवां बनेगा जिसकी सख्त जरुरत बिहार को है!
बिहार सरकार और मधुबनी/दरभंगा प्रशाशन से भी आग्रह की वे ऐसे प्रयासों को सहयोग दें
If a citizen appears to surrender on camera and is later killed in an encounter, the burden of explanation on the State becomes extraordinarily high.
The Bharat Bhushan Tiwari case demands an independent and transparent inquiry. The rule of law is tested not by how we treat the innocent, but by how scrupulously we uphold due process for all.
बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर केस की जांच हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस करेंगे! मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया एलान!
इस केस ने बिहार में बीजेपी और सरकार के लिए मुसीबत पैदा कर दी है और अपने लोग भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं!
कड़वी सच्चाई है की बिहार में पुलिस अभी एनकाउंटर जैसे कामों में छूट देने लायक नहीं है! लोकल स्तर पर थानों में इस स्तर का भ्रष्टार है और क्राइम नेक्सस से यह जुड़ा है की एनकाउंटर जैसी चीजों का दुरूपयोग अपना एजेंडा चलाने के लिए होगा!
नृपेंद्र मिश्रा ने कह दिया है कि राम मंदिर चंदा डकैती के विषय में मुख्य दायित्व SBI के लोगों का था। यानी, किसी छोटे कर्मचारी आदि को बलि का बकरा बनाया जाएगा।
किसने गिनने वालों को (या चुराने वालों को) सुरक्षा की क्लीयरेंस दी, आखिर नोटों की गड्डियाँ मंदिर के त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र के बाद भी ले जाने में इतनी ढील किसके कहने पर बरती गई?
आभूषणों का ऑडिट दैनिक/साप्ताहिक/मासिक कभी हुआ है? क्या उसकी गिनती, भार आदि का कोई वीडियो है? असली चुरा कर कोई नकली रख दे, क्या उसके लिए कोई व्यवस्था है?
मंदिर से जुड़े लोगों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी, उनके परिजनों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी भी जाँच के दायरे में होनी चाहिए। पर ऐसा कुछ नहीं होगा, क्योंकि उसमें उच्च पदस्थ लोग भी अपराधी दिखेंगे।
हिन्दुओं की आस्था के साथ ऐसा खिलवाड़ @narendramodi और @myogiadityanath के शासनकाल में होगा, यह मेरे स्वप्न में भी नहीं था। भाजपा और उनके ‘भारत मंडपम्’ समर्थकों का चुप्पी बहुत कुछ कहती है।
ये राकेश यादव सर है, कर्रिएर विल वाले, इन्होने ने कहा की खान सर एक इनफार्मेशन वाले टीचर है, वही रोशन आनन्द सर टीच यानी पढ़ाने वाले टीचर है!
खान सर और रोशन सर को बैलेंस के तौर पर कवर कर दीया, हालंकि कहीं ना कहीं रोशन सर का पक्ष धर रहे !
सबके पढ़ाने का तरीका अलग...Open story
वाह रे क़ानून! वाह रे न्याय संस्थान।
बिहार के सैनिक शुभम कुमार विमान दुर्घटना में शहीद हो गए थे।
कुछ समय पहले उनकी कोर्ट मैरिज श्रेया राय से हुई थी जिसकी जानकारी परिवार को नहीं थी।
बिहार सरकार ने 21 लाख की आर्थिक सहायता चार दिन पहले आई लड़की श्रेया राय को दे दी।
जबकि,जन्म से लेकर पढ़ाया-लिखाया काबिल बनाया माता-पिता ने
बेटे के जाने के बाद सबसे बड़ा दुख हुआ माता पिता को।
लेकिन अंतिम संस्कार से पहले ही श्रेया चेक लेकर अपने घर चली गई।
भाई @grok
एक मंत्री जी की बिटिया अमेरिका पढ़ने जा रही थी. उसके पास इंटरनेशनल सिम कार्ड नहीं थी.
अब मंत्री जी की बिटिया के पास सिम कार्ड नहीं होगा तो उसे परेशानी होगी.
तुरंत एक सरकारी कंपनी को आदेश दिया गया कि मंत्री जी की बिटिया के लिए तत्काल इंटरनेशनल सिम कार्ड अरेंज किया जाए.
फिर बिटिया को सिम मिला और उसके बाद बिटिया रानी ने अमेरिका से खूब बात की, 68,424 रुपए का बिल आया जो सरकारी कंपनी ने भरा.
@grok भाई, ये बताओ ये मंत्री कौन है, जो अपने बच्चों को VIP ट्रीटमेंट दिलवा रहा था?
और क्या से ट्रीटमेंट भारत के गरीब परिवार के बच्चों को मिल सकता है?
भाई, ये 2017 की घटना है जब धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम मंत्री थे। उनकी बेटी नैमिषा प्रधान (अमेरिका में LLM पढ़ने गईं) के इंटरनेशनल सिम कार्ड का ₹68,424 बिल Petronet LNG Ltd (सरकारी PSU) ने भरा।
मंत्रालय के अनुरोध पर तत्काल अरेंज किया गया, बिल 6 महीने बाद पोस्ट-फैक्टो अप्रूव्ड हुआ (दस्तावेज वायरल हैं)।
गरीब परिवारों के बच्चों को मंत्रालय के जरिए ऐसी VIP सुविधा नहीं मिलती। सत्ता के प्रभाव से ही संभव है।
पब्लिक फंड का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।
असम के जोरहाट में पिछले दिनों भारतीय वायुसेना का विमान क्रैश हुआ। पांच जवान शहीद हुए। इनमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी थे। बिहार सरकार की तरफ से 21 लाख रुपए का चेक श्रेया राय को सौंपा गया। श्रेया श्राद्धकर्म से पहले ही चेक लेकर अपने घर चली गई।
दरअसल, शुभम और श्रेया की अगले साल शादी होनी थी। दोनों कोर्ट मैरिज कर चुके थे, यह जानकारी शुभम की फैमिली को नहीं थी। इसलिए कानूनन तौर पर सरकार ने श्रेया को शुभम की पत्नी मानकर सहायता दी।
शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा कहते हैं, "अगर मेरे बेटे ने सच में श्रेया से शादी की थी तो वह मेरी बहू है और चेक पाने की हकदार भी, लेकिन पत्नी का फर्ज निभाना भी तो चाहिए था। पति के श्राद्धकर्म से पहले ही वो चेक लेकर अपने घर चली गई"