भाजपा सरकार को शासन करते हुए त���न कार्यकाल हो चुके हैं…
पहले और दूसरे कार्यकाल में पिछली कांग्रेस सरकारों से तुलना होती रहती थी…
और भाजपा के सभी नेता अपने जवाब में कांग्रेस की सरकारों से तुलना करते रहते थे…
लेकिन 15 सालों में एक नई पीढ़ी तैयार हो चुकी है
जिसने कांग्रेस का शासन क��ी देखा ही नहीं हैं…
और 15 साल के शासन के बाद वैसे भी पिछली सरकारों से तुलना कोई सुनना भी नहीं चाहेगा…
तीन कार्यकाल बहुत होते हैं बदलाव लाने के लिए…
दो चार ऐसे क्षेत्र हैं भी जहाँ noticeable बदलाव आया हैं…
लेकिन ज़्यादातर जगहों पर अभी भी पुरानी कांग्रेस सरकारों से तुलना करके बचा जा रहा है…!!!
टास्क फोर्स तो जोरदार ही होगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने को लेकर जो टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है उसमें एक से बढ़कर एक एक्सपर्ट्स लिए गए हैं।
नंदन नीलेकणी: टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट
एस सोमनाथ: पूर्व इसरो चेयर���ैन
तपन डेका: पूर्व आईबी निदेशक
वी कामकोटि: डायरेक्टर, IIT मद्रास
अनिता कारवाल: पूर्व शिक्षा सचिव
अमृतलाल मीणा: लॉजिस्टिक एक्सपर्ट
सिलेक्शन बहुत अच्छे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि जब इतने नामचीन विशेषज्ञों को एक काम पर लगाया जाएगा तो वे जरूर सार्थक नतीजे देंगे।
केन्द्र सरकार के सामने…
बहुत जल्द ये संकट खड़ा हो सकता है…
इन्फ़्रास्ट्रक्चर के नाम पर जितने भी काम हो रहे हैं…
चाहे सड़के, हाइवे, एक्सप्रेस वे, टनल इत्यादि हो…
चाहे रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट हो…
या चाहे अन्य सरकारी इमारतें हो…
इन सब में बेहद घटिया निर्माण हो रहा है…
कोई निर्माण साल भर में टूट जा रहा है…
कही छः महीने में सड़के धँस जा रही हैं…
कहीं चार महीने में पानी ब���ने लग जा रहा है…
तो कहीं महीने भर में ही पोल खुल जा रही है…
भरपूर कमीशनखोरी चल रही है…
और जनता का पैसा चंद धन्नासेठों की तिजोरियों में जा रहा है…!!
पिछले 1 महीने से ज्यादा का समय हो गया था जब देश में सिर्फ एक ही मुद्दा चल रहा था
NEET पेपर लीक
जो कल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रहलाद जोशी के शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर खत्म हो गया।
ये मुद्दा इतना ज्यादा बढ़ गया था कि इसके चक्कर में 5 दिन सदन भी नहीं चला था और लोग कुंडली मारकर बैठ गए थे।
हो भी क्यों न छात्रों का सवाल जो था, लेकिन अब उम्मीद करते हैं कि मानसून सत्र का सदन बेहतर ढंग से चलेगा और जनहित के मुद्दों पर बात होगी।
जितने भी ऑनलाइन एग्जाम होते हैं यानी CBT (Computer Based Test), उनमें पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है।
कैसे होगा? पेपर तो exam time पर ही system में land होता है।
CBT में पेपर लीक नहीं, बल्कि cheating होती है।
System का remote access कराकर बाहर बैठे solver gang से live paper solve कराया जाता है। आज maximum CBT exams इसी बीमारी का शिकार हैं।
आज लगभग सब कुछ outsourcing और private companies के भरोसे चल रहा है। ज़रूरत है कि सरकार का अपना exam infrastructure हो या फिर सिर्फ़ उन्हीं credible agencies like TCS से exam कराए जाएँ जिनका track record मजबूत हो।
साथ ही एक Centre Affiliation Board होना चाहिए जो पूरे देश के CBT centres का audit करे, standards तय करे और उनकी accountability सुनिश्चित करे।
Paper leak और CBT cheating दोनों अलग-अलग समस्याएँ हैं।
युवाओं और विद्यार्थियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। श्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा इस बात का प्रमाण है कि प्रधान��ंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और हमारी सरकार के लिए हमारे विद्यार्थियों और युवाओं की भावनाओं का सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिये प्रतिबद्धता सर्वोपरि हैं।
NEET परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को लेकर विद्यार्थियों के मन में जो भी चिंताएँ हैं, उनका पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जा रहा है।
विद्यार्थियों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना, उनका समाधान सुनिश्चित करना और उनमें यह विश्वास बनाना कि उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी सभी समस्याओं का समाधान होगा, यही हमारी प्राथमिकता है।
मुझे विश्वास है कि ��ब हमारे युवा और विद्यार्थी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई, अपने सपनों और अपनी आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे और एक सशक्त, समृद्ध एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
केंद्रीय मंत्री के रूप में श्री धर्मेंद्र प्रधान जी का कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक रहा है। सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान समावेशी, दूरदर्शी और नए भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप रहा है।
अनशन खत्म करने के बाद अपने ऊपर लगने वाले आरोपों पर सोनम वांगचुक जी का दर्द और गुस्सा दोनों बाहर आया है।
सोनम वांगचुक जी ने वीडियो बनाकर कहा
"ये वीडियो मैं थोड़ा दुख और गुस्से के साथ बना रहा हूं, मैं 26 दिनों तक भूखा रहा, अनशन पर बैठ�� रहा तब मैं लोगों के लिए सोनम सर हुआ करता था
लेकिन जैसे ही मैंने अपना अनशन तोड़ा लोग मेरे चरित्र पर सवाल उठाने लगे, मुझे फंडेड बताने लगे ये सब सुनकर मुझे काफी दुख हुआ।"
सोनम वांगचुक जी की भी बात सही है,
अगर कोई इंसान आपके लिए लड़ रहा है तो उसका शुक्रिया करना चाहिए न कि चरित्र पर सवाल उठाना।
A fair education system is the foundation of a strong nation.
The concerns of students deserve to be heard through dialogue not violence. Lathi charges and the use of force against students are deeply unfortunate and should have no place in a democracy.
At the same time those who deliberately disrupt or oppose a fair and merit based education system must also be held accountable. Fairness cannot be sacrificed. Dharmendra Pradhan should take all the responsibilities
The future of our country deserves justice, transparency and accountability. 🇮🇳
मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें।
मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें।
@Wangchuk66@GitanjaliAngmo
मेरे हिसाब से ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आधी रात में वीडियो बनाना पड़ा
वो भी खुद से शूट किया हुआ ताकि यह वीडियो उन सभी लोगों (Gen Z) तक इस बात को बखूबी पहुंचाया जा सके। और एक बात
दबाव तो बना है जो मोदी जी के चेहरे पर झलक भी रहा थ��, वो छात्रों की इस समस्या को लेकर चिंतित भी दिखे।
उन्होंने कल कैबिनेट में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करके सख्त एक्शन लेने की भी बात कही है।
उधर उच्च शिक्षा विभाग में सेक्रेटरी विनीत जोशी को उनके पद से हटा दिया गया है।
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this regard. This continues our series of steps for safeguarding the interests of students.
Those who try to harm the future of our youth will not be spared.
देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर��वोच्च प्राथमिकता है।
पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीति में विरोध करना अच्छी बात है अपने हक के लिए लड़ना भी चाहिए और सवाल भी पूछना चाहिए
लेकिन अगर किसी नेता की किसी मामले में जिम्मेदारी बनती है तो सवाल भी उसी से पूछना चाहिए न कि उनके परिवार से
CJP के कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिशा प्रधान को लगातार टारगेट कर रहे थे, गालियां दे रहे थे, जिससे
उनको अपना इंस्टाग्राम हैंडल डिएक्टिवेट करना पड़ा
इस तरह की हरकतें बिल्कुल बर्दाश्त के बाहर हैं किसी के परिवार को बीच में लाना कहां की मर्दानगी है?
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्या�� रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
धर्मेन्द्र प्रधान ऐसा कौनसा कोई तीस मार खाँ हैं…
जिसके लिए केन्द्र सरकार इन नमूनों को हीरो बनाने पर तुली हुई है…
सीधी सी बात है… जिस शिक्षा मंत्री के रहते नीट का पेपर लीक हुआ…
बीस से ज़्यादा बच्चों ने आत्महत्या कर ली…
सैकड़ों बच्चे अवसाद में चले गये…
हज़ारों बच्चों का भविष्य बर्बाद हुआ…
लाखों बच्चों ने दुनिया भर की परेशानी झेली…
उसे निकाल बाहर फेंकना चाहिए…
ऐसा कौनसा बड़ा लोकप्रिय नेता हैं धर्मेन्द्र प्रधान
जिसे निकालने से जनता नाराज़ हो जाएगी…!!!
अच्छा सोचो, इतना बड़ा प्रोटेस्ट जंतर मंतर पर चल रहा है, इतने लोग वहां आए हैं लेकिन
सरकार पर फिर भी इसका असर क्यों नहीं पड़ रहा?
<क्या सरकार को पता है कि हम चुनाव जीत लेंगे?
<क्या सरकार को पता है कि यही लोग दोबारा वोट देंगे?
<क्या सरकार को किसी बात से फर्क नहीं पड़ता?
आखिर सरकार इतने कॉन्फिडेंस में क्यों है? उसे तो सामने आकर बच्चों से बात कर लेनी चाहिए और प्रोटेस्ट खत्म करा देना चाहिए।
अभी शाम को 06:45 बजे दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी जनआंदोलन में शामिल होने जा रहा हूं।
जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे लोगों के साथ खड़ा होना हम सभी का दायित्व है।
The core tenets of the Modi government are Asatya and Hinsa.
The removal of Sonam Wangchuk ji from Jantar Mantar while he was on a non-violent hunger strike is wrong.
Paper leaks, the rising cost of education, and student suicides are critical issues for India’s future.
No amount of force can deter India’s students, and those of us who love and believe in them, from raising these issues.
#ChhatronKiGoonj