अगर मारवाड़ी बोली को राजस्थानी भाषा के रूप में पूरे राजस्थान पर थोपना है तो झुन्झुनू , उतरी पूर्वी चूरू , उतरी पूर्वी हनुमानगढ़ , गंगानगर, नीम का थाना , पूर्वी राजस्थान को को हरियाणा में शामिल कर दिया जाए या एक अलग राज्य बना दिया , इन जिलों की संस्कृति वैसे भी हरियाणा से ज्यादा रिलेटेड है हम पर राजस्थानी भाषा ना थोपी जाए
हाड़ौती , ओर वागड़ क्षेत्र वाला अपना खुद हिसाब से देख ले
राजस्थानी भाषा के नाम पर डिंगल शैली वाली मारवाड़ी पूरे राजस्थान पर थोपना अत्यन्त हास्यास्पद है ।
जब प्राचीन समय से राजस्थान में विभिन्न क्षेत्र में भिन्न भिन्न बोलियां रही है तो वर्तमान में किस आधार पर 15% जनसंख्या की भाषा 85% पर थोपना गलत है।
#नहीं_चाहिए_राजस्थानी
पश्चिम राजस्थान के 5 जिला की बोली को पूरे प्रदेश पर जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए।”
जब 5 कोश में ही बोली बदल जाती है तो ये मारवाड़ी पुरे राजस्थान की भाषा नहीं हो सकती...
राजस्थान का राज्य नृत्य घूमर कहां किया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य गीत केसरिया बालम कहां गाया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी कहां पाया जाता है- मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा कहां पाया जाता है- मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पशु चिंकारा कहां पाया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण कहां पाया जाता है - मारवाड़ में।
इतना सब कुछ होने के बाद भी हम चुप रहे हैं।
लेकिन अब ये जो राजस्थानी के नाम पर मारवाड़ी भाषा थोपने का जो प्रयास किया जा रहा है हम बिल्कुल भी चुप नहीं रहेंगे।
मारवाड़ पूरा राजस्थान नहीं है जो हम चुपचाप बैठे रहेंगे।
#नहीं_चाहिए_राजस्थानी_भाषा
@AmitYaddav@RajendraMeena50@hemlatajk@vannumeena0@Radhemahwa@1K_Nazar@Nevanshimeena@HansrajMeena@8pm8cm@Harshitashingh@manojmeena
जिस भाषा को आप राजस्थानी भाषा बोल रहे है और सम्पूर्ण राजस्थान की मातृभाषा बता रहे है वो हमारे पूर्वी राजस्थान में क्यों नहीं बोली और समझी जाती??
जो भाषा हमारे यहाँ बोली और समझी ही नहीं जाती उसकों कैसे हमारी मातृभाषा कहा जा सकता है?
@arvindchotia जी आपने जिस भाषा में लिखा है वो हमारे यहाँ ना बोली जाती है ना लिखी जाती है तो फिर ये कैसे हमारी मातृभाषा हुई?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन कोर्ट में कमजोर पैरवी के कारण ही संभवतया ये आदेश आया है!
मेरे राजस्थानी भाषा के मुद्दे पर पोस्ट करने मात्र से कुछ लोगों के जाड़ा चढ़ रहा है।
सोचिए अगर सब ग़ैर मारवाड़ के लोग जाग गए तो इनकी हालत कैसी होगी?
क्योंकि मेरी पोस्ट के नीचे सबसे ज़्यादा कमेंट राजस्थानी भाषा के समर्थक कर रहे हैं!!
जबकि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया है फिर भी वो लोग लिख रहे हैं,
हमें दबाने के लिए उल्टे सीधे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं!
दूसरी तरफ़ जिनकों लिखना चाहिए वो चुप्पी साधे हुए हैं!😌
मैं मारवाड़ क्षेत्र से हूँ।
लेकिन मारवाड़ी बोली खुद मारवाड़ के हर जिले में अलग-अलग रूप में बोली जाती है।
पाली की मारवाड़ी अलग है।
जोधपुर की मारवाड़ी अलग है।
बाड़मेर की मारवाड़ी अलग है।
जालौर की मारवाड़ी अलग है।
जैसलमेर की मारवाड़ी अलग है।
जब स्वयं मारवाड़ी के भीतर इतना भाषाई विविधता है, तब पूरे राजस्थान की अनेक बोलियों और भाषाओं पर केवल “राजस्थानी” के नाम पर एक भाषा थोपना उचित नहीं माना जा सकता।
मारवाड़ी, मेवाड़ी, हाड़ौती, शेखावाटी, मेवाती, ढूंढाड़ी, मालवी जैसी अनेक बोलियाँ और भाषाई स्वरूप यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर हैं।
किसी एक बोली को पूरे राजस्थान की प्रतिनिधि भाषा घोषित करने से पहले सभी क्षेत्रों और भाषाई समुदायों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
@BhajanlalBjp@DrKirodilalBJP
राजस्थान का राज्य नृत्य घूमर कहां किया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य गीत केसरिया बालम कहां गाया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी कहां पाया जाता है- मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा कहां पाया जाता है- मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पशु चिंकारा कहां पाया जाता है - मारवाड़ में।
राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण कहां पाया जाता है - मारवाड़ में।
इतना सब कुछ होने के बाद भी हम चुप रहे हैं।
लेकिन अब ये जो राजस्थानी के नाम पर मारवाड़ी भाषा थोपने का जो प्रयास किया जा रहा है हम बिल्कुल भी चुप नहीं रहेंगे।
मारवाड़ पूरा राजस्थान नहीं है जो हम चुपचाप बैठे रहेंगे।
#नहीं_चाहिए_राजस्थानी_भाषा
@AmitYaddav@RajendraMeena50@hemlatajk@vannumeena0@Radhemahwa@1K_Nazar@Nevanshimeena
राजस्थानी भाषा को यदि राजभाषा का दर्जा मिलेगा तो इसकी लिपि क्या होगी..?
इसमें मुख्य रूप से मारवाड़ी ही आएगी...
जो पूर्वी राजस्थान और हाड़ौती वालो की समझ से परे हैं।
#राजस्थानी_भाषा_नहीं_चाहिए#नहीं_चाहिए_राजस्थानी_भाषा
भारत के बैंकिंग इतिहास का सबसे अधिक ₹2 लाख करोड़ का ऐतिहासिक नेट प्रॉफिट सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि देशभर के 8 लाख सार्वजनिक क्षेत्र बैंक कर्मचारियों की ईमानदारी, समर्पण, त्याग और अथक मेहनत का परिणाम है।
जब मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर है, तो कर्मचारियों की हिस्सेदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर होना चाहिए। अब समय आ गया है कि Scale आधारित PLI नहीं बल्कि Performance Linked Incentive का वास्तविक और वाज़िब हिस्सा बैंक कर्मियों को मिले।
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले हाथों को सिर्फ तालियां नहीं न्यायसंगत भागीदारी भी चाहिए।
सम्मानजनक PLI देश के 8 लाख बैंक कर्मचारियों का वाज़िब हक़ है।
@SunilLa58275710@ramshankarsingh@AshishTekale_@MdAliHa46474046@manish3065365@ManishkBarnwal9
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As part of All India State Bank of India Staff Federation agitational programme, a memorandum was submitted today to Sri Kesineni Sivanath (Chinni), Hon’ble Member of Parliament from Vijayawada.
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