इलाहाबाद, पलते हुए लाखों उम्मीदों का शहर है। छोटे गाँवों, कस्बों से निकले छात्र-छात्राओं के अफसर/अधिकारी बन पाने की जिद का शहर है। घर से आने वाले मामूली पैसे में भी बड़े ख़्वाब देखने की हिम्मत का शहर है।
लेकिन ये ख्वाब कब तक पल सकते हैं? कोई जद्दोजहद कब तक चल सकती है? वैकेंसी कहाँ है? लुसेंट, प्रतियोगिता दर्पण और कितने साल उठाये जाएं? इलाहाबाद आने वालों की खबर तो होती है, लेकिन हर साल हार कर घर वापस लौटने वालों की गिनती कौन करेगा?
पिछले पांच साल से कोई आन्दोलन/प्रदर्शन लोगों ने इस आस में नहीं किया कि सरकारें कभी तो सुध लेंगी। लेकिन रोजगार तो सरकारों के एजेंडे में ही नहीं था।
हम इलाहाबाद में सपनों के लिए, महज एक अदद नौकरी की लड़ाई लड़ने निकले नौजवानों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हैं।
“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।”
#uppsc_
#UPPSC_ROARO_ONESHIFT
#UPPSC_No_Normalization
एक विश्वविद्यालय, जिसका इतिहास और वर्तमान दोनों कभी नहीं झुकने वाला है। सबसे ज्यादा इस सरकार की शिकार है। फंड कट से बदहाल है। पर हां! बोलने की कुव्वत अभी भी है ।
https://t.co/KrPWW6nrAf
ईरान की इस महिला की वीडियो और तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हैं,
बताया जा रहा है कि इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी की इस छात्रा ने ईरान के सख्त इस्लामिक ड्रेस कोड
के विरोध में अपने इनर वियर्स को छोड़कर बाक़ी सभी कपड़े उतार दिए,
और सड़क पर चलने लगी,
जिसके बाद छात्रा को हिरासत में लिया गया,
2022 में हिजाब के खिलाफ ईरान की महिलाओं ने देशव्यापी बड़ा प्रदर्शन किया था,
जिसे फौज की ताकत से दबा दिया गया था,
देश के बजट का हलवा बांटा जाता है और खाने वालों में सिर्फ मिश्रा शुक्ला दुबे चौबे श्रीवास्तव द्विवेदी त्रिवेदी चतुर्वेदी त्रिपाठी तिवारी आदि आदि पंडा महोदय सब ही होते है।
हम 85 कहा है? गटर में! नालों में! झोपड़ियों में! सड़क पर! या हम होके भी नही है!
#जातिगत_जनगणना#गिनती_करो
JNU में ABVP चारो खाने चित! सभी चार सेंट्रल पैनल पर वामपंथी एकता वाले उम्मीदवारों की जीत हुई है।
सत्ता-संघ और प्रशासन के विध्वंसक गठजोड़ को आम छात्रों ने ख़ारिज कर दिया। सलाम जेएनयू ❤️
लोकतंत्र का मज़ाक बनाने वाले 'लोकतंत्र के हत्यारों' के लिए क्या सज़ा है?
या 'अमृतकाल' में सज़ा केवल भाजपा के विरुद्ध खड़े विपक्षियों के लिए आरक्षित है?
#ChandigarhMayorElections
कल पूर्णिया में जवाहर नवोदय विद्यालय जाकर पापा की याद आ गई। नवोदय विद्यालय विकसित भारत के उनके विज़न का एक अहम हिस्सा था।
नवोदय विद्यालय ने 1986 से ग्रामीण भारत को नाम मात्र फीस में सिर्फ उच्च गुणवत्ता की प्राथमिक शिक्षा ही नहीं उपलब्ध कराई, बल्कि एक लाख से भी कम वार्षिक आय वाले परिवारों के लाखों बच्चों को एक ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ दिया।
नवोदय विद्यालयों ने गरीब और वंचित परिवार के बच्चों के लिए IIT जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थानों के दरवाज़े खोले, छोटे छोटे गांव से आने वाले बच्चों की आंखों को बड़े सपने दिए।
आज जब देश के उपेक्षित और पिछड़े क्षेत्रों में ‘जवाहर नवोदय विद्यालय’ को ज्ञान का केंद्र बन शिक्षा की रौशनी फैलाते देखता हूं तो गर्व होता है।
‘आधुनिक शिक्षा’ ही न्याय की लड़ाई की सबसे बड़ी शक्ति है।
#BharatJodoNyayYatra
देश के विश्वविद्यालयों में अब SC, ST और OBC के पदों पर आरक्षण ख़त्म करने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर यूजीसी ने एक ड्राफ़्ट बनाया है कि कैसे आरक्षण ख़त्म करें।
बधाई हो! रामराज्य आ गया है। अब हर तरफ़ उसकी बानगी दिखाई देना शुरू हो गयी है। न तो जाति जनगणना होगी और न अब दलितों पिछड़ों आदिवासियों के प्रोफ़ेसर। आरक्षण ख़त्म होगा।
देश में आज भी ओबीसी प्रोफ़ेसर 4% से ज़्यादा नहीं हैं। दलित आदिवासी भी अपनी संख्या से बहुत कम हैं। कहाँ तो और प्रोफ़ेसर बनाये जाने थे। मगर अब आरक्षण ही ख़त्म कर दिया जाएगा।
क्या देश के दलित, पिछड़े, आदिवासी समाज को अब भी समझ आएगा कि उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। अब तो संगठित प्रतिरोध करना होगा। वरना सब ख़त्म हो जाएगा।
गरीबों का घर तोड़ दिया गया, माँ बहनों के आँखों में आंसू है। 2 महीनें तक फुटपाथ पर सोने के बाद वृद्धाआश्रम में रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं लोग।
यह कैसा रामराज्य है भाई, गरीबों के घोषले उजाड़ने के बाद VIP लोगों को निमंत्रण पत्र देकर बुलाया जा रहा है।
क्या आपको पता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने रोहित वेमुला मामले में आरोपी को असिस्टेंट प्रोफेसर के तमगे से नवाजा है. ये हक़ीक़त है अमृतकाल के विश्वविद्यालयों की, जिसने कैंपस के भीतर अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद की, उसके बाद ये हाल है कैंपसों का! साथी रोहित हम शर्मिंदा हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉक्टर लक्ष्मण को हटाया जाना बेहद शर्मनाक। जानबूझकर यह कार्यवाही आज ही की गई है ताकि हर उस शख्स को जो डॉक्टर अंबेडकर को याद करता है और उनका नाम लेता है, उसका वजूद खतम करने की कोशिश की जा रही हैं।
आधिकारिक सूचना. हमसे हमारी धड़कन छीन ली गई. वज़ह नहीं बताई. मगर वज़ह जगज़ाहिर है.
मेरे लहजे में जी-हुजूर न था
इससे ज्यादा मेरा कसूर न था.
वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।
आधिकारिक सूचना. हमसे हमारी धड़कन छीन ली गई. वज़ह नहीं बताई. मगर वज़ह जगज़ाहिर है.
मेरे लहजे में जी-हुजूर न था
इससे ज्यादा मेरा कसूर न था.
वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।
साथी मनीष कुमार के निलंबन व हरेंद्र यादव को परीक्षा देने से रोके जाने के विरोध में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल आइसा इकाई अध्यक्ष विवेक पर चीफ प्रॉक्टर इलाहाबाद विश्वविद्यालय का क्रूर हमला ।
@UoA_Official@Aisa_AlldUniv
साथी मनीष कुमार के निलंबन व हरेंद्र यादव को परीक्षा देने से रोके जाने के विरोध में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल आइसा इकाई अध्यक्ष विवेक पर चीफ प्रॉक्टर इलाहाबाद विश्वविद्यालय का क्रूर हमला ।
इसे देखकर आप गुस्से से लाल हो जाओगे। आप सोचेंगे कि भला ऐसी नीचता कौन कर सकता है।
भारत का राजकीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ थाली में उकेरा गया है, इसी थाली में G 20 में आए मेहमान खाना खायेंगे और फिर इसी में जूठन छोड़ेंगे। आप सोचिए कितना निकृष्ट काम है, देश की इज़्ज़त और मर्यादा मिट्टी में मिलाने वाला काम है। ये कैसी सत्ता की भूख है जो देश की अस्मिता को तार तार कर रही है। देश के सैनिक इसे अपने कंधों पर गर्व से सजाते हैं अब ये इस देश का दुर्भाग्य है जो इन पवित्र प्रतीक चिन्हों को कुछ विदेशियों की जूठन के नीचे रहना पड़ेगा। कभी कभी तो लगता है कि मणिशंकर अय्यर ने एक दम से सच कहा था।