“हम ज़िंदा तो हैं,
लेकिन ज़्यादातर लोग जागे हुए नहीं हैं।
डर, आलस्य, मोबाइल,
और ‘कल करेंगे’ —
यही हमें सुलाए रखते हैं।
विवेकानंद कहते हैं:
पहले जागो,
फिर चलना अपने आप शुरू हो जाएगा।”
डोनाल्ड ट्रंप की बातों (बयानों) में कितनी सच्चाई होती है, यह एक субъектив सवाल है, लेकिन विभिन्न स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने उनके बयानों की जांच की है और आंकड़े उपलब्ध हैं। मैं यहां कुछ प्रमुख फैक्ट-चेकर्स के डेटा के आधार पर निष्पक्ष जानकारी दे रहा हूं।
@INCIndia@RahulGandhi@yadavtejashwi@NayakRagini@realDonaldTrump प्रो. एके पाशा जैसे विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रम्प भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का क्रेडिट ले रहे हैं, क्योंकि वे अन्य वैश्विक मुद्दों (जैसे ईरान, इजराइल-गाजा, रूस-यूक्रेन) पर ठोस प्रगति दिखाने में असफल रहे हैं।