#पाँचना_बाँध: आज खांडीप किसा�� आंदोलन का 18वाँ दिन है।
सरकार अराजकतावादियों से हाथ मिला चुकी है और किसान आंदोलन गुर्जर जाति को छोड़कर पूर्वी राजस्थान के सर्वसमाजों का आंदोलन बन चुका है, जिसकी तीव्रता बहुत अधिक बढ़ चुकी है।
किसानों में आक्रोश है और अराजकतावादियों में सरकार की सरपरस्ती का जोश। सर्वसमाजों ने जिस प्रकार आंदोलन को गति और विश्वास दिया है, उससे यह आंदोलन किसी भी दिन किसी भी दिशा में जा सकता है, क्योंकि धैर्य की सीमा अब अपने अंतिम चरणों में पहुँच चुकी है।
कोई भी संवैधानिक देश या राज्य यदि कानून की किताब के विरुद्ध चलना शुरू कर दे तो जनता का सरकार पर विश्वास उठ जाता है। पूर्वी राजस्थान की जिस ���्तर की जनभागीदारी आज दिखाई दे रही है, वैसी राजस्थान पहली बार देख रहा है। क्योंकि डकैतों और गुंडों के हौसले जिस प्रकार एक गृह राज्य मंत्री द्वारा बुलंद किए गए हैं, उससे सर्वसमाजों में व्यापक आक्रोश है।
जैसे ही धैर्य टूटेगा, यह आंदोलन आने वाले 50 वर्षों तक याद किया जाएगा। देश पहली बार अराजकतावादियों और डकैतों के ऐसे बुलंद हौसले देख रहा है। ध्यान रहे, आज किसानों के धरने का 18वाँ दिन है। जैसे ही इस आंदोलन का धैर्य टूटेगा, यह पूर्वी राजस्थान में ज्वालामुखी बनकर फटेगा।
किसी भी देश, राज्य या क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक हित ही उसकी राजनीतिक दिशा और दशा तय करते हैं। भाजपा को यह देखकर भारी निराशा हुई है कि उनके प्रायोजित गुंडे अलग-थलग पड़ गए हैं।
राजस्थान जैसे शांतिप्रिय राज्य में सरकार को ऐसी अराजक स्थिति उत्पन्न नहीं करनी चाहिए, जि���से नागरिकों का आवागमन बाधित हो जाए। ध्यान रहे, किसानों ने 5 जून को ही घोषणा कर दी थी कि यदि सरकार किसानों के पक्ष में उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर बाँध के गेट और नहरों में पानी नहीं छोड़ती है, तो 28 जून को दिल्ली–मुंबई रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा और क्षेत्र के नागरिक राजस्व देना बंद कर देंगे।
सरकार आंदोलन को जिस गंभीरता से नहीं ले रही है, उसका अर्थ किसी भी लोकतांत्रिक देश ��े लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
#पाँचना_बाँध पर सरकार लगातार अराजकतावादियों के साथ अपनी रणनीति साझा करने के लिए बैठकें करती रही है और आज भी भजनलाल शर्मा की मेडम ब��ढंग से अराजकतावादियों से मीटिंग की। दूसरी तरफ कमांड क्षेत्र के किसान, खण्डीप किसान महापंचायत के बैनर तले, उच्च न्यायालय के आदेश की पालना की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, जिसका आज 19वां दिन है।
भजनलाल शर्मा सरकार की कानून-व्यवस्था को जिस प्रकार संचालित किया जा रहा है, व��� राज्य के हर व्यक्ति को दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि क्या राजस्थान सरकार अराजकतावादियों के साथ मिलकर राज्य को किसी नए मणिपुर जैसे संकट की ओर धकेलने की तैयारी कर रही है ?
कमांड क्षेत्र के किसान सरकार से कोई विशेष सुविधा नहीं चाहते, वे केवल कानून-व्यवस्था का निष्पक्ष और उचित पालन चाहते हैं। सरकार को पक्षपात से बचने के लिए उन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए थी जो कानून के विरुद्ध जाकर प��ँचना बाँध का पानी रोककर बैठे हैं और जिनकी छवि विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों जैसे सरकारी जमीन की लूट और गरीब दलितों के घर मैं डकैती से जुड़ी रही है। राष्ट्रीय संपदा पाँचना बाँध की सुरक्षा तथा कानून के पालन हेतु वहां पुलिस अथवा आवश्यक सुरक्षा बलों की तैनाती की जानी चाहिए थी। लेकिन इसके विपरीत, सरकार ने कानून की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से बैठे आंदोलनकारियों की गतिविधियों की निगरानी हेतु बड़ी संख्या में अधिकारियों को तैनात करना अधिक उचित समझा। जिस बांध को अराजक तत्वों के कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए था, वहां कार्रवाई करने के बजाय कानून के पालन की मांग कर रहे किसानों को डराने धमकाने के लिए अधिक ध्यान दिया गया।
कमांड क्षेत्र के आंदोलन को अब तक 12–13 विधानसभा क्षेत्रों के लोगों का तन, मन और धन से समर्थन मिल चुका है। इसका कारण यह है कि यह आंदोलन राजस्थान की उस सांस्कृतिक भावना से जुड़ा है जिसमें राहगीर को पानी पिलाना पुण्य और मानवता का कार्य माना जाता है। एक समुदाय को छोड़कर लगभग सभी समाजों का भावनात्मक समर्थन इस आंदोलन के साथ दिखाई दे रहा है। भले ही संघर्ष कुछ ही जाति के किसान कर रहे हों, लेकिन उनके पीछे व्यापक जनसमर्थन खड़ा है।
आज पूरा राज्य भजनलाल शर्मा की ओर देख रहा है। जनता यह जानना चाहती है कि क्या राजस्थान में कानून का शासन स्थापित होगा और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, या फिर कानून तोड़ने वालों को ही संरक्षण मिलता रहेगा।
पांचना बांध मुद्दा: वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं सांसद हरीश मीणा फिर से पहुंचे किसान महापंचायत, जनता से करी कानून की पालना करने की मांग!
— "आपकी मांग सरकार से है लेकिन कुछ लोग आपको बहका रहे हैं कि रेलवे पटरी पर चलो, पटरी पर नहीं जाना है, वहां जनता को ही परेशानी होगी, आपके ही लोग रेल यात्रा करते है��
20 साल से आपका पानी पांचना बांध से रुका हुआ है, अगर चलना ही पड़ा तो पांचना बांध पर चलेंगे, लेकिन अभी वो समय नहीं है"
पांचना बांध मुद्दा –
किसान महापंचायत खंडीप:
अगर एक महीने बारिश न हो, फसल खराब हो जाए तो कहते हैं जमाना खराब हो गया है, यहां आप 20 साल से पानी के इंतजार में भूखे प्यासे बैठे हो, ऐसा क्या गुनाह किया है जो क���छ लोग आपके हिस्से का पानी गैर कानूनी रूप से रोककर बैठे हैं
— वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं सांसद हरीश मीणा @HC_meenaMP @INCIndia
इस प्रदेश के कांग्रेस के दो बडे नेता है एक #अशोक_गहलोत और #सचिन_पायलट साहब इन दोनो नेताओ को हाईकमान की ओर से आर्डर जारी करो की अपने प्रभाव का इस्तमाल करे अरने लोगो को समझाए और हमारी समस्या का समाधान करके किसानो के हक मे कमांड एरिया की नहरो मे पानी खुलवाए
- रामकेश मीना (विधायक गंगापुर)
आज बड़े भाई साहब Hanuman Beniwal से पाँचना बांध के मुद्दे को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है।
मुझे विश्वास है कि जल्द ही भाई साहब कमांड एरिया के किसान भाइयों के पक्ष में मजबूती से खड़े दिखाई देंगे। @hanumanbeniwal
���िसान हित सर्वोपरि हैं।
आज खंडीप,गंगापुर में आयोजित किसान महापंचायत में पहुंचकर किसान भाइयों की पीड़ा,संघर्ष और मांगों को लेकर संवाद किया।
किसानों के अधिकारों की रक्षा करना और समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना सरकार एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
किसानों की आवाज़ ही मेरी आवाज़ है।
@PMOIndia
@AmitShah
@RajGovOfficial
@INCIndia
@INCRajasthan
“अत्याचार को सहना, अत्याचार को बढ़ावा देना हैं”
“हम अभिमानी नहीं हैं, लेकिन स्वाभिमानी हैं”
“रेल ने हमारा पानी नहीं रोका हैं जो रेल रोकने से काम होगा, जिन्होंने पानी रोका हैं वहाँ जाना हैं, उचित समय पर वहाँ जाना हैं”
“यहाँ राजपूत, जाट, सैनी, दलित, मुसलमान सभी पीड़ित हैं”~ हरीश मीणा (सांसद, सवाईमाधोपुर-टोंक) खण्डिप किसान महापंचायत
क्या सचिन पायलट अपने कुकृत्यों के लिए दलित आदिवासी समाज से माफी मांगेंगे?
जब भी कोई अपने हक की लड़ाई लड़ने लगता है तो उसको एक जाति का टैग देकर लड़ाई के मुद्दे को ही खत्म करने की कोशिश होती है
कमांड क्षेत्र में 20 सालों से पानी के इंतजार में बैठे किसान सिर्फ मीणा जाति के नह���ं हैं, सबसे पहला गांव ही राजपूत जाति बाहुल्य गांव है, आगे जाट, माली, गुर्जर सब जातियों के गांव है, हर गांव में दलित वर्ग के लोग रहते हैं, जिन्होंने शांति और सामाजिक भाईचारे के लिए 20 साल इंतजार किया है।
सचिन पायलट और उनके समर्थकों को ये जान लेना चाहिए कि हर जगह पर गुर्जर वोट बैंक से ब्लैकमेल की राजनीति नहीं करनी चाहिए और राजनीति भी हर जगह सिर्फ एक जाति के वोट बैंक का दबाव दिखाकर नहीं होती है, जितन��� संख्या गुर्जरो की है, उस से ज्यादा राजपूत, मीणा, जाट , ब्राह्मण सब की है, टिकट पार्टी देती है।
स��्वसमाज सचिन पायलट के खिलाफ सड़कों पर उतरे उस से पहले सचिन पायलट को अपने "एक बूंद पानी नहीं देंगे" वाले कुकृत्यों के लिए माफी मांग लेनी चाहिए कि उन्होंने कोर्ट आदेश के बाद अपने हक का पानी मांग रहे कमांड क्षेत्र के किसानों को दबाने, डराने के लिए करौली में कांग्रेस के झंडे के नीचे अपने समाज के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया था उसके लिए वो गलत थे और अब सर्वसमाज से क्षमा चाहते हैं और आगे से कांग्र��स के मजबूत वोट बैंक किसान,दलित और आदिवासी समाज को कांग्रेस टिकट एवं पदों का डर नहीं दिखाएंगे, गुर्जर वोटों का डर दिखाकर जीते हुए सांसद और विधायकों को पायलट अपनी गुलामी करने के लिए नहीं डरायेंगे।
लगता है छाछ का नशा ज़्यादा हो गया है.! वैसे मेरा @PoliceRajasthan और @AjmerpoliceR से निवेदन है कि इस तरह के असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ�� कार्यवाही करें.!
पांचना बांध एवं सीमावर्ती जिलों में चल रही कार्रवाई पर प्रतिक्रिया:
सवाल: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पांचना बांध पर तनाव बना हुआ है?
जवाब: एक- एक घटना ऐसी हो रही है राजस्थान के अंदर कि ये लगता ह�� नहीं कोई सरकार नाम की चीज राजस्थान में और उसी में पांचना बांध की समस्या भी आती है। अभी तक 15-20 दिन होने आए हैं। कम से कम दोनों समुदाय चाहे गुर्जर समाज हो, चाहे वो मीणा समाज हो, उनके पंच पटेल और जनप्रतिनिधियों को बुला के बात तो करते कि भाई रास्ता कैसे निकल सकता है। हाई कोर्ट आदेश दे रहा है बार-बार। अधिकारी लोग डरे हुए हैं कि कंटेंप्ट लग जाएगा।
एक तरफ कोई बात आगे बढ़ नहीं रही है। वो ��रने दे रहे हैं और पटरियों पर बैठे वो भी मैंने देखा है।
तो ये मैं कहना चाहूंगा सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री जी से कि इसको आप गंभीरता से लें। आप गंभीरता से लें और उसी रूप में बुलाकर शीघ्र बात करें। एक टीम बनाएं। आपके मंत्रियों की हो टीम और या आपकी पार्टी के लोगों की हो जो समझाइश कर सकते हैं। बुलाकर बात करनी चाहिए और समय रहते हुए रास्ता निकालना चाहिए जिससे कि शांतिपूर्ण तरीके से हल निकल सके और सबके साथ न्याय हो सके। ये मेरा मानना है।
सवाल: जातीय संघर्ष जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं :
जवाब: ये तो सरकार खुद कर रही है। जो सरकार का रवैया है उससे जातीय संघर्ष पैदा करने की जो इनकी नीति लगती है, मुझे नीयत लगती है वो पूरे देश के अंदर ही लगती है।
अब पाकिस्तान के बॉर्डर बाड़मेर-जैसलमेर, बीकानेर बॉर्डर पर आजादी के बाद आज तक वहां दंगे की बात छोड़ो तनाव भी नहीं हुआ, जबकि बड़�� तादाद में माइनरिटी के लोग वहां रहते हैं। आज तक ना तनाव हुआ न दंगे हुए।
कुछ एरिया के अंदर भी जो मस्जिदें हैं, दरगाह है, उनको चुन-चुन के आप गिरा रहे हो, भड़का रहे हो लोगों को । क्या तुक है भड़काने का? ये जो घटनाएं आ रही हैं तो ये समझ के परे है सरकार आखिर चाहती क्या है?
ये एजेंडा जो उनका ध्रुवीकरण का है, इन सब बातों को मैं उसी का पार्ट मानता हूं। जिससे कि चुनाव में धर्म आधारित जीत हासिल कर रहे लोग,वो ज���त इनकी बनी रहे। चुनाव आते रहते हैं। पांच राज्यों में चुनाव आ रहे हैं। इन बातों का मैसेज पूरे मुल्क में जाता है। वो चाहते हैं मुल्क में मैसेज जाए और ध्रुवीकरण हो और उसका लाभ हमें मिले,
संक्षिप्त में बात तो देखो ये है।
कोई कारण नहीं कि आप चुन-चुन करके मस्जिदों को और दरगाहों को गिराओ। एक दरगाह तो ऐसी है जहां पर हिंदू लोग ही वहां जाकर उसकी इबादत करते हैं। पूरे गांव में मुसलमान है ही नहीं। हिंदुओ��� ने हल्ला किया कि ��ाई आप क्या कर रहे हो? हम तो यहां हमारा खुद का स्थल है, हमने बनाया इसको। भील समाज भी वहां पर है। उसके बावजूद उन्होंने किसी की नहीं सुनी और उसको सबको तहस-नहस कर दिया। ये हरकतें जो हो रही है, जिला प्रशासन को देखना चाहिए कि क्या आप सही काम कर रहे हैं? क्या संविधान के अंतर्गत जो भावना संविधान की है, उसके अनुकूल आप न्याय दिला रहे हो वहां लोगों को? प्रशासन कलेक्टर हो, एसडीओ हो एसपी हो, जो भी अधिकारी हैं, चाह��� कमिश्नर या आईजी क्यों नहीं हो, उन सब की जिम्मेदारी है कि जो ये बॉर्डर एरिया है जहां शांति, प्यार, मोहब्बत से वहां पर साथ में लोग रह रहे हैं वहां फ्यूचर में क्या स्थिति बने क्या चाहते हो आप ? ये स्थिति बनी हुई है खतरनाक स्थिति है।
कल भरतपुर में जाट आरक्षण को लेकर बड़े भाई साहब Hanuman Beniwal के नेतृत्व में एक बड़ी रैली आयोजित होने जा रही है।
सभी साथी अधिक से अधिक संख्या में पहुँचें। हमारे भरतपुर और धौलपुर के जाट भाइयों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इस लड़ाई में हमारा जाट भाइयों को पूरा समर्थन रहेगा।
इंकलाब ज़िंदाबाद @hanumanbeniwal
धन्यवाद जाटव समाज 🙏
जाटव समाज ने एक सुर में लगाई आवाज की #पाँचना_बाँध कमांड एरिया की नहरों में पानी छोड़ा जाये और उच्च न्यायालय के फैसले की सख्ती से हो पालना साथ ही किसान महापंचायत खंडीप को दिया पूर्ण समर्थन।
जय संविधान 🙌
#पाँचना_बाँध
जाट गाँव कुसाया के जाट बाबा का फूटा गुस्सा: “इनने (गूजरों) ने हद कर रखी है! किसान के धैर्य की भी एक सीमा होती हैं”
सरकारी संपत्तियाँ डकैतों से मुक्त कराए सरकार, वरना पूरे राजस्थान में फैलेगी अराजकता…
जिन 11 गांवों की पांचना बांध में जमीन गई है, उनमें
पहाड़ी,शंकरपुर,दीपपुरा,, भोडेर,, मीनाओ के गांव है
भैंसावट,मांची,,,ठाकुरों के गांव है , जिनको तो पानी रोकने के आंदोलन से कोई मतलब ही नहीं है, फिर ये लोग देखलो किस तरह की झूठ बोलकर 39 गांव बता रहे है #PanchanaDam