MD at Rajdhani Crafts (Offering premium range of furniture for Living Room, Dining Room, Bedroom, Kitchen, Bathroom, Offices, customized interior solutions etc)
विनम्रता व्यक्ति कों सरल और सुखी बनाती हैं
जबकि अहंकार दुख का मूल कारण होता हैं और साथ ही मानसिक असुरक्षा व अवसाद का शिकार बना देता हैं और साथ ही रिश्तों के पतन का का भी काम करता है
अत: विनम् बने और अपने जीवन से अहकार को त्यागकर अपने जीवन को सार्थक सुखी बनाये
अगर हम अपने आप का अध्यन कर स्वयं की कमियों को उजागर कर लेते हैं
और कमियों पर मनन कर सोच समझ कर सुधार कर लेते है ,
तो अवश्य ही हम अपने आप कों बेहतर कर लेते हैं और आने वाले समय में हम फिर हर क्षेत्र मे सकारात्मक परिवर्तन लाभ के साथ ला पाते है !!
जयश्री राधाकृष्णा
When Ambitions Overtake Performance.. The Gap Is Called Frustrations.. But..If Performance Overtakes Ambitions.. It's Called Success..!
“JAI SHREE KRISHNA”
Peace of mind is the most precious resource in life ,
— *however much wealth, power you have, if mind is disturbed, all is useless.*
So *live life cheerfully, do work with mind’s peace — success will be valuable.*
Nation First
Jai Shri Radha Krishna
अगर हम अपने मन में अविश्वास की भावना को पाल लेते है तो हर व्यक्ति में कमी दिखाई पड़ती हैं
और फिर हम हर बात को शक की नज़रों से देखते हैं जिसके कारण हम कभी भी अपने अपने विचारो को सकारात्मक रूप से नहीं समझ पाते हैं
क्योंकि हर बात पर हम अपने कों ही सही समझते है ll
जीवन जीने की यात्रा कों अगर संस्कारों की सीमा में रहकर जब हम अपना जीवन व्यतीत करते है तब हमारा जीवन शान्तिमय और सुखी रहता हैं ,
क्योंकि संस्कारों की पालना करने से हम मार्ग में भटकते नहीं है बल्कि हम जीवन जीवन पर्यन्त सही राह अपनाते हैं तथा केवल सत्कर्म करते हैं
जयश्री कृष्णा
May this Christmas fill your home with joy and happiness, your heart with love, and your life with laughter.
Wishing you and your family a very Merry Christmas!
Best Regards
Samir Agarwal 🇮🇳
जीवन जीने की दैनिक यात्रा में पहचान और कीर्तिमान स्थापित करने वाले लोगों को नया अनुभव नया कर्म भी करना पड़ता हैं तभी हमे असाधारण सफलता प्राप्त होती
जब हम स्वयं पर भरोसा करते हुए कर्म करते हैं तो मंजिल भी मिल जाती है और देर सवेर मनमाफिक परिणाम भी अवश्य मिल जाते हैं
देश प्रथम
क्रोध करने से स्वयं का दिमाग खराब ही होता हैं और बुद्धि पर नियंत्रण नहीं रहता है और स्वास्थ्य कों भी नुकसान पहुंचता हैं ।।
इसलिए क्रोध छोड़ देना ही उचित होता हैं
क्रोध आना हर समय हर बात पर गलत होता हैं
अगर हम ये सोचते है की क्रोध करने से सामने वाला व्यक्ति आपकी बात समझ लेगा या मान लेगा या आपकी बातों का अनुसरण करने लग जाएगा ��ो ये केवल आपका भ्रम
होता है ।।
क्रोध केवल विनाश करता है और अपनों के प्रति आपका सम्मान कम या खत्म कर देता हैं
जीवन में बस नजरियें का फर��क हों जाता है
अगर हम् चाहें तों काम की जीमेवारी को बोझ समझ कर पूरा जीवन दुखी परेशान होते रहें या ,
जीमेवारी कों अपना फर्ज समझ जीवन में काम को आनंद समझ कर कर्म करने कों सोभागय समझते हुए जीवन को सुखी व भाग्यशाली का आनन्द लेते हुए खुशियों बनाते रहे