सिर्फ़ परीक्षा की कट-ऑफ़ कम या ज़्यादा होना ही Reservation नहीं है।......Cut-off की चर्चा इतनी isliye होती है?
क्योंकिstudent का सीधा सामना उसी से होता है।
उसे दिखता है कि-
General की Cut-off 160 है,
SC की 115 है,
OBC की 130 है।
इसलिए apko लगता है कि यही Reservation है।Reservation केवल परीक्षा में सीट दिलाने की व्यवस्था नहीं है। इसका उद्देश्य वंचित समुदायों की representation (प्रतिनिधित्व) बढ़ाना और अवसरों की असमानता को कम करना है।
इसका दायरा कई क्षेत्रों तक है:
शिक्षा – सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश।
सरकारी नौकरियाँ – भर्ती में आरक्षण।
कुछ परिस्थितियों में पदोन्नति (Promotion) – विशेषकर SC/ST के लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व – लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों में आरक्षित सीटें।
छात्रवृत्तियाँ, हॉस्टल, कोचिंग योजनाएँ, फीस में रियायत जैसी कई सहायक योजनाएँ।
संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत इसे केवल गरीबी उन्मूलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के साधन के रूप में सक्षम बनाया गया है।
Reservation पर सवाल बिल्कुल उठाए जा सकते हैं।
जैसे:
Creamy Layer का दायरा,
Sub-categorisation,
लाभ का समान वितरण,
समय-समय पर समीक्षा,
Minimum Qualifying marks (-40 marks ❌)
Reforms is required in reservation...लेकिन Reservation की पूरी बहस को केवल Cut-off तक सीमित कर देना, विषय को बहुत छोटा कर देना है।
Reservation सिर्फ कटऑफ नहीं, बल्कि Representation, Education, Employment, Political Participation और Social Justice का पूरा ढांचा है…...
जब भी आप आरक्षण पर बात करेंगे तो हमेशा ये तर्क सुनेंगे की जातिगत जनगणना कराना चाहिए और फिर देखेगें की किसका कितना हक़ रहेगा संसाधनों पर ।
तो आप ऐसे समझिए की एक परीक्षा है जिसमें 100 सीट है ।
तो अब जब संख्याँ के हिसाब से ही बँटवारा होना है तो ऐसा तो है नहीं की बस हिन्दुओं का ही हक है देश के संसाधनों पर ।
मुस्लिम, सिख, ईसाई भाईयों का भी उतना ही हक है ।
अगर संख्याँ के हिसाब से ही बँटवारा होगा तो उनके लिए भी उसी में व्यवस्था करनी होगी ।
और वैसे भी जो नेता आज जाति की संख्याँ के हिसाब से हिस्सेदारी माँग रहे हैं, वही नेता कल धर्म के हिसाब से भी हिस्सेदारी माँगेंगे ही ।
तो संख्याँ के हिसाब से क़रीब (अनुमानित) 15% मुस्लिम, 2% ईसाई, 2% सिख , 1% अन्य धर्मावलम्बी मान लीजिए ।
100 में 20% ऐसे चले गए ।
तो बचे 80% हिंदुओं के हिस्से में ।
हिंदुओं में करीब 3000 जातियाँ हैं ।
अनुमान के हिसाब से किसी भी जाति का परसेंटेज 10% से ज़्यादा नहीं हैं ।
(जो मुझे इंटरनेट से मिला उसके अनुसार वर्तमान अनुमानित आँकड़े ये हैं )
यादव/अहीर: 7–9%,
चमार/जाटव/रविदास: 4–5%,
कुर्मी : 3–4%,
राजपूत: 3–4%,
ब्राह्मण :3–5%
अब आप समझ जाइये किसे क्या मिलने वाला है ।
आदिवासी समुदाय में एक विलुप्त होती जनजाति है, बिरहोर जनजाति ।
उनकी जनसंख्यान का प्रतिशत है 0.0012% ।
उस विलुप्त होती जनजाति, जिसे सबसे ज़्यादा मदद की ज़रूरत है , उनके हिस्से आएगा 0.0012% ।
यही है ना सामाजिक न्याय????
" इस जिंदगी के सफ़र में थकान बहुत हैं ,
अपनों के अपनों पर यहाँ इल्जाम बहुत है
शिकायतों का दौर देखता हूँ तो थम सा जाता हूँ ,
लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है..! "
आर्या सिंह ने NEET का एग्जाम दिया
• OMR शीट के अनुसार 609 नंबर आने चाहिए
• रिजल्ट आने पर सिर्फ 540 नंबर आए
परिवार को भरोसा नहीं हो रहा था, वो बार-बार वेबसाइट चेक करे थे. इसी बीच रात 2 बजे अचानक से नंबर घटकर 167 हो गया.
जी हां, 540 नंबर, अपने आप 167 हो गया.
सुनिए 👇
तुम मेरे अस्तित्व की वह इकाई हो
जिसके बिना
मैं केवल एक अधूरा दशमलव हूँ
जिसका मान तो है,
पर पूर्णता नहीं।
तुम्हारे होने से ही
मेरे जीवन का हर अंक
अपना वास्तविक अर्थ पाता है।
~ अर्चना अनिरुद्ध