#प्रेम_विषय
उन्होंने आँखें और हमने मौन
की भाषा चुनी प्रेम में
क्यूंकि कुछ शब्द थे जो
मन के भाव बदल सकतें थे
और कुछ लोग थे जो प्रेम विषय
से अपरिचित नहीं थे
जिन्हें भाषा सिर्फ
होठों का मिलन
और आँखें गुनहगार के
रूप में देखते थे
निक राजपूत
@Rajput_elf
#गुरुत्वाकर्षण
तुम्हारी स्व'रचित
कविताओं में
इतना आकर्षण हैं
अभी तो ऐक ही
लाइन पढ़ी मैंने
उतने में दिल
थर'थर काँप उठा
सोचता हूँ आगे
जा कर मेरे
गुरुत्वाकर्षण का
क्या हाल होगा
निक राजपूत
@Rajput_elf
शायद मुक्ति मिले "
ज़माने की कई आँखों से में
ख़ुद को बचते बचाते आया हूँ
तुम्हारी बाहो में तुम्हारें भीतर
शायद यहाँ सब दुःखो का अंत हो
नई आत्मा में मन प्रवेश करे
मेरा एकांतवास तुम्हारी बाहों में
पूर्ण'विराम ले
इन्हें मौक्ष मिले बंधन मुक्त हो...
निक राजपूत -
@Rajput_elf
अकेलापन, दुःख, दर्द असह्य,पीड़ा
से भरा हुआ था दिल में
क्या करता बस ऐक छोटी कविता
लिख दी और मन खाली
सभी को उनके हिस्से का मौक्ष मिल गया
निक राजपूत
@Rajput_elf
सुकून की तलाश थी मुझे '
फिर क्या ऐक दिन
तुम्हारी लत लगा ली लबों पर
फिर रोज तुम्हारा शिकार होता गया
धिरे धीरे तुम्हारा आदी होता गया
कुछ दिनों में तुम्हारा प्रेमी होता गया
अंत में मैं मेसे हम हों गया ..
निक राजपूत
@Rajput_elf
#मेरे_लफ्ज़
अकेलापन, दुःख,
दर्द असह्य,पीड़ा
से भरा हुआ था
मेरा दिल
क्या करता बस
ऐक छोटी कविता
लिख दी
और मन खाली
सभी को
उनके बराबर के
हिस्से का
मौक्ष मिल गया
निक राजपूत -
@Rajput_elf
#प्रेम_पुल
जल्दबाज़ी में बिछड़ने से लेके '
आराम से तन्हा होने तक के
हालातों से भी गुजरा हूँ
मैं प्रेम पुल पर
रास्ता ऐक था बस छोर अलग थे
दोनों के हम दोनों की तरह...
निक राजपूत
@Rajput_elf
#काल्पनिक_भाषा
मुझे दुनियाँ देखने "
की फ़िक्र कहाँ
में तुम्हारी आँखों में
पूरी दुनियाँ देखता हूँ
क्यूंकि तुम्हारी आँखों
से तो शायद
दूसरा और कोई गहरा
समंदर नहीं इस
धरती पर
मेरी काल्पनिक भाषा में..
निक राजपूत
@Rajput_elf
तुम्हारी स्मृतियाँ
तुम्हारी स्मृतियों का बोझ भारी हैं "
मेरी खामोशीयों से ज़ियादा
अगर यक़ीन न आएं तो
तुम मेरी तरह ख़ुद को कागज़ पर
उतार कर तस्सली करके देख लो ऐक बार..
@Rajput_elf
निक राजपूत
#कलम
कलम को अपनी डायरी में "
छुपा कर रखता हूँ
उन्हें कभी खिड़कियों तक
लेजा कर बाहर की दुनियाँ में चल रही
नफ़रत की जंग दिखाई नहीं कभी
में नहीं चाहता कलम खंडित हों
उन्हें कविताएं लिखने के
लिए कुछ समय बाहर
आने की इज़ाज़त दी ताकी वो
सिर्फ प्रेम रस ही लिखें ..
@Rajput_elf
प्रेमिकाओं ने हमेशा से ही
प्रेमियों के बदले सफल पुरुषों को चुना है, समाज में अपना स्तर
सुरक्षित और ऊंचा बनाए रखने के लिए।
जबकि प्रेमिकों ने ढूंढा
उन कविता और उपन्यासों को,
जहाँ वो खुद को रख
अपने सफल प्रेम की कल्पना कर सकें ।
🔹 सौम्य रंजन पाल
@GumnaamPal
बादल सी स्त्रियां,
शहर जैसे पुरुषों के,
जीवन रूपी असमान से,
बरबस गुजरती हैं।
पुरुष के मन में,
सावन में भीगने की,
ख्वाहिशें होती हैं,
पर हर शहर के,
नसीब में कहां,
बारिशें होती हैं।
#सं_जू#सावन#Sawan2023
पूर्ण प्रेम
मेरी कुछ पंक्तियाँ संभाल कर ऱखना "
अपनी किताबों के बिच जैसे
तुम्हें आदत हैं न फूल ऱखने की किताबों में
अगर हमारे ऐक'तरफे प्रेम की ज़ज़ीर टूटी नहीं
तो तुम अमृत प्रेम लिखना सदा अमर प्रेम
जिंज़ीर टूटी तो मैं मोक्ष पूर्ण प्रेम लिखूँगा....
@Rajput_elf
निक राजपूत