खबर है कि जंतर-मंतर में शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे कुछ युवाओं को पुलिस ने कल रात में उठाया था।
उनमें क्या सबको छोड़ दिया जय? जिन युवाओं को पुलिस ने अभी ना छोड़ा हो उनके संपर्क के लोग अगर हों तो कृपया सूचित करें।
शांतिपूर्ण आंदोलन कोई अपराध नहीं है। सबको छोड़ना ही होगा।
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पूर्व अनुमति होने के बाद शांतिपूर्वक रैली चल रही थी फिर भी आखिर लाठीचार्ज क्यों हुआ।
रैली में कोई भड़काऊ नारा भी नहीं लेकिन फिर भी राजस्थान पुलिस का एक अधिकारी सिपाहीयों को को बोलता है कि
“दौड़ कर आओ रे” और बाद लाठीचार्ज शुरू
#UGCProtest#Jaipur
झारखंड से देर रात की तस्वीरों में सैकड़ों छात्र अभी भी सड़कों पर नज़र आ रहे हैं।
वे परीक्षा में बार-बार हो रही गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस-JMM सरकार ने अभी तक उनकी मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
देश में एक नए जनआंदोलन का बिगुल बज चुका है।
महिपाल सिंह मकराना एक बार फिर पदयात्रा में शामिल हो चुके हैं। 3 अगस्त को जयपुर की सड़कों पर सामान्य वर्ग का जनसैलाब उमड़ेगा।
अगर सरकार अभी भी इस आंदोलन को हल्के में लेने की भूल कर रही है, तो अपना यह भ्रम समय रहते दूर कर ले।
#UGC
देर आए दुरुस्त आए…!!
त्याग पत्र तो आपसे तभी ले लेना चाहिए था जब आपने “सामान्य वर्ग के दमन का डेथ वारंट” साइन किया था #UGC जैसा काला कानून लाकर,
ब्राह्मणों का श्राप लगा था आपको, ये तो होना ही था,
आप जैसे जातिवादी नेताओ की वजह से मोदी जी को धर्म संकट की परिस्थिति का सामना करना पड़ता रहा है,
आज हमारे महादेव और माँ भवानी ने सामान्य वर्ग के प्रत्येक छात्र और इनके परिवार के साथ न्याय किया है,
हर हर महादेव 🚩
🚨77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
आरक्षण पर कोई पार्टी बात क्यों नहीं करती?
आरक्षण के खिलाफ़ आंदोलन क्यों नहीं होते।
जाति-धर्म और राज्य के नाम पर कितना आरक्षण दिया जाएगा? सामान्य वर्ग का दर्द कौन समझेगा?
~ Harsh Dubey, NEET Aspirant
सद्दाम का बच्चा मौत से लड़ रहा था
तो कासगंज की मीना देवी ने उसे 90 हज़ार रु दिए, बच्चे का इलाज हुआ और बच्चा बच गया
एक साल बाद मीना देवी ने पैसे वापस मांगे तो
सद्दाम ने मीना को मारकर गंगा जी में फेंक दिया..
फेंकते हुये एक साधू ने देख लिया तो सद्दाम ने उसकी झोपड़ी में आग लगाकर उसे जिन्दा जला दिया...
वाह क्या सिला दिया अल्ला के बन्दे ने ✍️
🚨बड़ी खबर
बांग्लादेश में दीपू दास लिंचिंग का मुख्य अभियुक्त हसन सहादत बिजली के तार से लटका हुआ पाया गया
किसी अज्ञात ने उसे तारों सें लटका दिया….अब अज्ञात लोग पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश में भी अच्छा काम कर रहे है।
ये वीडियो भरत भूषण तिवारी की लोकप्रियता की गाथा गा रहा है
@samrat4bjp आँखे खोलकर देख लो इस वीडियो को, ये भीड़ जात, मजहब, धर्म, पार्टी से ऊपर उठकर राष्ट्रभक्तों की है ...अभी भी समय है अपनी गलती को सुधार लो नहीं तो अगला लालू बनते देर नहीं लगेगी
बांग्लादेश में मजहबी भीड़ द्वारा भगवान राम का अपमान और राममूर्ति के काम को रुकवाने के विरोध में |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सड़कों पर लाखों हिंदुओं की भीड़ उतर कर भयंकर विरोध कर रही है |
भारत के हिंदुओं अगर हो सके तो इनके संघर्ष को सोशल मीडिया से बैकअप जरूर दे देना | ✊