भाड़ में जाए आसमानी किताब और अरफा खातून,
जाकिर नाइक जैसे मजहबी ठेकेदार
बच्चे की ज़िद के आगे बाप का प्यार...
जाती-मजहब कुछ नहीं होता इंसान सिर्फ इंसान रहे
जय श्रीकृष्ण 🚩🙏
❤️ रागिनी की पुकार DM बलिया तक पहुंची… और जिला प्रशासन ट्राइसाइकिल लेकर बिटिया के पास पहुंच गया।
जिस बच्ची ने कहा था “DM अंकल, मुझे साइकिल दिलवा दीजिए… मैं रोज स्कूल पढ़ने आऊंगी।”
आज उसके स्कूल जाने की राह थोड़ी आसान हो गई।
लेकिन यह मंज़िल नहीं, सिर्फ एक शुरुआत है।
एक्सीडेंट में खराब हुए उसके पैर का प्रॉपर इलाज अब सबसे जरूरी है, ताकि वह फिर से अपने पैरों पर खड़ी होकर चल सके और उसके सपनों की राह हमेशा के लिए आसान हो।
सबसे अच्छी बात यह रही कि मदद के बहुत से लोगों ने आगे आने की इच्छा जताई, लेकिन जिला प्रशासन की पहल का इंतजार किया गया और आज प्रशासन ने जिम्मेदारी निभाई। 🙏
रागिनी की मुस्कान बता रही है कि छोटी-सी मदद भी किसी के लिए कितनी बड़ी उम्मीद बन सकती है। ❤️
अब अगली उम्मीद रागिनी का बेहतर इलाज और उसके पैरों पर फिर से मजबूती से खड़ा होना।
@dmballia@myogiadityanath
टैलेंट किसी बड़े स्टेज का मोहताज नहीं होता, असली हुनर तो गांव की गलियों में खिलता है❤️
इन बच्चों के चेहरे की हंसी और जबरदस्त एनर्जी ने दिल जीत लिया है।
क्या आपको लगता है कि गांव के ऐसे छोटे कलाकारों को बड़ा प्लेटफार्म मिलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं👇
🥺 “DM अंकल @dmballia एक साइकिल दिलवा दीजिए ना… एक पैर से स्कूल जाते-जाते बहुत दर्द होता है। मैं पढ़ना चाहती हूं… स्कूल छोड़ना नहीं चाहती।” 💔
नन्ही रागिनी की इतनी-सी पुकार है… पैर ने साथ छोड़ा है, सपनों ने नहीं। 🙏
💔 जिस उम्र में बच्चों के पैरों में दौड़ने की ताकत होती है, उस उम्र में रागिनी एक पैर से स्कूल तक पहुंचने के लिए कूदती है…
बलिया की कक्षा-1 की नन्ही छात्रा रागिनी की कहानी पढ़कर शायद आपकी आंखें भी नम हो जाएं। 😢
हादसे में उसका एक पैर क्षतिग्रस्त हो गया… लेकिन उसका हौसला नहीं टूटा है, दिव्यांग होने के बावजूद पढ़ने की ऐसी ललक कि वह एक पैर से कूद-कूदकर रोज स्कूल जाती है।
मनियर के प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में पढ़ने वाली रागिनी ने DM अंकल से बेहद मासूमियत से गुहार लगाई है।
सोचिए… एक छोटी बच्ची की मांग कितनी छोटी है,
लेकिन उसके सपने कितने बड़े हैं।
उसे न खिलौना चाहिए, न कोई महंगी चीज…
उसे सिर्फ स्कूल पहुंचने के लिए एक सहारा चाहिए।
रागिनी के पैरों में भले ही मजबूरी है, लेकिन आंखों में सपने हैं और दिल में पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का जुनून। ❤️
अब सवाल सिर्फ इतना है - क्या रागिनी की यह मासूम पुकार DM अंकल तक पहुंचेगी?
अगर इस पोस्ट को शेयर करने से रागिनी की आवाज़ सही जगह तक पहुंच सकती है, तो इसे जरूर शेयर कीजिए।
शायद आपकी एक शेयर उसकी पढ़ाई की राह आसान कर दे। 🙏❤️
रागिनी को साइकिल मिलनी चाहिए… क्योंकि उसके सपनों को बैसाखी नहीं, बस एक मौका चाहिए। 🥺