बड़ी खबर,
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी के प्रपौत्र राजरतन आंबेडकर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात करके नारा दिया,
“मिले आंबेडकर और अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष”
पहले रैलियां 'समर्थन' का प्रतीक थीं, अब 'शक्ति प्रदर्शन' का ठेका हैं। टिकट की चाह में दावेदार भीड़ तो ले आते हैं, पर क्या वो वोट में बदलेगी?
खासकर उन लोगों का क्या, जो हर रैली में 'भीड़ का हिस्सा' बनकर अपनी कमाई ढूँढ लेते हैं। राजनीति अब सेवा नहीं, शुद्ध व्यापार है।
गाजियाबाद, हापुड़, नोएडा जहां से समाजवादी पार्टी की लोकसभा सीट पर जीत छोड़िये, विधानसभा सीटें जीतने के लाले रहे हैं. वहां पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव की रैली में जिस तरह से भीड़ है, वह मेरी बात की तस्दीक है कि 2027 में नोएडा, गाजियाबाद में भाजपा के पसीने छूट जाएंगे...इसका मुख्य कारण पुलिस है !
#चुनाव में अभी एक साल है, क्या होगा ? कहा नहीं जा सकता...लेकिन पिछले दो साल में सिर्फ 10 पुलिस लीडरों और 4 IAS अफसरों ने यूपी की जनता को "भाजपा द्रोही" बना दिया है !
मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री है जो भारत के सबसे लोकप्रिय पीएम भी रहे और अब सबसे अलोकप्रिय भी है भले आने वाले सभी चुनाव जीत जाए लेकिन जो छवि का पतन हुआ है उनके वो भारत के इतिहास में किसी पीएम का नहीं हुआ , ये भी एक रिसर्च का विषय रहेगा कैसे नायक बना खलनायक