विद्या_संबल_योजना बंद करो,बेरोजगारों से खिलवाड़ मत करो!💔
B.Ed/BSTCधारकों के भविष्य का फैसला 10वीं-12वींके नंबरों पर क्यों?कोविड में मिले 95%+अंकों से वास्तविक मेरिट और पुराने मेहनती छात्र बाहर हो रहे हैं।संविदा का झुनझुना बंद हो,सरकार तुरंत नियमित स्थायी भर्ती निकाले!
@RajCMO
विद्या_संबल_योजना बंद करो,बेरोजगारों से खिलवाड़ मत करो!💔
B.Ed/BSTCधारकों के भविष्य का फैसला 10वीं-12वींके नंबरों पर क्यों?कोविड में मिले 95%+अंकों से वास्तविक मेरिट और पुराने मेहनती छात्र बाहर हो रहे हैं।संविदा का झुनझुना बंद हो,सरकार तुरंत नियमित स्थायी भर्ती निकाले!
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विद्या_संबल_योजना बंद करो,बेरोजगारों से खिलवाड़ मत करो!💔
B.Ed/BSTCधारकों के भविष्य का फैसला 10वीं-12वींके नंबरों पर क्यों?कोविड में मिले 95%+अंकों से वास्तविक मेरिट और पुराने मेहनती छात्र बाहर हो रहे हैं।संविदा का झुनझुना बंद हो,सरकार तुरंत नियमित स्थायी भर्ती निकाले!
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लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चौंकाने वाला खुलासा किया।
राहुल गांधी 🔥— मुझे एक सांसद ने बताया कि राहुल जी अयोध्या में तीन बार सर्वे हुआ था ,
क्यूंकि नरेंद्र मोदी जी वाराणसी से नहीं अयोध्या से लड़ना चाहते थे।
उनके सर्वेयर तीन बार सर्वे करने आए और नरेंद्र मोदी ख़ुद आए उसके बाद उनके सर्वेयर ने कह दिया कि,
नरेंद्र मोदी जी अगर आप अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं तो हार जाएंगे और आपका राजनीतिक करियर अयोध्या में खत्म हो जाएगा।
वाराणसी में हम लोगों ने एक दो छोटी गलती कर दी वरना हम लोग वाराणसी में ही मोदी जी को हरा देते।
जंतर मंतर से सोनम वांगचुक को उठाने के बाद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग, सड़कों पर।
कितना अच्छा होता अगर देश के PM या शिक्षा मंत्री जंतर मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मिलकर उनका hunger strike रुकवाते।
बधाई हो बेटा! तुम्हारी कड़ी मेहनत और अटूट लगन का फल आज तुम्हें पटवारी के रूप में मिल गया। हमें तुम पर गर्व है! यह तुम्हारी योग्यता और संघर्ष की जीत है। भगवान तुम्हारे उज्जवल भविष्य को और रोशन करें। ✨
#congratulations
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
जयपुर में ही छपा था #NEET का पेपर। गैस पेपर में हूबहू छपे प्रश्नों से पेपर माफियाओं के तार जुड़े है ? NSUI नीट के छात्रों के साथ खड़ी है अगर न्याय नहीं मिला तो सड़कें सैलाब बन जाएगी। #StudentPower#JusticeForNeetStudents
नरेंद्र मोदी ने अभी शपथ भी नहीं ली है और NEET परीक्षा में हुई धांधली ने 24 लाख से अधिक स्टूडेंट्स और उनके परिवारों को तोड़ दिया है।
एक ही एग्जाम सेंटर से 6 छात्र मैक्सिमम मार्क्स के साथ टॉप कर जाते हैं, कितनों को ऐसे मार्क्स मिलते हैं जो टेक्निकली संभव ही नहीं है, लेकिन सरकार लगातार पेपर लीक की संभावना को नकार रही है।
शिक्षा माफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से चल रहे इस ‘पेपर लीक उद्योग’ से निपटने के लिए ही कांग्रेस ने एक रोबस्ट प्लान बनाया था। हमने अपने मैनिफेस्टो में कानून बना कर छात्रों को ‘पेपर लीक से मुक्ति’ दिलाने का संकल्प लिया था।
आज मैं देश के सभी स्टूडेंट्स को विश्वास दिलाता हूं कि मैं संसद में आपकी आवाज़ बन कर आपके भविष्य से जुड़े मुद्दों को मज़बूती से उठाऊंगा।
युवाओं ने INDIA पर भरोसा जताया है - INDIA उनकी आवाज़ को दबने नहीं देगा।
ED-CBI भेजकर इस देश के व्यापारियों से चंदा वसूलने और विपक्ष को जेल भेजने में व्यस्त प्रधानमंत्री जी से एक निवेदन -
प्रधानमंत्री जी! इस देश के करोड़ों बच्चे दिन रात मेहनत करके, तैयारी करके परीक्षा देते हैं। ये पेपर लीक का धंधा बंद कराइये।
देश की कमान पिछले 12 वर्षों से जिस प्रधानमंत्री के हाथों में है, यदि हर संकट के समय स्वयं द्वारा उनकी सरकार की नाकामियों को छुपाते हुए जवाबदेही से बचने के लिए राष्ट्रभक्ति के नाम पर बार-बार 'इमोशनल' शोषणकारी नीति अपनाकर जनता पर ही जिम्मेदारी और बोझ डालकर उपदेश देने लगे कभी खाने-पीने की चीजें कम करने की सलाह, कभी सोना न खरीदने की बात, कभी विदेश यात्रा से बचने का संदेश, कभी पेट्रोल-डीजल व गैस का कम उपयोग करने का आग्रह, तो कभी किसानों को खाद कम खरीदने और लोगों को घरों से बाहर निकलने तक की नसीहत तो यह स्वाभाविक है कि देश की आर्थिक और वैश्विक स्थिति किस विकट हालात में हैं। आखिर देश किस दिशा में खड़ा है, इसका अंदाज़ा जनता स्वयं लगा सकती हैं।
वैसे भी देश के प्रधानमंत्री स्वयं कई बार कह चुके हैं कि “मैं फकीर आदमी हूँ, झोला लेकर चला जाऊँगा” और चुनावी भाषणों में “मंगलसूत्र छीनने” जैसे बयान भी दे चुके हैं। ऐसे में आज की परिस्थितियों और लगातार दिए जा रहे त्याग व संयम के उपदेशों को देखकर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या देश को उन्हीं कथनों की ओर धीरे-धीरे अग्रसर किया जा रहा है?
जिस प्रधानमंत्री ने देश को “अच्छे दिन” और “विकसित भारत” का सपना दिखाया था, आज उन्हीं के 12 साल के कार्यकाल के बाद जनता यह सुनने को मजबूर है कि क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं खरीदना चाहिए, कहाँ जाना चाहिए और कहाँ नहीं जाना चाहिए। हर संकट में जिम्मेदारी जनता पर डाल देना और स्वयं जवाबदेही से बच निकलना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है।
वर्तमान हालात के दौर से देश में महंगाई पर नियंत्रण नहीं, रोजगार की गारंटी नहीं, किसानों को राहत नहीं, मध्यम वर्ग को सुरक्षा नहीं और ऊपर से त्याग एवं संयम का प्रवचन। यह स्थिति एक कमजोर नेतृत्व और आर्थिक नीतियों की विफलता का प्रमाण है।
देश जनता की उम्मीदों, विश्वास और मजबूत आर्थिक नीतियों पर चलता है। केवल भाषणों, नारों और इवेंट मैनेजमेंट से नहीं चलता हैं। देश को दिखावे की नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व, ठोस नीति-निर्धारण और जवाबदेही आवश्यकता हैं।
#PMIsCompromised
NEET 2024 के बाद अब NEET 2026 का भी पेपर परीक्षा से पहले लीक होना और सैंपल पेपर के नाम पर बिकना बेहद गंभीर एवं युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
परीक्षा से पहले "गैस पेपर" के नाम पर हूबहू पेपर आउट होने, 42 घंटे पहले व्हाट्सएप पर आने और देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को पकड़ना इस बात का संकेत है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार संकट में है। करोड़ों विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक और गड़बड़ियां युवाओं का भरोसा तोड़ देती हैं।
मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्यों में आखिर ऐसी कौन सी व्यवस्था चल रही है जहां एक के बाद एक भर्ती परीक्षाएं और राष्ट्रीय एग्जाम सवालों के घेरे में आ रहे हैं?
पेपर लीक की ख़बरों ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच बेहद जरूरी है, ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
#NEET
NEET 2024 के बाद अब NEET 2026 को लेकर भी पेपर लीक और “गैस पेपर” बेचने जैसे गंभीर आरोप सामने आना बेहद चिंताजनक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले व्हाट्सएप पर पेपर जैसी सामग्री वायरल हुई। दावा है कि 720 में से लगभग 600 नंबर के सवाल मैच हुए, जबकि देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या व्यवस्था बन गई है कि बार-बार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं संदेह के घेरे में आ रही हैं? करोड़ों युवा दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक और गड़बड़ियों की खबरें उनके भरोसे और भविष्य दोनों को चोट पहुंचाती हैं।
यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और युवाओं के सपनों से जुड़ा मामला है।
सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच करनी चाहिए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित हो। @EduMinOfIndia
#BREAKING
NEET UG को लेकर राजस्थान SOG का बड़ा खुलासा
▪️सैंपल पेपर के 150 प्रश्न असली पेपर में आए- राजस्थान SOG
▪️केरल से सीकर आया था सैंपल पेपर- राजस्थान SOG
▪️सैंपल पेपर लाखों रुपए में बेचा गया- SOG
#ATVideo#NEET#NEETUG#Kerala#Sikar | @NehaBatham03@sharatjpr
12 साल सत्ता में रहने के बाद अगर प्रधानमंत्री जनता से यह कहने लगें कि सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाने-पीने की चीज़ें कम इस्तेमाल करो तो यह किसी दूरदर्शी नेतृत्व का संदेश नहीं, बल्कि आर्थिक विफलता का सार्वजनिक स्वीकार है।
जिस सरकार ने “अच्छे दिन” का सपना दिखाया था, आज वही सरकार लोगों को अपनी ज़रूरतें सीमित करने की सलाह दे रही है। महंगाई पर नियंत्रण नहीं, रोजगार का भरोसा नहीं, किसानों को राहत नहीं, मध्यम वर्ग को सुरक्षा नहीं और ऊपर से त्याग का प्रवचन।
हर संकट में सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है। कभी कम खर्च करो, कभी कम यात्रा करो, कभी कम उपभोग करो। सवाल यह है कि आखिर सरकार की जवाबदेही क्या है?
देश ऐसे नहीं चलता। देश जनता की उम्मीदों पर चलता है, डर और समझौतों पर नहीं। अब देश को भाषणों और इवेंट मैनेजमेंट नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व, ठोस आर्थिक नीति और जवाबदेही की जरूरत है।
#PMIsCompromised
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!