जन्मदिन प्रधानमंत्री का, लेकिन सौगात अमेठी को...
साढ़े तीन साल पूर्व, सांसद रहते हुए अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के तिलोई में लगभग ₹300 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने का अवसर मिला था।
अमेठीवासियों ने इस मेडिकल कॉलेज के लिए चार दशकों तक संघर्ष किया और लगातार इसकी मांग करते रहे। लेकिन कांग्रेस के शासन में जब तिलोई का जर्जर बस अड्डा दशकों तक नहीं बन सका, तो एक नया मेडिकल कॉलेज बनाना उनके लिए कैसे संभव होता।
अमेठी में मेडिकल कॉलेज का जो सपना लोगों ने देखा था, वह वर्ष 2022 में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के आशीर्वाद से साकार हुआ।
आज, अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर, माननीय प्रधानमंत्री जी ने इस मेडिकल कॉलेज के लिए शुरुआती तौर पर 50 सीटों की मान्यता प्रदान कर अमेठी को मेडिकल हब बनाने की दिशा में बड़ी सौगात दी है। यह दिन अमेठी के लिए ऐतिहासिक है।
यह निर्णय मोदी जी की विकास की राजनीति का सबसे बड़ा प्रमाण है। अमेठीवासियों के निश्चय को पूरा करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।
Manoj Kumar Jha does it yet again — pens a book that is a must read for anybody who wants to understand the labyrinth of Indian democracy — an apt commentary on Indian politics and the issues that plague it...
Read More
https://t.co/ijfHTxMM4e
A must-read for UPSC and other competitive exam aspirants.
@journalistjha | @manojkjhadu | #InPraiseOfCoalition | #indiandemocracy | #indianpolitics | #UPSC
Writes: Deepak Kumar Jha
As smoke billows from Nepal’s parliament building and protesters storm the streets of Kathmandu, South Asia finds itself once again grappling with the familiar spectre of political upheaval...
Read More 👇
https://t.co/WZHBRHQfBx
@VikasSwarup | #Nepal | #Myanmar | #Pakistan | #Bangladesh
Writes: Vikas Swarup
At a time of global energy uncertainty, India under the visionary leadership of Hon’ble
PM Shri @narendramodi ji prioritized national interest without compromising global stability.
Through the deft stewardship of shri @HardeepSPuri ji, India not only secured affordable energy for 1.4 billion citizens but emerged as a responsible anchor in volatile markets.
This is not just diplomacy, it is strategic statecraft.
जीत तो उनसे सकते नहीं, वो खुद सार्वजनिक जीवन से दूरी बना लेंगे यही जान कर नाचते रहो।
पर पवन राहुल गांधी खेड़ा जी, मोदी जी सन्यास ले लेंगे उसके बाद भी भाजपा में ऐसे कई नेता रहेंगे जिनसे हारते रहना ही कॉंग्रेस का मुकद्दर है.... अपनी जीत के लिए मेहनत करो भाई.. ये कौन सी राजनीति कर रहे जिसमें फलाना सन्यास ले ले तो हमारा भला हो जाये... फलाने खानदान में पैदा हो जाऊँ तो कॉंग्रेस का मालिक बन जाऊँ, फलाने खानदान का चमचा बन जाऊँ तो कॉंग्रेस में पद मिल जाएगा।
प्रिय, मीना कोतवाल जी अब आओ बहस कर ही लेते हैं। पर सिर्फ आपका इगो सैटिस्फाई करने के लिए ये बहस नहीं होगी।
सवाल तो मेरे पास भी हैं... अगर अध्यात्म, विज्ञान के मुकाबले इतना कमजोर है तो आपके जिज्ञासु मन ने कभी ये सवाल नहीं पूछा आपसे की "महात्मा बुद्ध ने उस बोधी वृक्ष के नीचे कौन से Google, Twitter, YouTube, Reditt में डुबकी लगाई थी जो उन्हें "ज्ञान की प्राप्ति" हो गई थी?" महात्मा बुद्ध को तो मानती हैं ना आप?
मेरी समझ से उन्होंने अध्यात्म के सहारे ही ज्ञान को प्राप्त किया था... आपका क्या ख्याल है?
बाकि नव नवोदित विज्ञान के अहम में आप ये भूल रही हो कि डॉक्टर और दवाई यानी ये एलोपैथी हज़ारों साल पहले ही आयुर्वेद था जिसमे लगभग हर तरह के उपचार दिए हुए है. वैद्य तब भी होते थे बस फर्क था तब किसी "माइनस दो नंबर वाले को डॉक्टरी की सीट नहीं मिलती थी."
रही बात मोक्ष की तो मोक्ष पाने के तमाम रास्ते है, तपस्या और मौन उसमे से एक है एकमात्र नहीं, कृष्ण ने गीताज्ञान जंगल में नहीं दिया बल्कि युद्धभूमि में दिया था जो अपने आप में मोक्ष पाने का सबसे बड़ा साधन है. X चल ही इसीलिए रहा क्योकि धरातल पर आप प्रोपेगंडा नहीं फैला पा रही और X पर तुम्हारा प्रोपेगंडा हम जैसे लोग फैलने नहीं देंगे।
जिन्होंने अपना दिमाग बेचकर टॉफी खा लिया है उनकी फ़ौज में आप अपना परचम लहराओ, मुझे उलझोगी तो परते खुलेगी, फिर कोई भीमास्त्र और विक्टिम कार्ड मत खेलना।
सीताराम येचुरी ने भी JNUSU के अध्यक्ष पद से अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। और जब मरे तब निर्विरोध सीपीएम के महासचिव थे । UPA सरकार में खूब दख़ल रही । सोनिया गांधी के किचन कैबिनेट में कई उनके लोग थे। स्वयं दुनियाभर के कम्युनिस्टों के बीच में सुप्रसिद्ध।
इसके उलट ये आदमी शुरू से ही अवसरवादी रहा। यूनिवर्सिटी में जातियों के विनाश की बात की और JNU से निकलते ही पहला चुनाव लड़ने स्वजातीय बहुल क्षेत्र में पहुँच गया। पटना आया तो सबसे पहले जाकर लालू का पैर छुआ। उस लालू के जिस के सांसद ने JNU के ही छात्र नेता की हत्या की थी।
हारने के बाद CPI को ज़्यादा ग्लैमरस पार्टी ना पाकर। कांग्रेस में चला गया।
पीएचडी होल्डर है लेकिन आप कोई इसका स्पीच नहीं बता सकते जो किसी विषय पर उल्लेखनीय हो। सालों बाद किसी को याद आए।
TV पे भेड़िया धसान करने। अन्य प्रवक्ताओं के साथ जुबानी कुश्ती करने , नरेंद्र मोदी को तरह तरह से मुँह बना के गाली देने के अलावा कुछ याद करने लायक़ नहीं है।
सड़कछाप भाषा है पर कभी सड़क पर संघर्ष करते नहीं दिखा।
आज इस आदमी को महज़ एक गाड़ी पर चढ़ने के लिए धक्का खाते देखकर बुरा लगा। पर इससे ज़्यादा कुछ ये डिजर्व भी नहीं करता।
एक हैंडल है - @ComradeMalal.
फेसबुक पर पहले से इनका सिक्का चलता चलता रहा है, X पर अपेक्षाकृत नए हैं। ये चंद्रयान पर लिखे या चंद्रशेखर पर - गारंटी है कि आप बोर नहीं होंगे, नई जानकारियाँ मिलेंगी और नए तरीके से चीजों को सोचने को आप मजबूर होंगे।
इनको ज़रूर फॉलो कीजिए। इनके पोस्ट्स पर नज़र रखिए।
'लोहिया जी अमर रहें' से सीधे 'शहाबुद्दीन जी अमर रहें' तक गिरने वाली विचारधारा जनहित नहीं स्वहित की है।
@laluprasadrjd ने जिवित शहाबुद्दीन का ईस्तेमाल बिहार में भय और अत्याचार व्याप्त कर अपनी सत्ता बचाने के लिए किया था और @yadavtejashwi मृत शहाबुद्दीन के लिए नारे लगा कर सत्ता में वापसी की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
जो बिहार लालू के भय और अपराध की नीति से पीछा छुड़ा चुका है वो तेजस्वी के सहानुभूति कार्ड में नहीं फंसेगा।
Trade deals with countries - Totally agree with @PiyushGoyal that Nation's interest must be protected and must come first. Fully support this correct and bold stand taken by him. @PiyushGoyalOffc
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर @laluprasadrjd जी जैसे 'नए और उभरते चेहरे' का नामांकन करके RJD ने देश को दिखा दिया है कि लोकतंत्र क्या होता है और उन्हें युवाओं की कितनी चिंता है।
साथ में बैठे संघर्षशील कार्यकर्ता @RabriDeviRJD जी, @yadavtejashwi जी और @MisaBharti जी ने ये साबित कर दिया कि राजद में परिवारवाद की नाममात्र भी जगह नहीं है।
क्या ग़ज़ब का टैलेंट है एक ही घर में!
चुनावी आता देख नामांकन की नौटंकी करते हैं, जबकि चुनाव में टिकट घर वालों को ही देंगे।
ये जो अपने कार्यकर्ता से न्याय नहीं करते वो सामाजिक न्याय के मसीहा होने का दावा करते हैं।
Bollywood, and I don’t disown the term because we earned it unfortunately, will rediscover itself with changing times, tastes and concerns. I am not worried about that. What I think more about is the ‘social experience’ that we as a society are losing out on. Being together, listening to each other, feeling for each other. Beware of algorithms. They want you alone.
@RebornManish वो ताकत लगा चुके हैं, "ये बोल कर की भारत सरकार को हटा दो प्लीज"... Trump नहीं तो Biden के सामने।
पर तुम्हारे पापा की कोई सुनता ही नहीं मनीष जी, दो चार बार और reborn हो जाओगे फिर भी प्रधानमंत्री पद अब गांधी परिवार के पास नहीं जाने वाला।
नीच रबिश हर तरह की बातें कर लेगा, लेकिन जवाबदारी किसकी है वो नहीं बताएगा। अभी भाजपा शासित राज्य होता तो सनसनाते थंबनेल और गड़गड़ाती हेडलाइन लिखकर प्रधानमंत्री मोदी से लेकर RSS को दोषी करार दे देता।
निर्लज रवीश अपने आकाओं के कृत्यों पर पर्दा करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
11 साल, एक संकल्प 🇮🇳
सेवा, सुशासन और सबका साथ-सबका विकास।
माननीय PM श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में भारत ने गरीब कल्याण से लेकर वैश्विक गौरव तक एक नया इतिहास रचा। 🇮🇳
#11YearsOfGaribKalyan#ModiEra
A compassionate government, devoted to Garib Kalyan!
Over the past decade, the NDA Government has taken pathbreaking steps to uplift several people from the clutches of poverty, focussing on empowerment, infrastructure and inclusion. All our key schemes have transformed the lives of the poor. Initiatives like PM Awas Yojana, PM Ujjwala Yojana, Jan Dhan Yojana and Ayushman Bharat have enhanced access to housing, clean cooking fuel, banking and healthcare. The push for DBT, digital inclusion and rural infrastructure has ensured transparency and faster delivery of benefits till the last mile.
It is due to this that over 25 crore people have defeated poverty. The NDA remains committed to building an inclusive and self-reliant India, where every citizen has the opportunity to live with dignity.
#11YearsOfGaribKalyan
1971 के युद्ध में साहस और पराक्रम की अद्भुत मिसाल पेश करने वाली कच्छ की वीरांगना माताओं-बहनों ने हाल ही में गुजरात के दौरे पर मुझे सिंदूर का पौधा भेंट किया था। विश्व पर्यावरण दिवस पर आज मुझे उस पौधे को नई दिल्ली के प्रधानमंत्री आवास में लगाने का सौभाग्य मिला है। यह पौधा हमारे देश की नारीशक्ति के शौर्य और प्रेरणा का सशक्त प्रतीक बना रहेगा।
Well said, @priyankac19 ji.
Your portrayal of Pakistan as a textbook case of a failed state is spot-on.
A country that exports terror and thrives on playing the perpetual victim deserves nothing but global indifference and strategic isolation.
#OperationSindoor