आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।
All levels of disgust have been crossed today.
रामपुरा, कंवरपुरा में पिछले काफ़ी सालों से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है। लेकिन जब हम वहाँ निरीक्षण करने पहुंचे तो सरेआम मारपीट, पत्थरबाजी की गई। कारों के शीशे फोड़े गए, टीम पर पत्थर बरसाये गए। कपड़े फाड़े गए। ट्यूब में पत्थर डालकर टीम को मारा गया। मेरे कपड़े फाड़े गए।
यह सब मदन दिलावर के कहने पर हुआ है। मदन दिलावर को बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंज़ूर है। लेकिन स्कूल ठीक हो जाये, यह मंज़ूर नहीं।
मदन दिलावर जी - आपने आज गुंडे भेजकर पूरे देश में राजस्थान को शर्मसार कर दिया। लेकिन हम इस गुंडागर्दी से डरने वाले लोग नहीं है।
स्कूल तो ठीक कराने ही होंगे।
यह वहाँ के गाँव वाले नहीं भाजपा के बुलाये हुए गुंडे है। इनका सरगना कमल प्रधान वहाँ गरीब लोगों की ज़मीन पर कब्जे का काम करता है।
बच्चों को भैंसों में तबेले में पढ़ाया जा रहा है, और यह रोकने पर भाजपा अपने गुंडे भेज रही है।
क्या शर्मनाक स्थिति है।
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भाजपाइयों के भोजनार्थ
भ्रष्टाचारियों के शर्मनार्थ
अभिभावकों के संदर्भार्थ
मुख्यमंत्री जी यदि सक्रिय, सचेत और सजग होते तो उनके संज्ञानार्थ भी भेज देते लेकिन हमेशा के लिए जानेवालों से, चला-चली की इस अंतिम बेला में क्या तो शिकायत करें और क्या ही अपेक्षा। जो दस साल में नहीं जागे वो आख़िरी के चंद महीनों में क्या ही कर लेंगे। ये वीडियो देखकर वो कोई सुधार तो करेंगे नहीं बल्कि या तो किसी की नौकरी ले लेंगे या फिर एफ़आइआर करवा देंगे।
घोर निंदनीय… कम-से-कम बच्चों का निवाला तो न छीनें।
“जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।”
कोटा के बाद, देहरादून के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ प्रयागराज पहुंच रही है।
यह वो शहर है जहां लाखों नौजवान सालों से तैयारी कर रहे हैं - फ़ॉर्म भरते हैं, फीस देते हैं, और इंतज़ार करते रहते हैं।
पेपर लीक ने उनका आज छीना। रुकी हुई भर्तियों ने उनका कल। और अभी कुछ दिन पहले, दिल्ली में इन्हीं बच्चों पर लाठियां और पैलेट चलाए गए - सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने अपने हक़ की बात की।
हम उनकी आवाज़ उठाते रहेंगे और उन्हें इंसाफ़ दिलाकर रहेंगे। अब बहाने नहीं चलेंगे - जवाबदेही लीजिए, या कुर्सी छोड़िए।
8 अगस्त - प्रयागराज में मिलते हैं।
#ChhatronKiGoonj
जिनको हिंसा की बहुत चिंता है उनको ये सब नहीं दिखता।
@abhijeet_dipke और @SauravDassss से उम्मीद है कि वो इसको भी देखेंगे। ये बच्चे भी प्रोटेस्ट का हिस्सा हैं। इस गुंडे पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। @Uppolice तो हो सकता है इसी कार में बैठी हुई हो। उससे उम्मीद करना बेकार है।
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छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
जितना नुकसान और अपमान आप लोगों ने हिंदू धर्म का किया है, शायद भारत के 5000 वर्ष के इतिहास में बाहर से आने वाले आतताइयों ने भी नहीं किया। जितना आप लोगों ने हिंदुओं को लूटा है, आज तक किसी ने नहीं लूटा। हिंदू धर्म पर आप लोग कलंक हैं।
ये वीडियो देखिए। ये क्या कर रहे हैं आप। शर्म आती है आपको? माफ़ी माँगिए पूरे हिंदू समाज से।
पहली बार ऐसा दिखाई पड़ रहा है कि एक आदमी के चलते पूरी शिक्षा व्यवस्था खोखली होती दिख रही है।
Education system से लेकर Exam System तक, सब तमाम सवालों के घेरे में हैं। Special Protest सिर्फ एक आदमी के इस्तीफे को लेकर हो रहे हैं।
मगर ऐसा क्या है कि धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाया जा सकता, चाहे देश का भविष्य दांव पर हो ,युवाओं के भविष्य के चलते!
ये बात एकदम समझ से परे है। हर अति का अंत है और जल्दी ही सरकार को इन्हे हटाना होगा। कोई शिक्षित आदमी ही अब देश की शिक्षा की जिम्मेदारी लेगा।
अगला नंबर रेल मंत्री और वित्तमंत्री का आना है |
विकसित भारत क़ि दिशा देश का युवा तय करेगा |