कई जीत बाकी हैं,
कई हार बाकी हैं
अभी तो जिंदगी का सार बाकी है..
यहां से चले हैं नयी मज़िल के लिए,
ये तो एक पन्ना था,
अभी तो पुरी किताब बाकी है..
तजुर्बे ने एक बात सिखाई है...
किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर,
'ईश्वर' बैठा है, तू हिसाब ना कर...!!
सुनो लड़की
तुम मेरी वो ताक़त हों जो दिखाई
नही लेकिन जरूरत हर जगह
पड़ती हैं...
....
तुम के घड़ी में तुम नाव जैसी हो
और सुख के धडी में
सीतल हो तुम बहार हो तुम
.....
तुम जीवन के सफ़र का वो वाहन हो
जिसके बिना
सफ़र मुम्किन ही नही हां तुम ही जीव�� हो
तुम ही
बाहर जो तुम ही सारी शब्दो की मां हो....
#राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं
खुश रहो अहले वतन हो हम तो सफर करते हैं
हो ऐसे उजाड़े आशियाँ में #तिनके उड़ गये
बस्तियों तक आते आते रास्ते मुड़ गये
हम ठहर जायें जहाँ ��सको शहर कहते हैं
फ़िल्म-नमकीन
संगीत-आर डी बर्मन
गीत-गुलज़ार
स्वर-किशोर कुमार
#तृण #लेखनी
मनुष्य का जीवन बहुत छोटा है, रिर्टन टिकिट पक्का है और ���ास बात यह है कि तारीख निश्चित नहीं है इसलिए आपसी बैर या लड़ाई-झगड़े छोड़कर आपस में प्रेम बनाकर रहना चाहिए, क्योंकि अंत में हर व्यक्ति की तस्वीर ही फ्रेम में लटकती रह जाती है और हम देख नहीं पाएंगे।
मैं खड़ा बीच मझधार किनारे क्या कर लेंगे
मैने छोड़ी पतवार सहारे क्या कर लेंगे
तुम क़िस्मत-क़िस्मत करो जियो याचक बन कर
मैं चला क्षितिज के पार सितारे क्या कर लेंगे
तुम दिखलाते हो राह मुझे मंजिल की,
मैं आँखों से लाचार इशारे क्या कर लेंगे
हम ने जो कुछ भी कहा वही कर बैठे
जो सोचें सौ-सौ बार बेचारे क्��ा कर लेंगे
ना समझ कहोगे तुम मुझको मालूम है
ये फ़तवे हैं बेकार तुम्हारे क्या कर लेंगे
अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'
@BazmKavyamanch@pihusabjantihai दुनिया में उलझनों की भीड़ में,
हम दोनों लापता है जिंदगी..
तुझे ज़रूरत नहीं और
मेरी कोई और ज़रूरत नहीं...
हम अपनी जिम्मेदारी के आगे ,
अपने सपने हार जाते हैं जिंदगी ..!!
#बज़्म#जिंदगी
��गर ख़ुश रहना है तो मनुष्य को थोड़ा सा स्वार्थी हो जाना चाहिये
मैंने हमेशा दूसरों की मुस्कुराहट की परवाह की और यक़ीन मानिए
जब भी लोगों की ज़रूरत थी
ख़ुद को अकेला ही पाया...!!
ख़ैर...
उम्र बढ़ने के साथ मैं ये जान रहा हूँ कि तुम केवल उन लोगों के साथ रह सकते हो जो तुम्हें आज़ाद करते हों. जिनका प्यार सहन करने में जितना हल्का हो, महसूस करने में उतना ही मज़बूत.
आज की जिंदगी मुश्किल है, कड़वी भी. अगर प्रेम करने वाले ���ी नए बंधन तलाश लाएंगे तो कैसे होगा?
अगर मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, तुम्हारा दोस्त हूँ तो मुझे तुम्हारी ख़ुशी से प्रेम है, तुम्हारी आज़ादी से प्रेम है.
मैं तुम्हारे लिए वो साथी बनना चाहता हूँ जिसपर तुम हमेशा भरोसा कर सको. बस!
~एल्बर्ट कैमू
(अंग्रेज़ी से अनुवाद : दिव्यांशी)