Thousands of protesters are gathering in the Indian capital, demanding the resignation of Prime Minister Narendra Modi and his education minister.
It follows back-to-back scandals related to examination paper leaks and cancelled tests.
Journalist Neha Poonia reports.
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
The core tenets of the Modi government are Asatya and Hinsa.
The removal of Sonam Wangchuk ji from Jantar Mantar while he was on a non-violent hunger strike is wrong.
Paper leaks, the rising cost of education, and student suicides are critical issues for India’s future.
No amount of force can deter India’s students, and those of us who love and believe in them, from raising these issues.
#ChhatronKiGoonj
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत” का सच।
एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।
वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है?
नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।
मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
लखनऊ : अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखने का आदेश पी गए अफसर
➡1 अप्रैल से यूपी में लागू होना था अंडों पर स्टैम्पिंग
➡अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखने का फैसला लागू नहीं हुआ
➡प्राइवेट संस्थाओं के दबाव में FSDA ने लागू नहीं किया फैसला
➡FSDA कमिश्नर रौशन जैकब प्राइवेट संस्थाओं के दबाव में
➡पोल्ट्री फार्म वाले चाहते हैं, और बड़े व्यापारी रोक रहे हैं
➡यूपी के कोल्ड स्टोरेजों में करोड़ों अंडे डंप किए जाते हैं
➡NACC यूपी में अंडों पर स्टैम्पिंग रुकवाना चाहता है
➡NACC प्राइवेट संस्था अरबों का मुनाफा कमाती है
#Lucknow #EggStamping #FSDA @UPGovt
Galgotias यूनिवर्सिटी ने फ्रॉड किया। ठीक है। हर आदमी गुस्सा हुआ, जायज भी है।
लेकिन अब रुकिए। बड़ा मुद्दा क्या है? दो मिनट के लिए मान लीजिए, गलगोटिया यूनिवर्सिटी भारत में है ही नहीं। तो हम कहां हैं?
चीन जिस तरह का रोबोट बना रहा है, जो AI platforms बना रहा है? क्या हम उसके आधे रास्ते में भी अब तक पहुंचे हैं?
ये सिर्फ गलगोटिया या एक-दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी का मुद्दा है क्या? देश की IIT, NIT वगैरह में क्या हो रहा है?
और गलगोटिया यूनिवर्सिटी वो रोबोट लेकर वहां तक पहुंची कैसी? कोई नियम-कायदा फॉलो हुआ था, कोई अप्लीकेशन देना था क्या? ..कि हम ये show करना चाहते हैं, इसलिए हमें परमिशन दो?
किस IAS ने allow किया ? देश में 600 प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, क्या कोई भी AI Summit में कुछ भी लाकर दिखा सकता था? जिस stall की बिजली काट दी गई, उसे allot किसने किया था? किस आधार पर किया था ?
और भारत सरकार, यूनिवर्सिटीज में AI को लेकर क्या खास माहौल क्रिएट कर रही है? सरकारी यूनिवर्सिटी में क्या हो रहा है? इसके लिए सरकार ने कोई बड़ा फंड अलॉट किया है, कोई व्यवस्था दी है?
हम बड़ी जिम्मेदारी से कब तक भागेंगे। किसी एक को पकड़ लिया। पूरा देश गुस्सा कर लिया। लेकिन क्या हम व्यवस्था बदलने के लिए पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? जिन बड़े लोगों से, बड़े सवाल पूछे जाने चाहिए, क्या हम पूछ रहे हैं ?