हमारे हाथ में क़लम है जो क़ौमों की सोई हुई तक़दीरें जगा सकता है और जो एक जुंबिश के साथ इंक़लाब बरपा कर सकता है।
Mechanical Engineer । Sociallist । Singer ।
“कल रात?” उसे कुछ याद नहीं था।
तभी लाइट बंद हो गई।
अंधेरे में आवाज़ आई…
“आज मेरी बारी है दरवाज़ा खटखटाने की।”
उसने पीछे देखा।
कोई नहीं था।
फिर दरवाज़े के बाहर उसकी अपनी आवाज़ आई…
“कौन है?”
आगे जो हुआ… अगली कहानी में। 👀
रात को उसके कमरे में रोज़ 3:13 बजे कोई दरवाज़ा खटखटाता था। 🚪
पहली रात उसने सोचा, पड़ोसी होंगे।
दूसरी रात भी वही हुआ।
तीसरी रात उसने पूछा,
“कौन है?”
बाहर से आवाज़ आई…
“तुम।”
वह घबराकर पीछे हट गया।
तभी उसकी नज़र अपने पैरों पर पड़ी।
उसके पैर गीले थे।
जैसे वह अभी-अभी बाहर से आया हो।
फोन पर मैसेज आया:
“आज रात दरवाज़ा मत खोलना।”
उसने पूछा,
“क्यों?”
जवाब आया…
“क्योंकि कल रात तुमने खोला था।”
“फोन नीचे क्यों किया?”
उसने धीरे-धीरे फोन ऊपर किया।
कैमरे में…
वह अकेला खड़ा था।
तभी नया मैसेज आया:
“अब समझे?”
“फोटो में जो दिख रहा था…”
“वो भविष्य नहीं था।”
“वो अभी तुम्हारे पीछे खड़ा है।” 👁️
आगे जो हुआ… वो शायद अगली कहानी में बताना भी ठीक नहीं होगा। 🧵
रात के 3:07 बजे उसके फोन पर एक फोटो आई। 📱
फोटो देखकर उसके होश उड़ गए।
वह उसी कमरे में बैठा था।
लेकिन फोटो में…
वह सो रहा था।
उसने तुरंत कमरे में चारों तरफ देखा।
कोई नहीं था।
फिर एक और मैसेज आया:
“अगली फोटो तुम्हें 3:08 पर मिलेगी।” 👀
लेकिन उसके पीछे…
कोई और भी खड़ा था।
उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
कुछ नहीं।
फिर फोन पर मैसेज आया:
“अब कैमरा बंद मत करना।”
उसने कैमरे की स्क्रीन फिर देखी।
पीछे खड़ा इंसान अब उसके बिल्कुल पास था।
उसने डरकर फोन नीचे कर दिया।
फिर कमरे में किसी ने फुसफुसाकर कहा:
उसके कमरे के अंदर से किसी ने फुसफुसाकर कहा,
“तुमने मुझे ढूँढ क्यों लिया?”
वह धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
कमरे में कोई नहीं था।
फिर फोन पर एक मैसेज आया:
“अब खिड़की मत देखना।”
उसने काँपते हुए
“मैं वही हूँ, जिसे तुमने अभी पीछे देखा था।” 👀
आगे जो हुआ… वो अगली कहानी में। 🧵
रात 2:17 बजे उसे अपनी माँ का फोन आया। 📱
“बेटा… दरवाज़ा मत खोलना।”
वह घबरा गया।
“माँ, आप कहाँ हो?”
कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
फिर माँ ने धीरे से कहा,
“मैं बाहर खड़ी हूँ।”
वह धीरे-धीरे खिड़की के पास गया।
सड़क पर उसकी माँ खड़ी थी।
आगे जो हुआ, वो शायद आप सोच भी नहीं सकते… 👀
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।
फिर माँ ने कहा…
“बेटा…”
“मैं तो पिछले दो घंटे से अस्पताल में हूँ।”
उसके हाथ से फोन लगभग गिर गया।
उसने तुरंत खिड़की की तरफ देखा।
सड़क खाली थी।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन तभी…
उसने काँपते हाथों से फोन उठाया।
दूसरी तरफ उसकी माँ रो रही थी।
“बेटा… मेरी बात ध्यान से सुन।”
“खिड़की से बाहर मत देखना।”
वह जम गया।
उसने धीरे से पूछा,
“माँ… फिर बाहर कौन खड़ा है?”
वह धीरे-धीरे खिड़की के पास गया।
सड़क पर उसकी माँ खड़ी थी।
वही कपड़े।
वही चेहरा।
वह उसे देखकर हाथ हिला रही थी।
तभी…
उसके फोन पर फिर कॉल आई।
माँ कॉलिंग… 📱