भारत की परंपरा में गुरु और भगवा ध्वज — दोनों किसी व्यक्ति या वस्तु मात्र नहीं, बल्कि तत्त्व हैं। जहाँ गुरु अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है, वहीं भगवा ध्वज त्याग और बलिदान की प्रेरणा देता है। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
ध्यानमूलं गुरुर्मूर्तिः पूजामूलं गुरुर्पदम्।
मंत्रमूलं गुरुर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरुकृपा॥
( स्कन्द पुराण के अनुसार गुरु की मूर्ति ध्यान का आधार है, उनके चरण, पूजन का आधार हैं, उनके वचन, मंत्र का स्रोत हैं और उनकी कृपा ही मोक्ष का कारण है।) #vskmalwa#गुरुपूर्णिमा
श्री गुरुपूर्णिमा का दिन सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के लिए सनातन हिन्दू परंपरा का एक पर्व है, सभी सनातनी हिंदू इसे संसार भर में मनाते हैं। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
भारत की परंपरा में गुरु और भगवा ध्वज — दोनों किसी व्यक्ति या वस्तु मात्र नहीं, बल्कि तत्त्व हैं। जहाँ गुरु अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है, वहीं भगवा ध्वज त्याग और बलिदान की प्रेरणा देता है। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
किसी टीज़र को हटाना सही समाधान नहीं है। यदि कोई फ़िल्म ऐसे मामले पर आधारित है जो वर्षों से सार्वजनिक चर्चा और कानूनी कार्यवाही का हिस्सा रहा है, तो लोगों को उसे देखने और अपनी राय बनाने का अधिकार होना चाहिए। पारदर्शिता, सेंसरशिप से बेहतर है। जनता को स्वयं फैसला करने दीजिए।
हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है - कहीं गुरु रूप में कोई संत, कहीं ऋषि-महर्षि, और कहीं स्वयं भगवान तक को प्रतिष्ठित किया गया है। और कहीं गुरु के रूप में केसरिया ध्वज #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
भगवा ध्वज हिंदू समाज के सतत संघर्षों और विजयश्री का साक्षी रहा है। हिंदू संस्कृति और हिंदू राष्ट्र ‘भगवा ध्वज’के बिना हम हिंदू धर्म की कल्पना नहीं कर सकते। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
श्री गुरुपूर्णिमा को उस अवसर के प्रतीक रूप में मनाया जाता है जब भगवान शिव जी ने अपने आदिगुरु स्वरूप में सप्त ऋषियों को योग विद्या का ज्ञान देना आरंभ किया था।#गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
भारत में गुरुपूर्णिमा पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है - जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। #गुरु_पूर्णिमा#GuruPurnima#vskmalwa
भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था। #भगवान_महावीर#MahavirJayanti#vskmalwa
Rk2
भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था। #भगवान_महावीर#MahavirJayanti#vskmalwa
Rk1
संविधान के अनुशासन से हम सब बंधे है। मैं कहता हूं कि अपने वैश्विक धर्म, भारत का धर्म, आज का आचार धर्म संविधान में उल्लिखित है, उससे हम सब बंधे है
- डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक
#RepublicDay#गणतंत्र_दिवस#vskmalwa
कर्नाटक की प्रतिष्ठित पर्यावरणविद, 'वृक्ष माता', पद्मश्री तुलसी गौड़ा जी के स्वर्गवास की खबर सुनकर मन द्रवित हुआ। उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति की सेवा में समर्पित कर दिया था और अनगिनत पौधे लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाई। उनका परलोकगमन पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि दिव्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों व शुभचिंतकों को इस दुख को सहने का साहस प्रदान करें।
ॐ शांति!💐🙏
#Vraksh_mata #Encyclopedia_of_forest
#TulsiGowda #Padmashri
सोशल मीडिया पर एक वैचारिक युद्ध चल रहा है और युद्ध में कोई भी तटस्थ नहीं होता है। इसलिए हमें देशहित को चुन कर अपनी भूमिका निभानी ही होगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भारत विरोधी विमर्श खड़ा करने वाली वैश्विक शक्तियों के विरुद्ध, दीर्घकालिक और विषयवार योजना पर कार्य करना होगा।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ श्री अभिनव खरे
@iabhinavKhare
#vskmalwa
#SMCUjjain24
#SMC24
उज्जैन सोशल मीडिया कॉन्फ्लुएंस 2024 -
हमारे पुराणों में विवाह के अनेकों ऐसे प्रसंग उपलब्ध हैं जिनमें "जाति"कभी प्रश्न नहीं बनी थी। वस्तुतः पांचवीं शताब्दी के पूर्व हमारी संस्कृति में "जाति" थी ही नहीं। हमारी गौत्र परम्परा समरसता का बहुत बड़ा उदाहरण है क्योंकि हिंदू समाज मे अलग-अलग जाति वर्गों के समान गौत्र पाए जाते है।
- सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय @AshwiniUpadhyay
#SMCUjjain24
#SMC24
#vskmalwa
उज्जैन सोशल मीडिया कॉन्फ्लुएंस 2024 -
जब अरब भारतीय ज्ञान परम्परा के संपर्क में आया तो वहां इस्लामिक स्वर्ण युग आया और जब यूरोप इस ज्ञान के संपर्क में आया तो यूरोप में भी अंधेरे युग का समापन हो कर ज्ञान का प्रकाश हुआ। भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्वपूर्ण ग्रन्थ पंचतंत्र का प्रसार पर्शिया, अरब, जर्मनी, वियतनाम, कंबोडिया और आइसलैंड से फिलीपींस तक कई देशों में हुआ। ऐसे ही अन्य कई ग्रंथों ने भी संपूर्ण विश्व में ज्ञान का प्रसार किया है।
- लेखिका शिक्षाविद एवं भारतविद श्रीमती दीपाली पाटवदकर @DPatwadkar
#SMCUjjain24
#SMC24
#vskmalwa