पानी की कमी से सराणा (बालोतरा) गांव के क्षेत्र ऊंट 🐪 की तड़प तड़प कर मौत..जबकि ऊंट कई दिनो तक बिना पानी पिए जिंदा रह सकता है .. ऐसा लगता है कि पानी की आवक काफ़ी लंबे अरसे से बंद है।
गाय, नीलगाय, हिरण भेड़-बकरियों व अन्य पशुओं का गर्मी मे क्या हाल होगा..?
पगड़ी-जोधपुर+उदयपुर की प्रसिद्ध है!
मेवाड़ के महाराणाओं की पगड़ी बांधने वाला व्यक्ति "छाबदार" कहलाता था।
विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी "बागोर की हवेली" उदयपुर में रखी है!
मेवाड़ में- "चपटी पगड़ी"
मारवाड़ में- "छज्जेदार पगड़ी"
आमेर में- "खुंटेदार पगड़ी"पहनी जाती है!
#पगड़ी
क्या आप जानते हैं ?
राजस्थान में दुर्गों की श्रेणियां "शुक्र नीति" के अनुसार 9 प्रकार की है 👇
1.सैन्य दुर्ग
2.गिरी दुर्ग
3.स्थल दुर्ग
4.धानवन दुर्ग
5.पारीध दु��्ग
6.पारिख दुर्ग
7.जलदुर्ग
8.एरण दुर्ग
9.सहायक दुर्ग
#Rajsthan_Culture
तेजाजी मेर के डाकुओं से लाछा गुजरी की गायों को छुड़वाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए,
सर्प के काटने पर तेजाजी का आह्वान किया जाता है
तेजाजी नाग देवता या सांप देवता के रूप में प्रसिद्ध है.
तेजाजी के पुजारी को घो���़ला तथा मंदिर को थान कहते हैं.
#लोकदेवतातेजाजी #खड़नालकेधणी
जीवन परिचय लोकदेवता #तेजाजी:-
जन्म स्थान- खड़नाल नागौर (1074 ई.)
पिता- ताहड़ जी
माता- राम कुंवर
घोड़ी- लीलण/सिणगारी
विवाह- पेमल दे के साथ हुआ
ससुर- रायचन्द जी
बहिन- राजल बाई
उपनाम- काला-भाला के देवता, कृषि कार्यों के उद्धारक देवता, गौ रक्षक, गायों के मुक्तिदाता,
लोकदेवता तेजाजी:-
सहरिया जनजाति के आराध्य देवता तेजाजी है.
तेजाजी का जन्म नागवंशी जाट परिवार (धोलिया गोत्र) में हुआ था.
2011 में तेजाजी पर डाक टिकट जारी हुआ.
तेजाजी की प्रमुख कार्यस्थली बासी दुगारी (बूंदी)है.
वीर तेजाजी पशु मेला- परबतसर(नागौर )
#लोकदेवतातेजाजी
क्या आप जानते हैं ?
रणकपुर के जैन मंदिर में 4 प्रवेश द्वारा हैं। मंदिर में जैन तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर ��े बनी 4 मूर्तियां हैं, जिनके मुख चारों दिशाओं की ओर हैं। इन सभी मूर्तियों की ऊंचाई 6 फीट है। इसीलिए इसे चतुर्मुख मंदिर भी कहा जाता है।
क्या आप जानते हैं ?
अरावली पहाड़ियों के गर्भ में स्थित जल महल को मानसागर झील के बीचों-बीच होने के कारण 'आई बॉल' भी कहा जाता है। इसके अलावा इसे 'रोमांटिक महल' के नाम से भी जाना जाता था। राजा अपनी रानी के साथ खास वक्त बिताने के लिए इस महल का इस्तेमाल करते थे।
@RajsCulture
1740 में निर्मित, तूरजी का झालरा जिसे आमतौर पर जोधपुर का सौतेला परिवार कहा जाता है। जो जोधपुर की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों को दर्शाती कुछ शेष संरचनाओं में से एक है। इस वास्तु आश्चर्य को महाराजा अभय सिंह की रानी-संघ द्वारा बनाया गया था।
@RajsCulture
यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है, जैसे कि एक चील का घोंसला होता है। इसका निर्माण दरबारी चौबदार जालिम सिंह मेड़तिया ने 750 ईo में कराया था। इसे जागीरी किलों का सिरमौर कहा जाता है।
#RajasthanCulture@RajsCulture
आमेर का किला – राजस्थान के मुकुट पे जड़ा हीरा! पहाड़ों से झांकता इतिहास, शीशों का जादू बिखेरता जल महल, छुपे रास्तों के रहस्य – एक ही पल में दिल जीत लेता आमेर का किला!
#RajasthanCulture@RajsCulture
क्या आप जानते हैं?
रामपुरिया हवेली पुराने वास्तुकला और भव्यता का एक उत्कृष्ट मिश्रण है। लाल बलुआ पत्थरों में बनी ये हवेली बीकानेर की ऐतिहासिक संरचनाओं में एक जीवंत रूप मानी जाती है। बीकानेर घूमने आए लोगों के बीच में ये हवेली काफी खास माना जाती है।
#Bikaner@RajsCulture
क्या आप जानते हैं?
रामपुरिया हवेली पुरान�� वास्तुकला और भव्यता का एक उत्कृष्ट मिश्रण है। लाल बलुआ पत्थरों में बनी ये हवेली बीकानेर की ऐतिहासिक संरचनाओं में एक जीवंत रूप मानी जाती है। बीकानेर घूमने आए लोगों के बीच में ये हवेली काफी खास माना जाती है।
#Bikaner
@RajsCulture
आमेर का किला – राजस्थान के मुकुट पे जड़ा हीरा! पहाड़ों से झांकता इतिहास, शीशों का जादू बिखेरता जल महल, छुपे रास्तों के रहस्य – एक ही पल में दिल जीत लेता आमेर का किला!
#RajasthanCulture@RajsCulture
@ChidiKamedi यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस���से पर स्थित है, जैसे कि एक चील का घोंसला होता है। इसका निर्माण दरबारी चौबदार जालिम सिंह मेड़तिया ने 750 ईo में कराया था। इसे जागीरी किलों का सिरमौर कहा जाता है।
#RajasthanCulture
@RajsCulture