हे शनिदेव, कर्म के साक्षी,
सूर्य पुत्र, न्याय के रक्षी।
काले वस्त्र, काग भूषण,
दंड धारक, भक्तों के भूषण।
जो सही मार्ग पर चले न डर,
तुम आशीष दो, सुख-समृद्धि भर।
कर्म फल दो, बिना पक्षपात,
दुख-सुख दोनों, जीवन की बात।
साढ़े साती का भय न हो,
जो भजन करे, तू रक्षा करो।
हे शनैश्चर, धैर्य के देवा,
भक्तों का दुख हर लो सेवा।
तेरे नाम से मंत्र जपे,
कर्म शुद्ध हो, मन निर्मल बने।
शनि चालीसा पढ़े जो नित्य,
सब संकट मिटे, हो जय-जयकार।
जय शनिदेव! 🙏