आज गालियाँ दे रहे हो- कल जेल में बैठकर पछताओगे कि
जब SC/ST एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ उठी, तब प्रीत सिरोही के साथ क्यों नहीं खड़े हुए।
Stand against SC/ST Act misuse. RETWEET.
इसकी राशि को हटा दी जाय ९०% केस कम हो जाएँगे, मेरी तो समझ में नहीं आता किसी की अस्मिता और सम्मान का पैसे से क्या लेना देना, मतलब पैसा देकर किसी के भी अपमान को जॉस्टिफ़ाई किया जा सकता है क्या? यदि ख़ुद को अपमानित घोषित करके पैसा मिल रहा है तो इस देश जहाँ लोग ट्रक पलटने पर पहले समान भरना शुरू करते हैं ड्राइवर को बचाने की जगह वहाँ लोग ख़ुद को अपमानित घोषित करने में एक मिनट का भी समय नहीं लेंगे ।
I think he will lose in the election. These kind of videos are going to piss general category off. It’s going to be a stab in the back for general category Hindus that have constantly supported Modi.
If only i had seen this video 10 years ago.😤
आपको ये वीडियो भेजते वक़्त बहुत बुरा लग रहा है.....
मैं इससे सहमत भी नहीं हूँ....
लेकिन मेरा मन कर रहा है देश का अंतिम संस्कार भी हो ही जाये.....
शायद नव निर्माण बेहतर हो.....
@narendramodi@PMOIndia
आप हताशा....
और नीचे गिरे मनोबल को अच्छे से जानते है....कयी बार आपने अपने भाषणों में इसका जिक्र भी किया है
रोहित वेमुला की मौत पर चंद वोटों के लिए रोने की इस एक्टिंग ने
शिक्षा संस्थानों में होने वाली हर "आत्महत्त्या" का एजेंडा हमेशा के लिए सेट कर दिया था..!!
There's a REASON why evn Shankh is forbidden in Badrinath Dham. That place has its own sanctity. And nw? DJs are blasting there. Club style music has a time & place. A sacred Teerth is NOT it. This govt's obsession to make every Dham a picnic spot is ruining the soul of Devbhumi.
बाबासाहेब के अपमान और संविधान की अवमानना के लिए भाजपा और उनके संगी-साथी समय-समय पर तरह-तरह के कुतर्क देते रहते हैं। इसी कड़ी में संविधान को बदलने या पूरी तरह से ख़त्म करने की साज़िश करनेवाले अपंजीकृत व भूमिगत रहनेवाले इनके विचारवंशी कह रहे हैं कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखा ही नहीं। इनका बस चले तो यह ये भी कह सकते हैं कि संविधान है ही नहीं। दरअसल ऐसे संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने संविधान को हमेशा ही नकारा है। यही वो लोग हैं जो बाबासाहेब की मूर्तियों को तोड़ते हैं, ख़ासतौर से बाबासाहेब की मूर्तियों के हाथों को क्योंकि उन हाथों में संविधान की किताब होती है।
सच तो ये है कि एकरंगी-सुरंगजीवी नकारात्मक सोच के लोगों ने संविधान को कभी माना ही नहीं क्योंकि ये संविधान ही ग़ैरबराबरी को दूर करने के लिए समता-समानता की बात करता है। यही संविधान इन प्रभुत्ववादियों के उस वर्चस्व को चुनौती देता है, जिस वर्चस्व की वजह से इन्होंने पाँच हज़ार सालों से शोषित, वंचित, ग़रीब ‘पीडीए समाज’ का लगातार दमन किया है।
आज संविधान ‘पीडीए समाज’ की ढाल भी है और रक्षा कवच भी। संविधान से मिला हुआ ‘आरक्षण’ आज इन परंपरागत शक्तिशाली लोगों को फूटी आँख नहीं सुहाता है। ये वो पुरातनपंथी-रूढ़िवादी-दक़ियानूसी लोग हैं जो परिवर्तन चाहते ही नहीं है, जबकि संविधान सकारात्मक परिवर्तन का एक बेहद ताक़तवर दस्तावेज़ है।
हमने पहले भी कहा है, आज फिर दोहरा रहे हैं : शोषणकारियों के ख़िलाफ़, बाबासाहेब हमें संविधान के रूप में काग़ज़ का एक ऐसा ताक़तवर दस्तावेज़ देकर गये हैं, जो लोहे की तलवार से भी ज़्यादा मजबूत है।
संविधान ही पीडीए के भविष्य का विधान है।
संविधान ही संजीवनी है। इसमें संजीवनी की तरह को देश को अच्छा करने की और अच्छा बनाए रखने की अद्भुत शक्ति है। इसीलिए देश का नया नारा ‘जय जवान! जय किसान!! जय संविधान!!! होना चाहिए।
संविधान को चुनौती देनेवाले पाँचों इंद्रियों को सक्रिय करके सुन लें कि ‘देश संविधान से चलेगा, किसी संघ-विधान या मन-विधान से नहीं।’
संविधान था, संविधान है, संविधान रहेगा!
यह याद है? हैदराबाद यूनिवर्सिटी का टॉपर था। स्कॉलरशिप रोक दी गई थी। हॉस्टल से निकाल दिया गया था। सड़क पर रात बिताने को मजबूर किया गया था। गुनाह सिर्फ यह था कि यह एक दलित था।
जय भीम बोलता था।
रोहित वेमुला सबूत है देश में आज भी होते जातिवाद का। #We_support_UGC_Act