राजस्थान के वो ज़िले जिनकी सीमा पड़ोस के देशों से मिलती है (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार के इशारे पर चुन चुन कर मस्जिद मदरसों और दरगाहों को तोड़ने की कार्यवाही पूरी तरह से संविधान विरोधी और अपने ही देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीनने वाली है।
इन इलाक़ों में हिंदू मुसलमान न सिर्फ भाईचारे से रहते हैं बल्कि 1965 हो या 1971 का युद्ध हो, यहां के सभी धर्मों के लोगों ने पाकिस्तान को धूल चटाने में भारतीय सेना का बढ़ चढ़ कर साथ दिया है।
ये वो शांत इलाक़े हैं जहॉं अब सरकार की नफ़रत वाली नज़र पडी है, कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह जी का दौरा और अब उसके बाद सुबह नोटिस और कुछ घंटों में मस्जिदों को ज़मीदोज़ करने की कार्यवाही साफ़ बताती है मुसलमानों के प्रति सरकार की मंशा क्या है ?
आज़ादी के पहले से भी बने कई धर्मस्थलों को तोड़ने का स्थानीय हिन्दू समुदाय भी विरोध कर रहे हैं।
सरकारों को अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीनने का कोई हक़ नहीं है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी और गृह मंत्री @AmitShah जी से अनुरोध है कि राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जैसे ज़िलों में हो रही इस एकतरफ़ा और मुसलमानों को प्रताड़ित करने वाली कार्यवाही पर रोक लगवायें।
एक थी बनारस की दालमंडी
कभी यहां उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान की शहनाई गूंजती थी
आज बुलडोज़र का शोर है
150 साल पुरानी दालमंडी मलबे में तब्दील
181 घर, हज़ारों दुकानें टूट रही हैं
सड़क चौड़ी की जा रही है
अब तक 30 से ज़्यादा मकान टूट चुके हैं
Documentary is Live on our Youtube
مرکزی حکومت کے ”وندے ماترم“ تمام اشعار کو اسکول و سرکاری تقریبات میں لازمی قرار دینے کا نوٹیفیکیشن غیر آئینی، مذہبی آزادی و سیکولر اقدار کے منافی اور عدالت عظمیٰ کے فیصلے کے خلاف ہے۔ اس میں درگا اور دیگر دیویوں اور دیوتاؤں کی پوجا اور وندنا کی بات کہی گئی ہے۔ جو مسلمانوں کے عقیدے سے راست متصادم ہے، اس لئے مسلمانوں کے لئے یہ ہرگز بھی قابل قبول نہیں ہے۔ کیونکہ مسلمان صرف ایک اللہ وحدہ لا شریک کی ہی عبادت کرتا ہے، اسلام خدا کی ذات میں ذرہ برابر بھی شرک کو برداشت نہیں کرتا۔ ملکی عدالتوں نے بھی اس کے دیگر اشعار کو سیکولر اقدار کے منافی قرار دیتے ہوئے ان کے پڑھے جانے پر پابندی عائد کر رکھی ہے۔ لہذا مرکزی حکومت سے ہمارا مطالبہ ہے کہ وہ فی الفور اس نوٹیفیکیشن کو واپس لے بصورت دیگر آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اسے عدالت میں چیلینج کرے گا۔
#AIMPLB | #VandeMataram
नफ़रत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब ज़ालिमों के गले में ज़ंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ़ के साये (रास्ते) में तरक़्क़ी करेगा।
सांप्रदायिक शक्तियाँ और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था, लेकिन अंततः वह व्यवस्था समाप्त हो गई और वहाँ लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है जब वहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो, न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर।
सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साज़िश सफल नहीं हो पाएगी। सेक्युलरिज़्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। इतिहास बताता है कि जो क़ौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है, उसे कुर्बानियाँ देनी पड़ती हैं।
सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे स्वयं मिट गए। हम एक जीवित क़ौम हैं, और जीवित क़ौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं।
मौजूदा हालात से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब अत्याचार का अंत होगा और यह देश फिर से प्रेम, सद्भाव और न्याय के रस्ते में आगे बढ़ेगा।
#SaveDemocracy
#ArshadMadani
भारत में आजादी के बाद हुई जनगणनाओं में...
1951 में हिंदू 30.4 Cr, मुस्लिम 3.4 Cr.
1961 में हिंदू 36.7 Cr, मुस्लिम 4.7 Cr.
1971 में हिंदू 45.3 Cr, मुस्लिम 6.1 Cr.
1981 में हिंदू 56.2 Cr, मुस्लिम 8 Cr.
1991 में हिंदू 69 Cr, मुस्लिम 10.7 Cr.
2001 में हिंदू 82.8 Cr, मुस्लिम 13.8 Cr.
2011 में हिंदू 96.6 Cr, मुस्लिम 17.2 Cr.
2001-2011 में हिंदू आबादी 13.8 Cr बढ़ी था और मुस्लिम आबादी 3.4 Cr बढ़ी।
आपके डिलीट किये गए ट्वीट में, आपने कहा था कि भारत में मुस्लिम आबादी अब 24.6% हो गई है। मतलब, जो 2014 में 15-16% थी, वह अब भाजपा सरकार 11 साल के राज के बाद 24.6% हो गई. और इसका कारण आप वृद्धि और घुसपैठ बता रहे हैं। तो भाई, सरकार किसकी थी, 11 साल तक गृह मंत्री क्या कर रहे था?
اسرائیل نے مسجد پر بم گرایا اور بہت سے لوگ شہید ہو گئے اس ویڈیو کو اتنے دور دور تک پھیلائے واٹس ایپ پر گروپوں میں شیئر کریں تاکہ اسرائیل کا ظالم جو مسلمانوں پر اج کل کر رہے ہیں لوگوں کو دنیا والوں کو پتہ چل جائے
हम वक़्फ़ संशोधन बिल को पूरी तरह खारिज करते हैं और किसी भी ऐसे कानून को नहीं मान सकते जिससे वक़्फ़ की स्थिति और वक़्फ़ करने वाले की मंशा बदली जाए।
अब साफ़ है कि देश फासीवाद की गिरफ़्त में है। ऐसे में संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वे संविधान की रक्षा के लिए आगे आएं।
धर्म के नाम पर लोगों को बांटना देश को कमज़ोर करने जैसा है, जो समाज की शांति और एकता के लिए खतरनाक है।
#SayNoToWaqfBill
اگر یہ ڈاکٹر کوئی یہودی یا عیسائی ہوتا تو ہالی وڈ اس کے اوپر فلمیں بناتا۔۔
لیکن یہ فلسطین کا ایک مسلمان ڈاکٹر ہے جو کسی صورت میں اپنے مریضوں کو چھوڑ کر ہسپتال سے نہیں جانا چاہتا تھا۔۔
ایک اکیلا ڈاکٹر اسرائیلی ٹینکوں کے سامنے کھڑا ہے۔۔
پوری دنیا کے لیے شرم سے
اسلام ایک ابدی مذھب ہے!
ہم اس ملک میں زندہ ہیں، یہیں رہیں گے، اور یہیں کی مٹی میں دفن ہوں گے، ہمارا مذہب مٹ جانے والا مذہب نہیں ہے، تاریخ شاہد ہے کہ اسلام کو مٹانے کا اعلان کرنے والے خود مٹ گئے اور اسلام زندہ رہا اور قیامت تک زندہ رہے گا۔
दो नाबालिग लड़के जो 3 मुसलमान बच्चों को पीट रहे थे और उनसे JSR के नारे लगवा रहे थे, उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। ये कैसा समाज है जिसके लोग अपने भगवान की भक्ति खुद नहीं करते, बल्कि गैर-मजहब के लोगों को मार-पीट कर उनसे नारे लगवाते हैं? सोचिए, इन लड़कों का सामाजिक माहौल और उनकी परवरिश कैसी हो रही है कि ये अब से ही लिंचिंग में कोर्स कर चुके हैं। सवाल ये है कि क्या भाजपा के मुख्यमंत्री खुद इन लड़कों की गुलपोशी करेंगे या मोदी के कोई मंत्री को बुलाया जाएगा? इन लड़कों में वो सारे गुण हैं जो भाजपा के एक भावी नेता में होने चाहिए।
संभल जैसी घटना को रोकने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद सुप्रीम कोर्ट गई है।
संभल में पुलिस की अराजकता, अन्याय, क्रूरता और दरिंदगी की जीती जागती तस्वीर है, देश में वर्षों से फैली नफरत अब गोलियों तक पहुंच गई है।
पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के बावजूद निचली अदालतें मुस्लिम पूजा स्थलों का सर्वेक्षण करने के आदेश जारी कर रही हैं जो इस कानून का उल्लंघन है । पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून का पालन न करने से देश की शांति बिगड़ रही है ।
जमीयत उलमा-ए-हिंद संभल में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग और बर्बरता का शिकार हुए लोगों के साथ में खड़ी है।
#SambhalJamaMasjid
सुल्तान-ए-हिन्द ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (RA) भारत के मुसलमानों के सबसे अहम औलिया इकराम में से एक हैं। उनके आस्तान पर सदियों से लोग जा रहे हैं और जाते रहेंगे इंशाअल्लाह। कई राजा, महाराजा, शहंशाह, आए और चले गये, लेकिन ख़्वाजा अजमेरी का आस्तान आज भी आबाद है। 1991 का इबादतगाहों का क़ानून साफ़ कहता है के किसी भी इबादतगाह की मज़हबी पहचान को तब्दील नहीं किया जा सकता, ना अदालत में इन मामलों की सुनवाई होगी। ये अदालतों का क़ानूनी फ़र्ज़ है के वो 1991 एक्ट को अमल में लायें। बहुत ही अफ़सोसनाक बात है के हिंदुत्व तंज़ीमों का एजेंडा पूरा करने के लिए क़ानून और संविधान की धज्जियाँ उड़ायी जा रहीं हैं और @narendramodi चुप चाप देख रहे हैं।