"भ्रष्टाचार पर चुप्पी तोड़ो,
धर्मेंद्र प्रधान पद छोड़ो"
दिल्ली में बीजेपी सरकार के इशारे पर लोकतांत्रिक रूप से आंदोलन करने वाले युवा साथियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद न्याय की मांग को लेकर नगीना से सांसद व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर जी आजाद द्वारा संसद भवन परिसर में दिए जा रहे धरने में सम्मिलित हुआ |
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते लेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
सोचकर तकलीफ़ होती है मोदी जी आप इतने निर्मम कैसे हो सकते हैं?
@Wangchuk66 जैसे पढ़े लिखे शख़्स पेपर लीक के ख़िलाफ़ पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, उनका वजन 7 किलो घट चुका है, मोदी को तो उनकी बात सुनने की फुर्सत नहीं, आप तो जंतर मंतर पहुँचिये।
#jantar_mantar
पेपर लीक होने पर हैरान न हों। जब राम मंदिर में भर्ती घोटाला हो गया तो सरकार की भर्ती में घोटाला क्यों नहीं होगा? अमृत काल में घोटाले की मांग कीजिए । आपको प्रधान बनने का मौका मिलेगा और अगर इसका विरोध करेंगे तो यह फ़िल्म नहीं है कि धर्मेंद्र बनने का मौका मिल जाएगा। जेल ज़मानत के डर से भारत की जवानी दीवारों पर लिखने लगी है पवन को पुष्पा से प्यार है। भारत की जवानी की कोई कहानी नहीं है।
💔- कभी मंदिर से चोरी की खबर आती है।
कहीं ईवीएम के जलने की चर्चा हैं।
कभी शिक्षा मंत्रालय में आग लग जाती है।
कभी होटल तो कभी library में आग लगने से लोग जान गंवा देते हैं और फायर ब्रिगेड वक़्त पर नहीं पहुँच पाती।
कहीं अस्पतालों के बाहर इलाज के लिए तरसते लोग...
तो कहीं स्कूलों की छत गिर जाती है।
कभी पेपर लीक से लाखों सपने टूट जाते हैं ...
तो कहीं न्याय की उम्मीद में उम्र निकल रही है।
आए दिन भ्रष्टाचार की खबरें, योजनाओं में घोटालों के आरोप है।
प्रदूषित हवा...गंदा पानी...टूटी सड़कें, गिरते पुल हैं।
महँगाई से जनता की जेब पर बढ़ता बोझ हैं।
आखिर कब तक?
कब तक इस देश का आम आदमी हर मोर्चे पर समझौता करता रहेगा?
खाने में मिलावट स्वीकार कर लो...
शिक्षा में खामियाँ स्वीकार कर लो...
स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली स्वीकार कर लो...
भ्रष्टाचार स्वीकार कर लो...
बेरोज़गारी स्वीकार कर लो...
और फिर कह दो - "ऐसे ही चलता है।"
नहीं...
ऐसे नहीं चलता।
समस्याओं को नियति मानकर हम देश को कमज़ोर कर रहे हैं
दुनिया के किसी भी विकसित देश ने चुप रहकर विकास नहीं किया।
वहाँ नागरिकों ने सवाल पूछे, जवाब माँगे और व्यवस्था को जवाबदेह बनाया।
आज भारत में करोड़ों ईमानदार लोग हैं- ईमानदार शिक्षक हैं।ईमानदार डॉक्टर हैं।ईमानदार अधिकारी हैं।ईमानदार पत्रकार हैं।ईमानदार कर्मचारी हैं।
लेकिन यदि ये सब अपने-अपने डर, स्वार्थ और मजबूरियों में चुप बैठे रहेंगे तो कुछ भी नहीं बदलेगा।
देश पीछे जा रहा है, क्योंकि गलत को देखकर भी बहुत लोग चुप हैं।
जिस दिन इस देश का आम नागरिक यह तय कर लेगा कि उसके बच्चों को शुद्ध भोजन चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए, निष्पक्ष परीक्षाएँ चाहिए, सुरक्षित शहर चाहिए और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए...
उस दिन से बदलाव शुरू होगा।
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
यह लड़ाई किसी दल, नेता या सरकार के खिलाफ नहीं है।
यह लड़ाई भारत के भविष्य के लिए है।
हम परीक्षा के लिए सुबह 4:30 बजे से निकले हैं, बहुत प्रेशर है, लेकिन इन लोगों को कोई मतलब नहीं है।'
- SSC GD की परीक्षा कैंसिल होने की खबर सुनते ही एक छात्रा फूट-फूटकर रोने लगी।
छात्रों का कहना है कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हुई है। एग्जाम सेंटर पर पहुंचने के बाद कहा गया- घर लौट जाओ, परीक्षा नहीं होगी।
BJP सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। पहले NEET में छात्रों का भविष्य तबाह किया गया और अब SSC GD में धांधली की खबरें आ रही हैं।
छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं, मां-बाप पेट काटकर उनकी फीस भरते हैं, परीक्षा में आने-जाने का खर्च मैनेज करते हैं और आखिर में पेपर लीक हो जाता है।
ये पाप है- जिसकी कोई माफी नहीं है
पेपर लीक की साझेदार - मोदी सरकार
भर्ती परीक्षाओं को आखिर इतना मजाक क्यों बना दिया गया है
कहीं paper leak, कहीं server issue, कहीं center mismanagement और अब #ssc_gd 500 छात्रों को बुलाकर सिर्फ 250 की व्यवस्था।
आखिर ये कैसी परीक्षा प्रणाली बनाई जा रही है?
दूसरे जिलों से छात्र महीनों की तैयारी, खर्च और pressure लेकर exam देने पहुंचते हैं, और वहां जाकर पता चलता है कि system खुद तैयार नहीं है।
सबसे दुखद बात ये है कि हर बार गलती व्यवस्था की होती है, लेकिन नुकसान सिर्फ छात्रों को उठाना पड़ता है। फिर जब युवा गुस्सा दिखाते हैं, तो लोग उनकी प्रतिक्रिया देखते हैं
लेकिन उस मजबूरी और टूटते भरोसे को नहीं, जो उन्हें वहां तक ले जाता है।
विशेष शिक्षा के लिए राजस्थान एकीकृत शिक्षक महासंघ @RESMA_7 हमेशा साथ खड़ा है।
बिना विशेष शिक्षकों के दिव्यांग बच्चे स्कूलों में आखिर कैसे पढ़ाई करेंगे,,, कल संगठन की ओर से सरकार को पत्र लिखकर इस मामले को मजबूती के साथ उठाया जाएगा। 🙏🙌
जनगणना, SIR, चुनावी कार्य और अन्य गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के बाद अब सरकारी अध्यापकों को LPG गैस वितरण केंद्रों पर ड्यूटी भी दी जा रही है।
सरकार से विनम्र निवेदन है कि अध्यापकों का मूल कार्य बच्चों को पढ़ाना और उनका भविष्य बनाना है। लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित होती है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
अतः @RESMA_7 का सरकार से आग्रह है कि अध्यापकों को केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित रखा जाए, ताकि वे पूरी ऊर्जा और समय के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकें।
कृपया अध्यापकों को पढ़ाने दें, बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखें। 📚🙏
@RajCMO@madandilawar
'कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते'
पानी में डूबते Yuvraj Mehta को एयरलिफ़्ट क्यों नहीं किया गया? सिस्टम से हताश शख़्स भावुक हो क्या बोला?
Watch the full video with @Abhinav_Pan
https://t.co/ayjxaDEoKN