जयपुर: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मांग
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के शोषण की सूचना प्रधानाचार्य से मांगी है, जबकि प्रधानाचार्य शोषण करने वाला खुद है तो वो जानकारी क्यों देगा? शोषण की सूचना कर्मचारी से ही मांगनी चाहिए…
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हर महीने वेतन से RGHS के नाम पर कटौती होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बहुत सारे हॉस्पिटल में इलाज की सुविधा नहीं मिलती,हर बार टालमटोल कर दिया जाता हैं,कर्मचारी कोई एहसान नहीं, अपना हक मांग रहे हैं।
कृपया RGHS व्यवस्था को और मजबूत बनाइए ताकि हर कर्मचारी को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
#RGHS_कर्मचारियों_का_हक
@RajCMO@BhajanlalBjp
इस मामले की पूरी कार्यवाही हमने संभाल रखी है — सचिवालय स्तर तक।
इस आदेश पर क्या कार्यवाही होती है और शिक्षा विभाग की ओर से क्या रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है, उसकी पूरी निगरानी एवं जांच हमारी टीम द्वारा की जाएगी।
यदि शिक्षा विभाग की रिपोर्ट हमें तथ्यों के अनुरूप या संतोषजनक नहीं लगती है, तो तुरंत मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को अवगत करवाया जाएगा और आवश्यक आपत्ति दर्ज करवाई जाएगी।
CMO में मुख्यमंत्री जी के समक्ष यह शिकायत हमारी ओर से ही दर्ज करवाई गई है। जब तक हमें उचित एवं संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तब तक हम इस मामले पर लगातार फॉलोअप करते रहेंगे।
हमें आवश्यकता पड़ने पर रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करवाने और असंतुष्टि व्यक्त करने का अधिकार है, इसलिए सभी साथी थोड़ा धैर्य रखें और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।
हमारी टीम इस विषय पर पूरी तरह सक्रिय है।
बस थोड़ा इंतजार और धैर्य रखें। 🙏
🔥 मुद्दा उठ चुका है, अब समाधान होने तक प्रयास जारी रहेंगे।
जब तक नवचयनित सहायक कर्मचारियों की समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो जाता, हमारी आवाज लगातार उठती रहेगी। 🔥
आज से ठीक 1 साल पहले जब राहुल गांधी जी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया था और कहा था कि
मुझे एक बार चुनाव आयोग का डेटा अगर मिल जाता है तो मैं साबित कर दूंगा कि वोट चोरी हुई है और लोग चोरी से ही सरकार बनाए हैं।
आज राहुल गांधी जी सही साबित हुए और ताज्जुब होता है कि इतने दूरदर्शी नेता को लोग पप्पू कहते रहते हैं। ऐसे लोगों को एकबार फिर से अपना नजरिया बदलना चाहिए।
राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति बहुत ही बेहतर है वो अलग बात है कि सत्ता में नहीं आ पाए हैं लेकिन PM पद के दमदार दावेदार हैं।
DU में अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले विजय शंकर मीणा के माता-पिता की वोट देने की अपील... साधारण घर के बच्चे का देश की राजधानी तक का सफ़र वाकई एक संघर्ष की मिसाल है... विजय की विजय बहुत जरूरी है.. यह जीत सिस्टम के खिलाफ एक आम इंसान की जीत होगी...
शिक्षा विभाग में नवचयनित सहायक कर्मचारियों से 12-12 घंटे की चौकीदारी करवाने तथा नियमानुसार अवकाश नहीं देने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
यदि संस्था प्रधानों द्वारा इस प्रकार के आदेश दिए जा रहे हैं, तो यह गंभीर विषय है। किसी भी कर्मचारी से उसकी सेवा शर्तों एवं निर्धारित दायित्वों के विपरीत कार्य करवाना तथा नियमानुसार देय अवकाश से वंचित करना कर्मचारी के अधिकारों एवं सेवा नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
इसी विषय को स्पष्ट करने के लिए हमारे द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के माध्यम से राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सेवा नियम, 1963 एवं राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सेवा नियम, 1999 से संबंधित आधिकारिक नियम एवं दस्तावेज उपलब्ध करवाने की सूचना मांगी गई है।
इन सेवा नियमों से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्राप्त होते ही उनका अध्ययन कर सक्षम स्तर पर प्रकरण से अवगत करवाने तथा नियमानुसार उचित कार्रवाई करवाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
सहायक कर्मचारियों के अधिकारों एवं सम्मान के लिए हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। 🙏
— प्रवेश शर्मा
सुनने में आया है कि निकाय चुनावों में राजस्थान के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री दोनों के गृह जिले हाथ से निकल गए है।
यह भी सुनने में आ रहा है कि इसी तरह शिक्षा और रोज़गार के मुद्दे को दरकिनार किया गया तो स्थिति और विकट हो जाएगी। 🌝
ये तो अति हो गई
वैसे शिक्षा विभाग में ढाई साल से कोई काम नहीं हो रहा है जो हो भी हो रहा है सब राम भरोसे हो रहा है
लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से ये कार्य करवाना भी न्यायोचित नहीं है ।।
विशेष- समझ में ये नहीं आ रहा है कार्य योजना स्पष्ट क्यो नहीं है कौनसा कार्य कौन करेगा ये भी शिक्षा विभाग तय नहीं कर पा रहा है ।
#पलटी विभाग
शिक्षा विभाग में संस्था प्रधानों की मनमानी पर रोक जरूरी
शिक्षा विभाग में कुछ संस्था प्रधानों द्वारा नवचयनित सहायक कर्मचारियों के साथ मनमानी, शोषण एवं अधिकारों के हनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
विद्यालयों में शौचालय, पानी की टंकी एवं अन्य स्वच्छता कार्यों के लिए उपलब्ध बजट का नियमानुसार उपयोग किया जाना चाहिए। यदि किसी विद्यालय में स्वच्छता के लिए निर्धारित बजट होने के बावजूद नवचयनित सहायक कर्मचारियों पर जबरन सफाई कार्य थोपा जा रहा है और बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
राजस्थान प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा विद्यालयों में स्वच्छता एवं आवश्यक कार्यों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले बजट का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही, कुछ विद्यालयों उच्च जाति के संस्था प्रधानों के द्वारा जाति के आधार पर सहायक कर्मचारियों के साथ भेदभाव एवं शोषण की शिकायतें भी प्राप्त हो रही हैं। यदि ऐसी शिकायतें जांच में सत्य पाई जाती हैं, तो दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
सभी सहायक कर्मचारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार के भेदभाव या अनुचित व्यवहार का शांतिपूर्ण एवं नियमसम्मत तरीके से विरोध करें।
हम अपने सभी भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हमारा अधिकार है। 🙏🤝
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एक मंत्रालयिक कर्मचारी होता है उसका कार्य मंत्रालयिक कर्मचारियों के अधीन सहायक के रूप में कार्य करना है।
उसका काम शौचालय व मूत्रालय सफाई का नहीं है।
कल के दिन स्कूल की बिल्डिंग का काम चलेगा तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से बेलदारी भी करवायेंगे ??
एक आंदोलन है, जो चाहता है कि देश के सभी स्कूल ठीक हो। वो चाहता है कि देश के गरीब, पिछड़े तबके से आने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिले। ज़मीनी स्तर पर वो सरकार और प्रशासन को स्कूलों के लिए जवाबदेह बनाना चाहता है।
एक राजनैतिक दल है, जिसकी देश के 60% राज्यों में सरकार है। वो स्कूल ठीक करने की बजाय आंदोलन करने वालो के साथ हिंसा करने, मारपीट करने, गाली-गलौज करने, और फर्जी FIR करने में व्यस्त है।
मजे की बात यह है कि यह दल खुद को देशभक्त और आंदोलन को गद्दार कहता है।
ध्यान भटकाने वाले stunts और बेतुकी बातों में उलझाकर,
भाजपा अपनी करतूतों से पीछा छुड़ाना चाहती है,
पर कांग्रेस पार्टी + जनता महँगाई पर सवाल पूछती रहेगी !
त्योहारों पर आम आदमी की रसोई का हिसाब देखिए
🧅 प्याज़ के दाम सालभर में 59% तक बढ़े, कई शहरों में ₹50–60/kg
🍚 चीनी ₹60–70/kg, कहीं ₹72/kg तक
🛢️ सरसों तेल ₹200/L के पार
📈 Food Inflation 5.52%
📈 Wholesale Inflation 9.78%
12 साल से भाजपा सरकार है, और “अच्छे दिनों” का आलम ये है कि कभी दाल, कभी सब्ज़ी, कभी तेल, कभी चीनी आम आदमी का बजट बिगाड़ देती है।
कभी उसे पप्पू बोलकर ट्रोल किया गया... कभी पार्ट टाइम राजनेता बताकर इमेज खराब की गई... मुद्दे को बीच में छोड़कर विदेश जाने को इश्यू बनाया गया... तमाम हथकंडों के बावजूद अब राहुल गांधी ने अपनी वर्किंग स्टाइल से करारा जवाब दे दिया है... पहले से ज्यादा परिपक्व हो गए है... अब और आक्रामक होकर सड़क पर उतरकर सीधे हुकूमत से टकरा रहे है... भारत जोड़ो यात्रा से आईं समझ ने अब उनकी संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष करने वाले नेता की स्थापित छवि गढ़ दी है... जेन जी आंदोलन से राहुल गांधी ने अपने बदले तेवरों से विपक्ष, सिस्टम और यहां तक की खुद की पार्टी को भी हैरान कर दिया है... अब वह किसी मुद्दे को बीच में छोड़ने के बजाय उसे मंजिल तक ले जा रहे हैं... लोगों से अब सीधे कनेक्ट हो रहे हैं.... वहीं पब्लिक अब उन्हें पसंद ही नहीं कर रही बल्कि फ्यूचर का लीडर उन्हें बनते देखने के लिए बेताब और बेचैन है... यह सब कुछ रातो रात नहीं बदला, एक दिन की तपस्या नहीं है..इस कांटों भरे सफ़र में उन्होंने बहुत कुछ सहा है, बहुत कुछ सुना हैं....... इतिहास में यह जरूर याद रखा जाएगा कि सियासत के किस दौर में वह बंदा डिगा रहा, टिका रहा... अब टाइम शुरू हो गया है....
शिक्षा विभाग का पतन- शिक्षा मंत्री जी में ये निश्चय कर लिया है की शिक्षा विभाग में कुछ नहीं छोड़ा जाएगा पूरी तरीके से बर्बाद करके जाएँगे
न अच्छी बिल्डिंग है न एक भी योजना
विशेष- एक ढंग की भर्ती नहीं हुई अब शुरू कर रहे है विद्या सम्बल योजना के नाम से गेस्ट फैकल्टी लगाना (पूर्व सरकार में 15 दिन मेहनत करके कैंसल करवाने का कार्य किया था क्योकि सरकार सुनने वाली वार्ता करने वाली थी ) ।
गेस्ट फैकल्टी में भी कोई पारदर्शिता नहीं सब फ़र्ज़ीवाडे से मनमर्जी से बिना मॉनिटरिंग के केवल तीन दिन में प्रक्रिया पूरी की जा रही है
ऑफलाइन मोड पर किसी को हवा तक नहीं लगेगी हुआ क्या
लेकिन शिक्षा विभाग और चिकित्सा विभाग से उम्मीद करना ही बेकार है ।
इन सब पीड़ाओं का एक ही समाधान है आने वाले लोकल चुनाव में नोटा दबा देना लेकिन कमल मत दबा देना वरना रोने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है
तानाशाही और घमंड चरम पर इसलिए पतन जरूरी है