#वाहरे_समाज_नाशक_महर���षिदयानंद
दयानंद जी खुद तो नशेड़ी थे ही, दूसरों को भी नशा करने की सलाह दिया करते थे। पुस्तक महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र,पेज 494 पर दयानंद जी,शिवगुलाम प्रसाद को ध्यान लगाने के लिए दो तोला भांग पीने का परामर्श दे रहे हैं।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
समाज नाशक महर्षि दयानंद
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी को नशेड़ी दयानंद ने कहा नीच जाति का !
प��रमाण समुल्लास 11, पृष्ठ नं. 296
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश
के चतुर्थ समुल्लास (चौथे अध्याय)
में विवाह के लिए 24 साल की स्त्री व 48 साल के पुरुष का मेल उत्तम बताया गया है।
आर्य समाज जवाब दे ?
बेटी की शादी पिता की उम्र के पुरुष से करना
महर्षि दयानन्द सरस्वती
कित���ा उचित है ?
#वाहरे_समाज_नाशक_मह���्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है:-
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव क��� ‘प्रेतनाथ’ और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उड़ाया गया है।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी ���नुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख ��र्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
Dayanand Saraswati’s criticism of Vaishnavism
In Satyarth Prakash, Samullas 11, pages 292–293, Dayanand Saraswati presents criticism of Vaishnava beliefs and practices. Watch the discussion to examine these passages in their original context.
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 4, पृष्ठ 70 पर दयानंद सरस्वती ने
भूरे नेत्रों वाली, गंगा, यमुना आदि नदियों या पार्वती आदि पर्वतों के नाम वाली कन्या से विवाह वर्जित बताया और 24 वर्ष की गुवती के लिए 48 वर्ष के प्रौढ़ पुरुष का विवाह उत्तम तय किया !
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
दयानंद सरस्वती आत्मकथा, पेज 17;महर्षि दयानंद समग्र क्रांति के अग्रदूत, पेज 21 एवं महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र,पेज 50 में उल्लेख है कि
दयानंद जी चावल त्यागकर इतना अधिक भांग प��� लिया करते थे कि बेसुध हो जाते थे।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था।
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
Satyarth Prakash, Samullas 11, page 305: Dayanand Saraswati made allegations against the character of Shri Krishna and called him a patient suffering from “Bhagandar” (fistula)!
Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था।
Factful Debates YouTube Channel
#GodMorningMonday
जो जीव पूर्ण परमात्मा की शरण में आकर सच्ची भक्ति करता है, परमात्मा उसकी आत्मा को परम शांति और सुख प्रदान करता है।
यह परमात्मा के गुणों में लिखा है।
#सत_भक्ति_संदेश
भक्त के पाप
कई धार्मिक क्रियाओं से समाप्त होते हैं।
कुछ सत्संग-वचन सुनने से ज्ञान यज्ञ के कारण, कुछ नाम के जाप से, कुछ संत के दर्शन करने से तथा कुछ दान के प्रभाव से समाप्त हो���े हैं।
जानने के लिए अवश्य देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम 07:30 बजे
#GodMorningMonday
@
पूर्ण संत की पहचान
पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्���ों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में मिलता है व ग��ता जी के अध्याय नं. 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नं. 822 में मिलता है।
#GodMorningMonday
#GodMorningMonday
बखत कहो या करम कहु, नसीब कहो निरधार।
सहस नाम हैं करम के, मन ही सिरजनहार।।
कबीर साहेब जी कहते हैं कि प्रारब्ध को चाहे समय कहो या कर्म और चाहे भाग्य कहो, अर्थात चाहे जिस नाम से उसे पुकार लो। कर्म के सहस्त्रों नाम हैं और इन सबका बनाने वाला मन ही है।