राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार मिले, ये शुरू से ही हमलोगों की प्राथमिकता रही है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020-25 के बीच राज्य में 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दिया गया है। अगले 5 वर्षों (2025-30) में हमलोगों ने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
नई सरकार के गठन के पश्चात् राज्य में अधिक से अधिक सरकारी नौकरी एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध करने के लिए हमलोगों ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। सरकारी नौकरी की रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं।
राज्य के अधीन सभी प्रशासी विभाग, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस मुख्यालय के अधीन सभी कार्यालय एवं सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे सामान्य प्रशासन विभाग को रिक्तियों से संबंधित अधियाचना दिनांक 31.12.2025 तक अवश्य उपलब्ध करा दें। सामान्य प्रशासन विभाग प्राप्त अधियाचनाओं को यथाशीघ्र जांच कर संबंधित विभिन्न नियुक्ति आयोगों को भेज दें।
सभी नियुक्ति आयोगों एवं चयन एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि जनवरी 2026 में नियुक्ति हेतु पूरे साल का कैलेंडर प्रकाशित करें जिसमें अन्य आवश्यक सूचनाओं के अतिरिक्त विज्ञापन प्रकाशन की तिथि, परीक्षा आयोजन की संभावित अवधि, अंतिम परीक्षाफल प्रकाशन की तिथि आदि का स्पष्ट रूप से उल्लेख हो। परीक्षा के चाहे जितने भी चरण हों किसी भी परिस्थिति में विज्ञापन प्रकाशन से अंतिम परीक्षाफल में एक साल से अधिक समय नहीं लगना चाहिए।
सभी परीक्षाओं को पारदर्शी एवं स्वच्छ तरीके से संपन्न कराने हेतु सभी नियुक्ति आयोगों एवं चयन एजेंसियों को निर्देशित किया गया है। परीक्षाओं में अनुचित साधन की रोकथाम के लिए सख्त और तत्काल कार्रवाई की जाए। परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों को चिन्हित करते हुए उनके विरूद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दंडित कराने का भी निर्देश दिया गया है।
बिहार में ऑनलाइन परीक्षा CBT (Computer Based Test) हेतु परीक्षा केन्द्रों की संख्या को बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया है ताकि परीक्षाओं का आयोजन ससमय एवं सुचारू रूप से किया जा सके।
राज्य के युवाओं के सुखद भविष्य के लिए हमलोग शुरू से काम कर रहे हैं। अधिक से अधिक सरकारी नौकरी एवं रोजगार देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। सभी परीक्षाएं ससमय एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएंगी। बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों तथा उन्हें अधिक से अधिक रोजगार मिल सके, उनका भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए हमलोग कृतसंकल्पित हैं।
@NitishKumar माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी,
BSSC Advt 06060114 में
➡️ 1,778 अभ्यर्थी DV पास कर भी वंचित
➡️ 2,000+ पद अब भी रिक्त
Supreme Court (16.07.24): रिक्ति होने पर पात्रों को बाहर रखना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन।
🙏 कृपया पूरक सूची जारी कर नियुक्ति सुनिश्चित करें।
#JusticeFor1778
@btetctet भगवान न करे किसी के साथ ऐसी अनहोनी हो।
लेकिन क्या इसमें सिर्फ सिस्टम ही दोषी है ?
जब आपलोगो को पता है कि २ मिनट भी लेट होने से आपका वेतन काट लिया जाएगा।
तो आपलोगो की जिम्मेदारी है कि सुरक्षित और समय पर विद्यालय पहुंचे।
@Abhimanyu_gt09@amitkvikram सर उन्होंने जो रसोईया के बारे में बोले है वह बात 100% सच है क्योंकि रसोईया को महीने का 1650 रूपया मिलता है, वो भी साल में 10 महीने ही मिलता है
बिहार में चुनावों को लेकर बहुत ही निराशाजनक माहौल है। इतना कम वोटिंग होना चिंता का विषय है। ज़मीनी हक़ीक़त यही है कि आम जनता में वोट देने को लेकर उत्साह नहीं है।
मतदाता घर से निकल कर बूथ तक आना नहीं चाहते। सबके पास अपने बहाने हैं लेकिन सच्चाई यह है कि 'कोई भी जीते फर्क नहीं पड़ता' वाली सोच हो गई है सबकी।
आखिर हो भी क्यों नहीं? बिहार के विकास पर किसी ने ध्यान तो दिया ही नहीं!!
@amitkvikram बिहार को बर्बाद करने में लालू-राबड़ी, नीतीश-सुशील,मोदी ये सब बराबर के जिम्मेदार है।
50% जानता युवा वर्ग जो कि 20 साल से ऊपर के है बिहार छोर के बाहर चले जाते है कोई पढ़ाई, कोई कमाई कोई सुरक्षा कोई जिमेदारी के लिए । यही कला सच है
आज जिस बूथ पर मैं वोटिंग करवा रहा था वहां चुनाव समाप्त होने तक 38% मात्र मतदान हुआ। मैंने रसोइया (जो लगभग निरक्षर है) से पूछा इस बारे में कि गांव के लोग वोट देने क्यों आ रहे? तो उसका जवाब सुनिए!
रसोइया का जवाब - "कोय जीतै-हारै कि फरक पड़ै छै सर? सब तै एक्के रंग छै। हमरा सनी कै ₹50 दिहाड़ी पर खटवाय छै! वोट देला और नय देला सै बात बराबरे छै। कोय त नैय कहै छै कि रसोइया कै भी कम सै कम मनरेगा एतना भी मजदूरी मिलै कै चाहि।" (उसके अनुसार मनरेगा में मजदूरी ₹300 प्रति दिन है)
"हमरो आदमी (पति) वोट नैय देलकै। गेलौ छै एगो मकान कै ढलाय मै मजदूरी करै लै। अपने कमैलो काम देतै। भोट-भाट देला सै कोय फरक नैय पड़ैय छै!"
सोचिए जब बिहार में समाज के निम्नतर (आर्थिक आधार पर) तबके की नेताओं के प्रति ये सोच है तो फिर वोटिंग प्रतिशत क्यों नहीं कम होगा!!
#WeNeedToThink
बिहार मे किसी पार्टी या नेता ने पेपरलीक रोकने तथा पेपरलीक एवं धांधली-सेटिंग मे संलिप्त बड़े-बड़े कोचिंग शिक्षकों, अधिकारियों एवं नेताओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात को चुनावी घोषणा पत्र मे शामिल किए हैं क्या ? कोई नेता चुनावी सभा मे भाषण मे इसका जिक्र करते हैं क्या ?