20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉ��� के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
सवालों को घसीटकर नहीं ले जाया जा सकता!
यह अब सिर्फ़ एक माँग का आंदोलन नहीं रहा।
यह उस शिक्षा व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन है जो शिक्षा नहीं देती, उस आर्थिक व्यवस्था के विरुद्ध जो र��ज़गार नहीं देती, और उस राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध जो जवाब नहीं देती।
20 जुलाई का संसद मार्च जारी है!
#StandWithSonamWangchuk @Cockroachisback @Wangchuk66
Warm birthday greetings to my Cabinet colleague, Union Minister Shri @AshwiniVaishnaw Ji.
Wishing him good health, happiness and many more years of dedicated service to the nation.
20 दिन हो गए थे सोनम वांगचुक जी को भूख हड़ताल पर बैठे हुए, अगर सरकार चाहती तो बात भी कर सकती थी, लेकिन
उसने धरने को खत्म करना जरूरी समझा।
अब इसमें सोनम वांगचुक जी के स्वास्थ्य का हवाला दिया जाएगा कि उन्हें अस्पताल पहुंचाना जरूरी थी लेकिन
आपको ये नहीं बताया जाएगा कि
20 दिनों से सरकारी तंत्र कहां था? क्यों नहीं आया? और आज अचानक से सोनम वांगचुक ��ी इतनी फिक्र?
प्रदर्शन करने वालों को जंतर मंतर खाली करने का आदेश दिया गया है, दिल्ल��� पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश की बात कही है।
धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली।
सीधे कहें तो सरकार अब इस धरने को समाप्त करना चाहती है।
इतना अहंकार ठीक नहीं है।
उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी।
कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो
सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।
हर आंदोलन गलत है।
लोग गलत हैं।
आवाज़ उठाना गलत है।
सवाल पूछना गलत है।
विरोध करना गलत है।
जवाब मांगना गलत है।
पारदर्शिता मांगना गलत है।
व्यवस्था पर प्रश्न उठाना गलत है।
अधिकार मांगना गलत है।
न्याय की उम्मीद करना गलत है।
फिर मैं पूछता हूँ -
क्या पेपर लीक सही है?
क्या मिलावटी पेट्रोल सही है?
क्या मंदिरों से चंदा चोरी सही है?
क्या भर्ती परीक्षाओं में वर्षों की देरी सही है?
क्या बेरोज़गारी सही है?
क्या महंगाई सही है?
क्या अस्पतालों में भ्रष्टाचार सही है?
क्या शिक्षा में घोटाले सही हैं?
क्या नकली दवाइयाँ सही हैं?
क्या पुलों का गिर���ा सही है?
क्या सड़कों पर गड्ढे और हादसे सही हैं?
क्या टैक्स देने के बाद भी बदहाल सुविधाएँ सही हैं?
क्या बच्चों के भविष्य के साथ ��िलवाड़ सही है?
क्या युवाओं के सपनों का टूटना सही है?
आवाज़ उठेगी तभी तो कुछ बदलेगा अगर हर protest को हम ऐसे ही उसकी कमिया बताकर कमजोर करेंगे तो एक दिन आवाज़ उठाने वाले भी नहीं बचेंगे तब कौन आएगा आगे जब तुम पर ही बीतेगी |
मानवता जिन्दा रखो ||
उन्होंने हलफनामे में दिखाया था- ये जवाब पर्याप्त नहीं है।
सवाल संपत्ति छिपाने का है ही नहीं, बल्कि उस संपत्ति के बढ़ने में सरकारी पद और निर्णयों की भूमिका रही है- इसका है।
जमीन खरीदना अपराध नहीं है।
लेकिन सत्ता में रहते हुए ऐसे क्षेत्रों में जमीन खरीदना, जहाँ सरकारी नीतियाँ और परियोजनाएँ भविष्य में मूल्य बढ़ाने वाली हों, यह भ्रष्टाचार है।
भ्रष्टाचार हमेशा रिश्वत लेकर फाइल पास करने से ही नहीं होता।भ्रष्टाचार तब भी है जब सत्ता, जानकारी और प्रभाव कुछ लोगों को ऐसा लाभ दिला दें |
Indian Express की रिपोर्ट का Main point ये नहीं है कि "जमीन खरीदी गई" - जिन इलाकों में सरकार ने बाद में Infrastructure, सड़कें आदि विकसित कीं, उन्हीं क्ष��त्रों में मुख्यमंत्री के परि��ार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। ये Conflict of Interest है।
यदि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, IAS, IPS या किसी प्राधिकरण का अध्यक्ष हो और उसके परिवार द्वारा उन्हीं क्षेत्रों में जमीन खरीदी जाए जहाँ बाद में सरकारी फैसलों से जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ने वाला हो, तो क्या ये जनता और देश, दोनों के साथ विश्वासघात नहीं है?
भारत इसलिए पीछे है क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, सत्ता और व्यवस्था की मिलीभगत क��� खिलाफ लड़ने वाले बहुत कम हैं।
हम कब ऐसा भारत बना पाएँगे जहाँ मेहनत, ईमानदारी और योग्यता का मूल्य सत्ता, संपर्क और प्रभाव से अधिक हो?
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
जब सबकी आवाज़ उठेगी तो वह दूर तलक जाएगी और फिर व्यवस्था से लेकर सत्ता तक, सबको कठघरे में खड़ा होना पड़ेगा।
मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने
▪️उनके मुख्यमंत्री बनते ही उनकी पत्नी, बहू, भाई, लड़के और तमाम रिश्तेदारों ने उज्जैन में ताबड़तोड़ ज़मीन ख़रीदी
▪️कुल 168 एकड़ के 137 प्लॉट ख़रीदे गए
▪️यह सारी जमीन सरकारी प्रोजेक्ट के आस पास थीं
▪️परिवार के पास हर उस जगह ज़मीन है जहां उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के अंतर्गत land use को बदला गया
▪️परिवार को land use बदलने का भी खूब फाय��ा मिला
👉यह दिन दहाड़े लूट है जो ख़ुद BJP के मुख्यमंत्री कर रहे हैं
ये वही नीरज तिवारी हैं जिन्हें कभी खान सर ने भारतीय वायुसेना में चयनित छात्र के रूप में मंच पर पेश किया था। अब नीरज तिवारी खुद सामने आकर अपनी पूरी कहानी और पूरे विवाद की सच्���ाई बता रहे हैं। आखिर मामला क्या है, सुनिए उनकी जुबानी।
राकेश यादव के संस्कार देखिए
एक लड़के ने सिर्फ इतना पूछा कि क्लास लाइव है क्या?
बदले में उसे मिली बहन की गाली,
गाली देने वाले आजकल khan sir को ज्ञान दे रहे हैं
बड़े आदमी को ही AC में रहने का हक है.
छोटा आदमी सिर्फ गाली खाने के लिए बना है बड़े आदमी की. सही ज्ञान पेले हैं मंत्री संजय शर्मा कैमरे के सामने. बढ़िया रील बनी है. बधाई दीजिए भाई सब लोग इनको…
कृपया इस पर तुरंत संज्ञान लेकर मरम्मत करवाएं।हमने इसकी कंप्लेंट भी की है और अभी तक लास्ट दो घंटे में कुछ कार्रवाई नहीं हुई है।
@CollectorUjjain @JansamparkMP@CMMadhyaPradesh @min_UrbanDev @u_ujjain @ps_phedmp"
'UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें..' अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आ��ार्य ने PM मोदी को लिखा पत्र
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