स्व॒स्ति पन्था॒मनु॑ चरेम सूर्याचन्द्र॒मसा॑विव।
पुन॒र्दद॒ताघ्न॑ता जान॒ता सं ग॑मेमहि॥
“जैसे उतरती हैं रश्मियाँ
सूर्यमण्डल से,
विष्णुपद से गंगा
और शीतलता
उतरती है अंतरिक्ष से,
वैसे ही उतरती है ज्ञान-परम्परा
परमगुरु से शिष्यों तक।
हिरण्मय पात्र से अनावृत हुआ
सत्य आता है हम तक
गौरव की गैरिक आभा के रूप में।”
पूज्य @AvdheshanandG जी महाराज
@sevagya
प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक एवं विचारक, अयोध्या की सांस्कृतिक परंपरा के मर्मज्ञ और सिद्धपीठ श्रीहनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज को जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ
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कृति प्रकृति संस्कृति और स्वीकृति के संदर्भ में सर्वम���न्य मनीषि आचार्यप्रवर श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज श्री को उनके वर्धापन दिवस पर आत्मीय बधाई शुभेच्छा एवं मंगलाशासन।💐🙏
तुलसी सूर निराला के साहित्य स्यन्दिनी होते हैं.
तब लाखों में कहीं एक मिथिलेशनन्दिनी होते हैं..💐 #अयोध्या
सबसे कठिन प्र��्न वे थे जो पूछे नहीं गये
हमने अक्सर सुविधाओं को उत्तर मान लिया।
जीवन के दुस्साध्य गणित में शून्य हुए गहरे
और दशमलव दहाइयों पर देते थे पहरे।
भिन्न हुए जो भी अभिन्न थे, सारे जोड़ घटे
समझा था अविभाज्य जिन्हें वे सब विभक्त ठहरे।
मान बदलते अंकों वाली एक पहेली थी
जो लघुतर थे हमने उन्हें महत्तर मान लिया॥
प्रेमकथाएँ दुर्घटनाओं का विज्ञापन थीं
नैतिकताएँ अपनी भूलों का सत्यापन थीं
फिर भी हम���े लक्ष्य न बदला, सारी यात्राएँ
आतुर और भ्रान्त गतियों का सहज समापन थीं।
कितना चले कहाँ तक पहुँचे अब यह कौन कहे
थके पगों ने हर सीढ़ी को ठोकर मान लिया॥
गीतों में बन्धक थे सारे शब्द उजालों के
और कथाओं में थे तीर-धनुष रखवालों के।
हिरनों को छल सिखलाती थी स्वर्णमयी नगरी
और वनों में थे उत्तर नागरिक सवालों के।
वर्तमान से लज्जित हमने इतिहासों से दूर
अनदेखे भविष्य को सबसे बढ़कर मान लिया॥
मूलमन्त्र अगली पीढ़ी थी, अब हैं अक्षत-फूल
अँजुरी भर सौरभ सहेजते, रोयाँ-रोयाँ शूल।
अपनी-अपनी भूख सँभाले, भिक्षापात्र लिए
द्वार-द्वार फिरते हैं, खोकर अपना डमरु-त्रिशूल।
पूजक पीढ़ी शिखरों पर शिव को पूजती ���ही
भूतल पर रमते शंकर को कंकर मान लिया॥
@Ramayatan_
दो दिन से एक वीडियो लखनऊ से लेकर दिल्ली के सत्ता शिखरों तक घूम रहा है। यह दशकों तक "अयोध्या से चिढ़ने वाली दिल्ली' में आयोजित एक पीड़ाजनक व्याख्यान का है। अयोध्या के प्रतिष्ठित और लोकप्रिय आचार्य मिथिलेशनंदिनी��रण बोल रहे हैं। हम सबके सुनने योग्य स्वर...
https://t.co/2BBZVInhvU
महादेव भारत की स्मृतियों में रक्त की तरह समाए हुए हैं। 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों और पशुपतिनाथ से लेकर कैलाश मानसरोवर तक। कितने नाम और कितने रूप में वे मनोहारी हैें।
विदिशा जिले के उदयपुर में महाशिवरात्रि का एक दिन इसे एक तीर्थ जैसा बना देता है। जय नीलकंठेश्वर...
@CMMadhyaPradesh
हमारी प्राचीन परंपरा में शोध का उद्देश्य एकल लाभ नहीं, बल्कि समाज आधारित रहा है..
आज मध्यप्रदेश विज्ञान ए���ं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल में दत्तोपंत ठें���ड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय शोधार्थी समागम’ का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर @RSSorg के अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य एवं मार्गदर्शक आदरणीय भाईसाहब श्री सुरेश सोनी जी का पाथेय तथा सिद्धपीठ श्री हनुमन्निवास के पीठाधीश्वर श्री आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी का प्रेरक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
साहित्य के महाकुंभ 'साहित्य आजतक लखनऊ' में आपका स्वागत है. जहां होगा शब्दों का उत्सव, यहां मिलेंगे आपके पसंदीदा लेखक, शायर, कवि और कलाकार एक मंच पर. @Ramayatan_
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जगह: अंबेडकर मेमोरियल पार्क, गोमती नगर, लखनऊ
तारीख: 14-15 फरवरी 2026
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