A record rewritten 🇦🇷📷 Leo Messi becomes the FIFA World Cup’s all-time leading men’s goalscorer with 17 goals. Congratulations, Messi!
#fifaupdates#messi
How we can say our country is vishwa guru?
@khesariLY
This is library or coaching in Lucknow.
Suddenly it was burning.
And it is very sadness that news output says 14 students died.
लखनऊ की एक लाइब्रेरी में आग लग गई,
छात्रों ने कूदकर जान बचाई,
अब पता चलेगा कि, लाइब्रेरी में
फायर NOC नहीं था,
फायर एक्साइटिंग्सर 5 साल पुराने थे,
छात्रों के निकलने की पर्याप्त जगह नहीं थी,
उससे पहले सब भांग खाए थे।
भोजपुरी का सुपरस्टार खेसारी लाल भरत तिवारी के घर भरत तिवारी के घर गए उनकी मां से मिले और जो पूरा बातचीत है आप इस वीडियो में देख सकते हैं खेसारी लाल एक बहुत नेक दिल इंसान है
@khesariLY
निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
भरत तिवारी मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि घटना के समय वास्तविक स्थिति क्या थी? क्या वह पुलिस पर फायरिंग कर रहा था या उसने आत्मसमर्पण कर दिया था? इस प्रश्न का उत्तर केवल स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से ही मिल सकता है।
यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई, तो यह केवल पुलिस कार्रवाई पर सवाल नहीं होगा बल्कि संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन भी माना जा सकता है। वहीं यदि पुलिस पर वास्तविक हमला हुआ था और जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, तो कानून पुलिस को आवश्यक बल प्रयोग की अनुमति देता है।
निष्कर्ष: किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय अदालतों के माध्यम से होना चाहिए, न कि गोली के माध्यम से। इसलिए भोजपुर एनकाउंटर मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच ही जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।
भोजपुर एनकाउंटर पर सवाल: यदि आत्मसमर्पण हो चुका था, तो क्या एनकाउंटर कानूनी था?
भोजपुर में भरत तिवारी की मौत के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। इस दावे के बाद पूरे इलाके में जनाक्रोश देखने को मिला और कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
भारतीय कानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को "जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार" प्रदान करता है। किसी व्यक्ति को केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही उसके जीवन से वंचित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने People's Union for Civil Liberties (PUCL) मामले में स्पष्ट किया था कि पुलिस एनकाउंटर की हर घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि कोई आरोपी आत्मसमर्पण कर चुका हो या पुलिस की हिरासत में हो, तो उसके खिलाफ घातक बल (lethal force) का प्रयोग सामान्यतः वैध नहीं माना जाता।
कानून के अनुसार पुलिस केवल निम्न परिस्थितियों में घातक बल का प्रयोग कर सकती है:
आत्मरक्षा में (Right of Private Defence)
किसी अन्य व्यक्ति के जीवन की रक्षा के लिए
जब आरोपी तत्काल और गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा हो
जब कम बल का प्रयोग पर्याप्त न हो
यदि कोई व्यक्ति हथियार डाल चुका हो, हाथ ऊपर कर आत्मसमर्पण कर चुका हो, या पुलिस नियंत्रण में हो, तो उसे मारना कानूनन उचित नहीं माना जाएगा और ऐसी स्थिति में मामला फर्जी एनकाउंटर की श्रेणी में आ सकता है।
भारत में टेलीकॉम कंपनियों की खराब नेटवर्क समस्या: ताजा खबरें (जून 2026)भारत में Jio, Airtel, Vi जैसी कंपनियों के नेटवर्क की शिकायतें आम हैं। हाईवे पर कॉल ड्रॉप, कम स्पीड, आउटेज और फाइबर सर्विस में दिक्कतें ग्राहकों को परेशान कर रही हैं।
भोजपुर (बिहार) में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: पूरी खबर बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 18 जून 2026 को 30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी (जिन्हें स्थानीय लोग सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे) का पुलिस एनकाउंटर हुआ। वह पीएमसीएच पटना में इलाज के दौरान घायल होकर मर गया। इस घटना पर भारी विवाद है—परिवार और ग्रामीण इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई बता रही है।
https://t.co/ITjj8FUEsp
पुलिस का दावाभरत तिवारी सोशल मीडिया पर हथियार दिखाकर वीडियो डालकर प्रशासन को चुनौती दे रहा था।
जब पुलिस टीम पहुंची, तो उसने पिस्तौल तान दी और फायरिंग की।
पुलिस ने जवाबी फायरिंग में उसके पैरों (दोनों घुटनों और जांघ) में 4 गोलियां मारीं।
भरत को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
परिवार और ग्रामीणों का आरोपभरत ने फेसबुक लाइव में पिस्तौल फेंककर सरेंडर कर दिया था।
इसके बावजूद पुलिस ने करीब से 4-5 गोलियां मारीं।
भरत का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था; वह कोविड काल में मदद करता था और समाज के मुद्दों पर आवाज उठाता था।
परिवार ने इसे मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक पर फर्जी एनकाउंटर बताया है।
घटना के बाद क्या हुआ?आरा और भोजपुर में भारी प्रदर्शन, सड़क जाम, लाठीचार्ज।
परिवार ने DSP जगदीशपुर, SHO शाहपुर और अन्य पुलिसकर्मियों पर FIR और बर्खास्तगी की मांग की।
भोजपुर SP ने जांच के बाद SHO राजेश मालाकार, ASI, SI और कुछ सिपाहियों को सस्पेंड किया।
विपक्ष CBI जांच, मुआवजा और परिवार को नौकरी की मांग कर रहा है।
फीफा (FIFA) की शुरुआत 21 मई 1904 को फ्रांस के पेरिस में हुई थी。 इसे फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय प्रशासन और प्रतियोगिताओं के नियमन के लिए बनाया गया था。 इसका पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में खेला गया था, जिसे मेजबान देश उरुग्वे ने ही जीता था。 आज इसका मुख्यालय ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड में है。फीफा (FIFA) का पूरा नाम "फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन" (Fédération Internationale de Football Association) है。
संस्थापक देश: सात यूरोपीय देशों - बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड ने मिलकर पेरिस में फीफा की नींव रखी
#FIFAWorldCuo
1930 FIFA worldcup final
फीफा (FIFA) की शुरुआत 21 मई 1904 को फ्रांस के पेरिस में हुई थी。 इसे फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय प्रशासन और प्रतियोगिताओं के नियमन के लिए बनाया गया था。 इसका पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में खेला गया था, जिसे मेजबान देश उरुग्वे ने ही जीता था。 आज इसका मुख्यालय ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड में है。फीफा (FIFA) का पूरा नाम "फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन" (Fédération Internationale de Football Association) है。
संस्थापक देश: सात यूरोपीय देशों - बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड ने मिलकर पेरिस में फीफा की नींव रखी
#FIFAWorldCuo
1930 FIFA worldcup final
TMC में बड़ी टूट हुई है. पार्टी के 20 सांसद बागी हो गए है. इन सांसदों के गुट ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया है. इस पार्टी में विलय के बाद इसकी चर्चा देशभर में होने लगी है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर NCPI कौन सी पार्टी है, जो अचानक लोकसभा में 5वीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है.