@NomeswariSahu#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, ज्योति निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, ज्योति निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
गीता ज्ञान दाता ने अपनी भक्ति का मंत्र अध्याय 8 श्लोक 13 में बताया है कि मुझ ब्रह्म की भक्ति का केवल एक ओम (ॐ) अक्षर है। इस नाम का जाप अंतिम श्वांस तक करने वाले को इससे मिलने वाली गति यानि ब्रह्मलोक प्राप्त होता है।
@HariDas28666238 #आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 व 9 तथा अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने आप को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाला बताया है।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 व 9 तथा अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने आप को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाला बताया है।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
@LokeshK52548096#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान दाता प्रभु ने अध्याय 7 श्लोक 18 में अपनी भक्ति को भी अनुत्तम (घटिया) कहा है।
इसलिए अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।
Sant Rampal Ji Maharaj
@netam_ramki#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान दाता प्रभु ने अध्याय 7 श्लोक 18 में अपनी भक्ति को भी अनुत्तम (घटिया) कहा है।
इसलिए अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान दाता प्रभु ने अध्याय 7 श्लोक 18 में अपनी भक्ति को भी अनुत्तम (घटिया) कहा है।
इसलिए अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।
Sant Rampal Ji Maharaj
@ram_birjhu#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
गीता अध्याय 8 श्लोक 16 में स्पष्ट किया है कि ब्रह्मलोक में गए साधक भी लौटकर संसार में जन्म लेते हैं।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
गीता अध्याय 8 श्लोक 16 में स्पष्ट किया है कि ब्रह्मलोक में गए साधक भी लौटकर संसार में जन्म लेते हैं।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
आप सभी से विनम्र निवेदन है गीता के यथार्थ ज्ञान को जानकर संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत"
Sant Rampal Ji Maharaj
#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा
संत रामपाल जी महाराज इस विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी संत हैं। जिन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का यथार्थ अनुवाद “गीता तेरा ज्ञान अमृत, गरिमा गीता की और गहरी नजर गीता में” नामक पुस्तक में किया है।
@ram_birjhu#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
गीता अध्याय 3 श्लोक 14 से 15 में भी स्पष्ट है कि ब्रह्म काल की उत्पत्ति परम अक्षर पुरूष से हुई वही परम अक्षर ब्रह्म ही यज्ञों में पूज्य है।
Sant Rampal Ji Maharaj
📲 अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram YouTube Channel Visit करें।
#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
गीता अध्याय 3 श्लोक 14 से 15 में भी स्पष्ट है कि ब्रह्म काल की उत्पत्ति परम अक्षर पुरूष से हुई वही परम अक्षर ब्रह्म ही यज्ञों में पूज्य है।
Sant Rampal Ji Maharaj
📲 अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram YouTube Channel Visit करें।
@LokeshK52548096#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए।
Sant Rampal Ji Maharaj
📲 अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram YouTube Channel Visi
#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए।
Sant Rampal Ji Maharaj
📲 अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram YouTube Channel Visi
#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
To know Tat Brahma and Tatvgyan, To know, download and read "Hindu Saheban Nahi Samjhe Geeta, Veda, Purana Book" from Sant Rampal Ji Maharaj App.
Sant Rampal Ji Maharaj
#गीता_तेरा_ज्ञान_अमृत
पवित्र गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 व 24 में कहा है कि जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्याग कर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण अर्थात भक्ति करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है ना