बहन जी, आकाश आनंद, सतीश चंद्र मिश्रा और विश्वनाथ पाल की चौकड़ी यूपी 2027 में बसपा की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
लेकिन इन सभी की भूमिका सिर्फ चुनाव लड़वाने की नहीं बल्कि खुद चुनाव लड़ने की भी होनी चाहिए।
@bspindia
जिस दिन मौजूदा सरकार बदलेगी उस दिन भ्रष्टाचार की इतनी परतें खुलेंगी कि उसको छुपाने के लिए कोई भी पर्दा कम पड़ जाएगा। आज भले ही फाइलों को दबा दिया जाए, लेकिन याद रहे कि वक्त बदलते देर नहीं लगती।
@sanket अगर सरकार कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों की होती तो अब तक हाहाकार मच चुका होता।
मीडिया दिन–रात प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्रियों तक के इस्तीफे की मुहिम चला रहा होता।
लेकिन अभी सब कुछ सामान्य है।
केंद्र सहित ज्यादातर राज्यों में अब एक ही पार्टी की सरकार है।
ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का बुलंद वादा आज फाइलों में दबा क्यों दिखता है?
भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा सरकार की कथनी और करनी का अंतर अब साफ़ दिख रहा है।
इस बढ़ते भ्रष्टाचार पर सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी भाजपा इन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाएगी नहीं।
क्योंकि अब मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को पद से हटाने का रिवाज समाप्त हो चुका है।
@JyotiDevSpeaks बहन जी की पहली प्राथमिकता मुख्यमंत्री बनने की होगी। जो भी गठबंधन उन्हें मुख्यमंत्री बनाएगा बहन जी उसके साथ जाएंगी।
जो अब तक बहन जी को यूपी विधानसभा चुनाव में कुछ समझ ही नही रहे थे वो अब इस तरह का पोल कर रहे हैं।
मतलब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में बेचैनी बढ़ी हुई है।
सपनों को संवारने निकले थे जो घर से,
व्यवस्था की चिता पर वो जिंदा जल गए।
लखनऊ अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत प्रशासन और सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है।
रिहायशी इलाकों में बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे इन व्यावसायिक केंद्रों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती।
ब्यूरोक्रेसी को आजतक बहन जी से बेहतर कोई दूसरा कंट्रोल नहीं कर पाया है।
यही वजह है कि उनके शासन के दौरान अपराध गुंडागर्दी, और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी थी।
आज ब्यूरोक्रेसी कंट्रोल के बाहर हो चुकी है।
इसलिए यूपी के लोग आज फिर से बहन जी के शासन को याद कर रहे हैं।
@bspindia
माननीय उप मुख्यमंत्री जी।
इन आंसुओं का उन भ्रष्ट अधिकारियों से हिसाब जरूर लीजिएगा। जिन्होंने दर्जन भर से ज्यादा परिवारों के घरों के बच्चों की जान ली है।
#Lucknow
@BhimArmyChief लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदनाएं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिल्डिंग्स को बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के चलने की इजाजत किसने दी?
भ्रष्ट तंत्र और ढुलमुल रवैये ने आज फिर कई मासूमों की जिंदगी निगल ली।
इस घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
@RahulGandhi लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर शहर के कमर्शियल और रिहायशी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है?
प्रशासन को सिर्फ जांच का नाटक करने के बजाय दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। #LucknowFireAccident
लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर शहर के कमर्शियल और रिहायशी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है?
प्रशासन को सिर्फ जांच का नाटक करने के बजाय दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। #LucknowFireAccident
आज लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई।
इस आग से कितना नुकसान हुआ इसकी जानकारी बाद में मिलेगी। लेकिन इतना तय हैं कि सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है।और ऐसा बताया जा रहा है कि दमकल भी सही समय पर नहीं पहुंची।