श्रवण ने दसवीं तक सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की है। आर्थिक अभावों के कारण कमठे (मकान चुनाई) के काम पर ग���ा। पिताजी बर्षा ऋतु में किसानी और बाद में झूठे बर्तन धोने का काम करते।
मगर जिन हौसलों में संकल्प बनने की ताकत होती है वो भला कब किसी के रुकने से रुकते है। श्रवण हजारों आंखों में एक सपना बनकर उतर आया है।
आज भी देश में काफी ऐसे सेवाभावी लोग है जो प्रचार-प्रसार से कोसों दूर रहकर नर सेवा
को नारायण सेवा मानकर "अपनी करनी पार उतरनी" कहावत को चरितार्थ करते है.
ये बुजुर्ग और महिला ग्राम हुड्डों की ढ़ाणी, जिला बाड़मेर में 18 सालों से गर्मियों में आने वाली हर बस के यात्रियों को निःशुल्क पानी पिलाते हैं. इतनी उम्र में भी बिना किसी स्वार्थ के सेवा करना वाकई काबिले तारीफ है.
एक मां ���े दूर होकर दूसरी मां की हिफाजत करने जा रहा है भाई। हम आपके हौसले को सलाम करते है। ये आपकी ड्यूटी नहीं अपितु देश पर अनमोल कर्ज हैं जो कभी अदा नहीं किया जा सकता हैं।
#saluteindianarmy🇮🇳
एक मां से दूर होकर दूसरी मां की हिफाजत करने जा रहा है भाई। हम आपके हौसले को सलाम करते है। ये आपकी ड्यूटी नहीं अपितु देश पर अनमोल कर्ज हैं जो कभी अदा नहीं किया जा सकता हैं।
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