@Aaryastic @grok ये एक राजस्थान में मारवाड़ में रस्म है जिसमे दूल्हे की माँ दूल्हे को ये बताती है की मेरे दूध की लाज रखना ।
दूल्हा जब विवाह के लिए अपने ससुराल रवाना होता है उस समय माँ ये याद दिलाती है की मेरे दूध की लाज रखना
जब भाई ने साधु संतों से पूछा आप नेतृत्व करके रोड पर नहीं आ सकते…!
लेकिन साधु संत आ तो गए पर भाई को धोका दिया निर्लजों ने 💔🥹
भाई अपने पूरे परिवार के साथ भूख हड़ताल पर बैठा है केवल और केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए…!!!!
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव@Subhash_khara
भाई अभिमन्यु पुनिया ने 2 फ़रवरी को महापड़ाव से बोला था कि ये लाखों की भीड़ जयपुर CMO की और ले चलों वहाँ मुख्यमंत्री जी को घेर लेंगे तो नोटिफ़िकेशन तुरंत जारी कर देंगे…!!!
लेकिन विश्नोई समाज अहिंसा में विश्वास रखता हैं इसलिए @RajCMO जी कृपया #खेजड़ी_सरंक्षण_क़ानून_लागू_करो
विश्नोई समाज को मज़बूर मत कीजिये जल्द से जल्द पर्यावरण प्रेमियों की माँगो को स्वीकार करें…!!!
#WeWillSaveKhejari
हर बार हम ये गलती करते थे…
अकेले ही चल पड़ते थे….
लेकिन इस बार हमने सबका साथ लिया….
प्रत्येक समाज को साथ लिया….
हर संगठन को साथ लिया….
हर युवा आवाज़ को साथ लिया…
हर पर्यावरण प्रेमी को साथ लिया…
और ये मुहिम मुझे सफल होती नज़र आ रही है….!!!
#WeWillSaveKhejari
हनुमान जैसा दूजा कोई नहीं...
मेरे पुतले जलाओ, मुझे मेरे को लाखो गालियाँ दो,
हज़ारों बार नफ़रत करो, मेरे इरादों पर शक करो,
मेरी आवाज़ को दबाने की कोशिश करो लेकिन सच यही है कि मेरी कमाई कोई बंगला, कोई ठेका, कोई कुर्सी , सत्ता नहीं है सिर्फ आप लोग ही हो... 😐
बीकानेर में खेजड़ी बचाने के लिए आमजन व साधु-संत आमरण अनशन पर हैं, फिर भी सरकारी तंत्र मौन है ।
खेजड़ी राजस्थान की पहचान और मरुस्थल की जीवनरेखा है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि कटाई तुरंत रोकी जाए और राज्य वृक्ष के संरक्षण के लिए सख़्त क़ानून बनाया जाए। खेजड़ी बचेगी तभी राजस्थान बचेगा।
खेजड़ी और पर्यावरण बचाने की बीकानेर में चल रही लड़ाई में संत महापुरुष,महिलायें,बुजुर्ग अन्न जल त्यागकर आमरण अनशन पर बैठे है मेरा आप सभी से निवेदन है की इस लड़ाई में बढ़ चढ़कर सहयोग करें।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव#खेजड़ी_बचाओ
आज राजस्थान में खेजड़ी के संरक्षण का प्रश्न केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनभावनाओं और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है।
भाजपा सरकार सोलर प्लांट के नाम पर राजस्थान की जीवनदायिनी खेजड़ी सहित अन्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर रही है, जो अत्यंत चिंताजनक और अस्वीकार्य है।
बीकानेर में इसी अन्याय और अत्याचार के विरोध में लाखों लोग आवाज़ उठा रहे हैं और 363 संत आमरण अनशन पर हैं। यह आंदोलन विकास के विरोध का नहीं, बल्कि विनाशकारी और असंवेदनशील नीतियों के विरोध का प्रतीक है।
जब-जब सत्ता ने प्रकृति पर प्रहार किया है, राजस्थान की धरती ने कभी मौन नहीं साधा है। खेजड़ी बचाओ आंदोलन उसी जागरूक चेतना की निरंतरता है, जो हमें हमारी जिम्मेदारी का बोध कराता है।
आइए, हम सभी एकजुट होकर प्रकृति की रक्षा के लिए लड़ी जा रही इस न्यायपूर्ण लड़ाई का साथ दें।