श्रीहरि के दिव्य अवतार भगवान श्री वराह की पावन जयंती पर समस्त श्रद्धालुओं एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
भगवान श्री वराह धर्म की स्थापना, सृष्टि के संरक्षण एवं अधर्म पर धर्म की विजय के शाश्वत प्रतीक हैं, उनकी कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं मंगल का संचार हो, यही प्रार्थना है।
कभी कभी मोदी जी भी मजे लेते हैं लगता है...
जिनपिंग-पुतिन सब से चाय की केतली टाइप के बर्तन से पौधों में पानी डलवा दिया..
चायवाले पीएम के साथ चायवाले राष्ट्रपति 😅😅
सर्व धर्म समभाव
सर्व पंथ समभाव
हमारे पूर्वज एक हैं
गंगा जमुनी तहजीब
हमारा डीएनए एक है
गुरुकुल मदरसा एक समान
सनातन था सनातन है सनातन रहेगा
वेद पुराण बाइबिल कुरान एक समान
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
कोई और जुमला है तो अवश्य लिखिए
अजीत भारती अग्रिम जमानत याचिका रद्द!! स्वतंत्र भारद्वाज 14 दिन के न्यायिक हिरासत में!! फूफा ताली बजा रहें और सवर्ण थाली!! निशु आजाद के घर *नकली पत्थरबाजी*..संजय आजाद का खुला चैलेंज पर कार्यवाही निल बट्टे सन्नाटा!!
ये सब ठीक हो सकता है जब कारवाही उन "किताबो" पर होगी जो बचपन से इन्हें पढ़ाई जाती है
प्रॉब्लम इनकी किताबो में और मदरसा सिलेबस में है
यही आगे जाकर छांगुर बाबा और Burhan Wani बनते हैं
मुगलों का मदरसा और अंग्रेजों का कॉन्वेंट-मांटेसरी कब बंद होगा?
समान शिक्षा (एक देश-एक शिक्षा बोर्ड-एक पाठ्यक्रम) लागू करने में क्या समस्या है?
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
कश्मीर बन रहा बिहार, मस्जिदों के स्पीकर से इलाका छोड़ने के लिए हिंदुओं पर बनाया जा रहा दबाव। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कर रहे हैं हिंदुओं पर हमले। बक्सर का है मामला।
🚨 बरगदिया गाँव में भूख से जूझता एक ब्राह्मण परिवार …
सबसे दर्दनाक बात ये है कि …
बच्चों की थाली में महीनों से दाल-सब्जी नहीं, सिर्फ सूखे चावल, नमक और थोड़ा तेल है। 😢
अर्पिता पांडे नाम की यह महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ ऐसी गरीबी में जी रही हैं, जिसे “गरीब” कहना भी कम होगा। यह परिवार महा-गरीब है। घर का हाल इतना बुरा है कि दीवारें टूट-फूट चुकी हैं, छत कहीं-कहीं धँसी हुई है और पूरा मकान खंडहर जैसा लगता है।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि इनके तीन छोटे-छोटे बच्चे आज नहीं, बल्कि कई महीनों से भूखे पेट सो रहे हैं। उनका रोजाना का भोजन सिर्फ सूखे चावल में नमक और थोड़ा तेल मिलाकर बनाया जाता है। न दाल, न सब्जी, न दूध… सिर्फ वही एक थाली जो भूख मिटाने के बजाय सिर्फ जिंदा रहने के लिए काफी है।
जब अर्पिता पांडे ने रो-रोकर अपना दुख सुनाया तो रूहें थर्रा गई 🥹💔
अयोध्या के बरगदिया गाँव का यह परिवार अब आपकी नजर में है। अगर आप मदद करना चाहते हैं, तो आगे बढ़कर हाथ बढ़ाएँ।
क्योंकि भूख से लड़ते इन मासूम चेहरों को देखने के बाद, चुप रहना संभव नहीं।
सूर्यकुमार यादव की यह तस्वीर उनके बड़े दिल और सरल स्वभाव की झलक दिखाती है।
दरअसल सूर्यकुमार यादव का एक वीडियो वॉयरल है जिसमें वह एक साधु को पैसे देते हैं और उनके साथ फोटो भी खिंचाते हैं।
एक साधु के सामने सूर्य कुमार यादव ने जिस सम्मान और सहजता का परिचय दिया, वह काबिल ए तारीफ है।
सिर्फ पैसे देना ही नहीं बल्कि साधु के साथ तस्वीर खिंचवाना भी सूर्य कुमार यादव के विनम्र व्यक्तित्व को दर्शाता है।
इतने बड़े मुकाम पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़े रहना ही इंसान की असली पहचान है और सूर्य कुमार यादव इस पहचान को बखूबी बनाकर रखते हैं।
में अगर अपनी बहन दलित को दूंगा तो क्या वो
ब्राह्मण हो जाएगी क्या..?
पर वो अपनी बहन हम देंगे तो वो और उसके
बच्चे ब्राह्मण हो जाएंगे
नीले कबूतर अपनी बात में हर जगह पेले जा रहे हे 😅
ये बात आरक्षण वाले नहीं समझेंगे।
पंडित यूँ ही नहीं बनते छोटी-सी उम्र में माँ-बाप से दूर गुरुकुल जाना पड़ता है।
रोते हुए बच्चों को गुरुकुल में छोड़ना आसान नहीं होता। माँ-बाप का त्याग, बच्चे का संघर्ष ,वर्षों का त्याग, अनुशासन और वेदों का अध्ययन तब जाकर कोई पंडित कहलाता है।
बाप कलेक्टर, आठ ट्रैक्टर, सौ बीघा जमीन और सालाना आय 10 करोड़… फिर भी OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर से बाहर!
क्योंकि जाति सही हो तो बाकी सब ‘गरीबी’ में गिना ही नहीं जाता।
दुखियारी विधवा ब्राह्मण महिला का दर्द जानने पहुँचे हमारे परम मित्र मनीष शुक्ला जी। 🙏
आज अपने वादे के अनुसार ग्राम झरी, ग्राम पंचायत बरही, जनपद पंचायत हनुमना, जिला मऊगंज पहुँचे।
यहाँ गरीब विधवा ब्राह्मण महिला दशोदरी पाण्डेय जी की पीड़ा और परिस्थितियों को अपनी आँखों से देखा। अपनी हैसियत के अनुसार जो संभव था, उनकी मदद करने का प्रयास किया।
दुख की बात है कि मऊगंज कलेक्टर से आग्रह के बावजूद आज तक किसी प्रशासनिक अधिकारी को इनसे मिलने नहीं भेजा गया।
जब शासन, प्रशासन और ग्रामीण विकास की योजनाएँ जरूरतमंद तक नहीं पहुँच पातीं, तब मानवता के नाते हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि इस परिवार का सहारा बनें।
दशोदरी पाण्डेय जी की करुण पुकार ही मुझे आज यहाँ तक लेकर आई है।
अब यह केवल मेरी नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।