रणकपुर के जंगल में राजराणा झाला देदा की छतरी बनी हुई है। यह छतरी 1611 ईस्वी के रणकपुर युद्ध में झाला देदा के बलिदान की यादगार के रूप में बनाई गई थी। इसमें सती स्तंभ के साथ शिलालेख भी लगा हुआ है।
#ranakpurbattle#ranakpuryuddh#ranapur#rameshsharma
रींगस के भेरूजी मंदिर के बाहर सती माता की एक छतरी है जिसके शिलालेख पर 1669 ईस्वी लिखी हुई है। बताया जाता है कि 1669 ईस्वी में सती माता अपनी शादी के बाद यहाँ धोक देने आई थी। यहाँ हुए एक युद्ध में उनके पति का देहांत हो गया था उसके पश्चात वो सती हो गई थी।
#reengusbheruji
सीकर जिले में अरावली की तलहटी में स्थित रैवासा का श्री दिगंबर जैन भव्योदय अतिशय क्षेत्र अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और धार्��िक आस्था के लिए प्रसिद्ध है। करीब 2017-18 के आसपास इसका स्वरूप सफेद-गुलाबी रंग और बारीक नक्काशी से सजा हुआ था
#raiwasa #rewasa #digambar #tourism
भीलवाड़ा के कारोई को ज्योतिष ��गरी के नाम से जाना जाता है। इस नगरी के पास हाईवे पर मौजूद 28 फीट लंबाई की लेटे सांवरिया हनुमान जी की प्रतिमा को राजस्थान की सबसे बड़ी एक ही पत्थर से बनी हुई शयन मुद्रा वाली प्रतिमाओं में गिना जाता है।
#sanwariyahanumanji #letehanumanji #rameshsharma
आमेर की मावठा झील के बीचों-बीच एक छोटा सा टापू है, जिस पर प्रसिद्ध केसर क्यारी उद्��ान बना हुआ है। मिर्जा राजा जय सिंह प्रथम ने इसका निर्माण करवाया था। उन्होंने कश्मीर से केसर के पौधे मंगवाकर यहाँ लगाने का प्रयास भी किया था।
#kesarkyari #mavtha #amerfort #amberfort #rameshsharma
भारत में सबसे ज्यादा नमक पैदा करने वाली खारे पानी की सांभर झील के बीच में यह सिद्ध शक्ति पीठ मौजूद है जिसे शाकंभरी के अलावा सांभवी और समराय माता के नाम से भी जाना जाता है। झील के बीच में एक पहाड़ी है, जिसके एक कोने पर माता का मंदिर बना हुआ है।
#shakambhari#sambhar#rameshsharma
गढ़ स्कूल का ये मंदिर और कुआँ आज भी साफ-साफ याद है। इसके आसपास और ऊपर बुर्ज के पास कक्षाएं चला करती थी। कुछ साल पहले शायद 2017 में जब इस स्कूल में जाना हुआ तब इस कुएँ और इस मंदिर की तस्वीर खींची थी। क्या आपको भी ये सब याद है?
#garhschool#shrimadhopur#smprcity
श्रीमाधोपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित नरसिंह दास कयाल धर्मशाला कम खर्च में ठहरने क��� लिए एक उपयोगी जगह है। यहाँ सामान्य कमरे, बड़े हॉल, पानी, बिजली, टॉयलेट-बाथरूम और पार्किंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
#kayaldharamshala #shrimadhopur #smprcity
बचपन बेफिक्री का नाम है जिसमें कोई जिम्मेदारी नहीं, कोई चिंता नहीं, सिर्फ आनंद ही आनंद होना चाहिए। कई बच्चों को बचपन के आनंद का पता ही नहीं होता क्योंकि ये बचपन में ही बड़े होकर जिम्मेदारियों का बोझ उठाने लग जाते हैं। काश.. सबको बचपन क��� आनंद मिले।
#bachpan #childhood #smprcity
कई दशकों से इस स्कूल का गेट इसी तरीके से खड़ा है। किसी समय यह स्कूल पढ़ाई के साथ-साथ खेल का मैदान भी था। यहां पर शाम को बच्चे कई तरह के खेल खेला करते थे। कोई दौड़ लगाता था, कोई फुटबॉल खेलता था, कोई क्रिकेट खेलता था, कोई टहलता था।
#shrimadhopur#smprcity
पहले इस जगह पर केवल संस्कृत स्कूल हुआ करता था जिसमें कई लोगों ने पढ़ाई की है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए ये स्कूल काफी बढ़िया ऑप्शन था। क्या आपने इस स्कूल में पढ़ाई की है।
#sanskritschool#school#shrimadhopur#smprcity#RameshSharma
किसी समय पर इस जगह पर एक मेला लगा करता था। इस जगह पर श्रीमाधोपुर के दो प्रमुख प्राचीन मंदिर है। दोनों ही हनुमान जी क�� हैं। मेले में काफी चहल पहल रहा करती थी। यहां पर झूले लगते थे। सब लोग इंजॉय करते थे। क्या बता सकते हैं यह जगह कौन सी है?
#shrimadhopur #smprcity
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के पौत्र महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने सन् 1799 में हवा महल का निर्माण करवाया था। 953 झरोखों वाले इस महल की डिजाइन उस समय के प्रसिद्ध वास्तुकार ल��लचंद उस्ताद ने बनाई थी। क्या आपने हवामहल देखा है?
#hawamahal #windpalace #jaipur #smprcity
श्रीमाधोपुर के चौपड़ बाजार में मौजूद यह प्रतिमा श्रीमाधोपुर नगरपालिका के भूतपूर्व अध्यक्ष श्रीमान श्याम दास महंत की है। क्या आप कभी इस जगह पर गए हैं
#shrimadhopur#nagarpalika#smprcity
1938 में व्यायामशाला से शुरू होकर 1948 में हनुमान जयंती के दिन एक पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद महावीर दल हनुमान मंदिर बना। 1955 में यहाँ पर कुएँ के निकट एक पवन चक्की की स्थापना हुई। आज इस मंदिर को एक नए रूप में देखा।
#hanumanji#balaji#smprcity