'तुम्हारा होना'
-क्या तुम्हे ज्ञात है मेरे लिए तुम्हारा अस्तित्व
क्या समझते हो तुम तुम्हारे प्रति मेरे समर्पण की भावना
क्या इल्म है तुम्हे समंदर में बरसात की बूंदों के विलीन होने का
गर नहीं, तो सुनो -
~ आँचल✍️
"विकल्पों में भटकता इंसान है
तस्वीरों में नकली मुस्कान है,
भौतिकता का युग है
मिथ्या आज का धर्म है,
जीवन मायूस है
चेहरे उदास है,
स्वार्थ में लिप्त परवाह है
न जाने क्या गंतव्य है,
भावनाओं का हनन है
मानवता का पतन है,
न जाने किसका अभिमान है
हर शख्स क्यों इतना परेशान है...."
~आँचल✍️
"प्रेम हो सकता है किसी की वाणी से भी
प्रेम हो सकता है किसी के शब्दों से
प्रेम हो सकता है किसी के विचारों से
कितना सुंदर होता है ऐसा मिलन
भौतिक सुख से परे आत्मिक मिलन।"
~आँचल ✍️
चलो थोड़ा सा धैर्य रखते हैं
माना कि घनी उलझी हुई है ज़िंदगी
विचारों से भटकी हुई है ज़िंदगी
धीरे धीरे अपनो के साथ इसे
मिल के सुलझाते हैं
कुछ धागे हो सकता है चटक जाये
कहीं अटक जाये
प्यार के मरहम से उनमें पड़ी गिरहों को
फिर से खोल जाते हैं
चलो ना थोड़ा सा धैर्य रखते हैं
जानते हो
क्यों खींची आती हूं हर बार तुम्हारी ओर
कि ऐसा क्या है तुम में
जो खिंचता है मुझे तुम्हारी ओर
मेरी नज़रों से जो देखोगे कभी तुम
तो जानोगे कि ऐसा क्या है तुम में...
~आँचल✍️