। आर टी ई लागू होने के पूर्व नियुक्त* *शिक्षकों के टेट के अनिवार्यता के खिलाफ टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के निर्देश पर एक ज्ञापन माननीय सांसद श्री नारायण दास अहिरवार* *जी को दिनांक 16.7.26 को शाम 4बजे स्थान . सासंद कार्यालय @PMOIndia
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता ख़त्म करने के विषय में मा श्री सी आर पाटिल मंत्री भारत सरकार से अपने सहयोगी साथी श्री राम मूर्ति ठाकुर महासचिव,(झारखंड),श्री राहुल अंकुश गव्हाणे उपाध्यक्ष (गुजरात) एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी उपाध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) के साथ भेंट की ।
@TFI4India@UPPSS1921
#NoTetBeforeRteAct
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी रक्षा मन्त्री भारत सरकार से भेंट करके टेट के प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी ।माननीय जी को वार्ता के दौरान स्मरण कराया कि जब वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की 36 दिन की हड़ताल और 167 शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद भी जिस समस्या का समाधान नहीं हुआ था,उसका समाधान आपने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में किया था,जिसके चलते आज उत्तर प्रदेश के शिक्षक केन्द्र के समान वेतनमान लेते हैं ।
आज भी प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में संसद द्वारा क़ानून पारित करा कर,आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता सम्बन्धी अन्याय को समाप्त किया जा सकता है ।देश के शिक्षकों को आप पर पूर्ण विश्वास है ।मेरे साथ teachers federation of india के उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी भी वार्ता में उपस्थित रहे ।
#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु आरटीई में संशोधन सम्बन्धित ज्ञापन मा उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को दिया गया ।@brajeshpathakup
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏
माननीय राज्य मंत्री भारत सरकार श्री जितिन प्रसाद जी से अपने साथी पदाधिकारी श्री संजय सिंह जी महामन्त्री,श्री शिव शंकर पांडेय जी कोषाध्यक्ष एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी वरिष्ठ उपाध्यक्ष के साथ भैंट की ।मा मन्त्री जी से शिक्षकों से सम्बन्धित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई ।@JitinPrasada
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख सहित देश में लगभग 20 लाख ऐसे शिक्षक जो आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त हुए हैं उन पर टेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु 4 अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में हुई रैली के बाद आज टीएफआई के प्राधिनिधि मण्डल की पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी के साथ श्री पंकज चौधरी जी प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ प्र एवं मा वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार से विस्तृत वार्ता हुई ।सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के लाखों शिक्षकों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाने हेतु कानून बनाने की पूरी पैरवी की गई ।मा प्रदेश अध्यक्ष जी ने शीघ्र ही शीर्ष नेतृत्व से वार्ता एवं समाधान हेतु आश्वस्त किया ।प्रतिनिधि में टीएफआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी उपस्थित रहे ।
@jagdambikapalmp@mppchaudhary@narendramodi@AmitShah@TFI4India@UPPSS1921
Teachers Federation of India के बैनर तले देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लाखों शिक्षकों ने रामलीला मैदान दिल्ली पहुँच कर बता दिया कि शिक्षकों के साथ अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा ।रैली में उपस्थित सभी शिक्षकों ने साफ़ कहा कि भर्ती के समय सरकार द्वारा जो भी नियम और योग्यता निर्धारित की उसे अर्जित करने के बाद ही सभी शिक्षक नियुक्ति पाये है ।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपा जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा ।शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की गई इसलिए उसकी सेवा शर्तों की सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है ।फेडरेशन ने माँग की कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के retrospective effect को समाप्त करने के लिये क़ानून बनाए ।
रैली के मुख्य अतिथि मा सांसद श्री जगदंबिका पाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा हम देश के शिक्षकों की आबाज को देश यशस्वी प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाएँगे और शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जायेगा ।
हम देश भर से आये सभी साथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।
#NoTetBeforeRteAct
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