सुधर जाइए यह सिर्फ इक आईना है,
जागे नहीं तो अगली बार सफा हो जाना है।
धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर विकास की राह चलो,
राशन बांटने पर गुमान मत कर,
जनता को लायक बना कर इनका उत्थान कर,
प्रोवेटाइजेशन की जगह हर प्रदेश में नई प्राइवेट कम्पनी लगाए,
रोजगार देकर जनता को आत्म निर्भर बनाएं।
मानो मुझे अपना, तो फिर मैं हूं सिर्फ़ तुम्हारा,
तुम गैर गर समझो, तो फिर किसी का नहीं हूं मैं।
हां, आदतें मुझमें भी हैं कुछ कड़वी सी सही,
मगर दूसरों की ख़ुशी से जलता नहीं हूं मैं।
वक़्त ने सिखाया है चुप रहना भी इक फ़न है,
हर बात पे अब टूटकर बोलता नहीं हूं मैं।
#poetrycommunity
जनता को प्रणाम, जनमत को सलाम!
उप्र की जागरूक जनता ने देश को एक बार फिर से नयी राह दिखायी है, नयी आस जगायी है।
ये संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण बचाने की और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करवाने की जीत है। उप्र की प्रगतिशील जनता के विचार ही वोट के रूप में हमें मिले हैं। ये बँटवारे की नकारात्मक राजनीति के ख़िलाफ़, सौहार्द-भाईचारे और सकारात्मक राजनीति की जीत है। ये INDIA गठबंधन और PDA की एकता की जीत है।
सबको हृदय से धन्यवाद, दिल से शुक्रिया!
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पीछे से धक्का लगाने वाला शख्स हाथी को ट्रक में चढ़ा सकता है लेकिन सिर्फ इतने से ही हाथी को एहसास है कि मेरे पीछे कोई है जो मेरी मदद कर रहा है और इसी एहसास के सहारे हाथी ट्रक में चढ़ जाएगा।
कभी कभी हमें भी ऐसे ही हल्के से सहारे की जरूरत होती है। मदद करें।
निकला था सफर पर सुकून खोजने,
जमाने की फेहरिस्त ने राह भटका दिया,
लगी ठोकर तो नींद से जागे,
मंजिल की तरफ फिर से भागे,
देर हो चुकी है सफर फिर वहीं से शुरू हुआ,
अब निकाला हूं सफर पर तन्हाई को साथ लिए,
देखते है कब मिलता है मंजिल–ए–सुकून यहां।।
#तन्हाई_इक_नई_राह_लाई