रेलवे को गतिशील और सुरक्षित बनाए रखने वाले ट्रैकमैन भाइयों के लिए सिस्टम में ‘न कोई प्रमोशन है, न ही इमोशन’।
भारतीय रेल क��्मचारियों में ट्रैकमैन सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं, उनसे मिल कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को समझने का मौका मिला।
ट्रैकमैन 35 किलो औजार उठाकर रोज 8-10 कि.मी. पैदल चलते हैं। उनकी नौकरी ट्रैक पर ही शुरू होती है और वो ट्रैक से ही रिटायर हो जाते हैं । जिस विभागीय परीक्षा को पास कर दूसरे कर्मचारी बेहतर पदों पर जाते हैं, उस परीक्षा में ट्रैकमैन को बैठने भी नहीं दिया जाता।
ट्रैकमैन भाइयों ने बताया कि हर साल करीब 550 ट्रैकमैन काम के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा देते हैं, क्योंकि उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
विपरीत परिस्थितियों में बिना बुनियादी सुविधाओं के दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले ट्रैकमैन भाइयों की इन प्रमुख मांगों को हर हाल म���ं सुना जाना चाहिए।
1. काम के दौरान हर ट्रैकमैन को ‘रक्षक यंत्र’ मिले, जिससे ट्रैक पर ट्रेन आने की सूचना उन्हें समय से मिल सके।
2. ट्रैकमैन को विभागीय परीक्षा (LDCE)के जरिए तरक्की का अवसर मिले।
ट्रैकमैन की तपस्या से ही करोड़ों देशवासियों की सुरक्षित रेल यात्रा पूरी होती है, हमें उनकी सुरक्षा और तरक्की दोनो सुनिश्चित करनी ही होगी।
@JaikyYadav16 इसे कहते हैं वक्त का बदलना ।
जो मीडिया राहुल गांधी जी पर बात तक नहीं करता था आज वो राहुल गांधी जी पर पूरा शो कर रहे है।
ऐसा क्या हुआ Aaj Tak वालो
जबलपुर मंडल के SSE pway कटनी साउथ डिपो में कर्मचारियों का हो रहा शोषण Pwi रतनदीप द्वारा ऑन ड्यूटी ट्रैकमैन को गाली गलौज और 5 के बाद मिलने की धमकी दी!
#justicefortrackman sir
@gmwcrailway@drmjabalpur
@drmjabalpur@gmwcrailway@RailMinIndia
SSE pway कटनी साउथ डिपो में pwi द्वारा ऑन ड्यूटी ट्रैकमैन से बद्तमीजी, गाली गलौज और 5 के बाद मिलने की धमकी दी गई, जिसके गवाह बाकी कर्मचारी भी है, लेकिन उल्टा ट्रैकमैन के ऊपर DAR
#justicefortrackman
@CollectorKatni@JansamparkK@drmjabalpur
सर निवेदन है कटनी साउथ स्टेशन और कॉलोनी की बिजली सप्लाई में बदलाव कराएं, प्रतिदिन घंटो लाइट नही रहती, जिस��े रात में कर्मचारियो और यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है, बगल में आर्डिनेंस की कॉलोनी है,वहां की बिजली में कोई परेशानी नही है
साहब ..ये है "सेफ्टी शूज" जो खुद ही safe नही है? ये जूता मिले एक हफ्ते भी नहीं हुआ है और ये स्थिति हो गई इनकी ?
रेलवेबोर्ड अनुसार साल में दो जोड़े जूते मिलेंगे वे भी ( बाटा, लखानी) जिसकी कीमत 1400 है तो ये घटिया जूते क्यों दिए गए हैं ट्रैकमैनो को?
@gmwcrailway@drmjabalpur
@trackmanekta@gmwcrailway@drmjabalpur सेफ्टी शूज के नाम पर ट्रैक में चलने के लिए वर्कशॉप वाले शूज बांट दिए जाते है,जिसमे ट्रैक में चलने में बैलेंस बिगड़ता है ,न ही ड्यूरेबल होते हैं