रातों को तारों भरे आकाश के नीचे लेटे हुए एकांत में जब विराट आसमान में तारों को देखता हूँ तब कौन हूँ, क्यों हूँ जैसे सवालों से घिर जाता हूँ…. दिमाग काम करना बंद कर देता है…. नतमस्तक हो जाता हूँ…. विचार शून्यता की स्थिति हो जाती है….
रातों को तारों भरे आकाश के नीचे लेटे हुए एकांत में जब विराट आसमान में तारों को देखता हूँ तब कौन हूँ, क्यों हूँ जैसे सवालों से घिर जाता हूँ…. दिमाग काम करना बंद कर देता है…. नतमस्तक हो जाता हूँ…. विचार शून्यता की स्थिति हो जाती है….
भगवान और आपके बीच कोई दलाल नहीं होता…. शुद्ध मन से याद कीजिए तो भगवान सीधे आपके हृदय में उतर आते हैं…. बाक़ी सब बिज़नेस है…. जिसने खुद कभी भगवान को देखा नहीं वो आपको मिलवाने का दावा करते हैं… 🤣🤣🤣
I GOT MY FIRST SALARY TODAY!!! IDK BUT I'M JUST SO GRATEFUL FOR EACH PENNY RIGHT NOW! WORKING FOR A MONTH TO GET TO SEE THIS IN MY ACCOUNT! ALSO COZ I PROMISED MYSLEF I'LL BUY MY BDAY SHOPPING FROM THIS. SO YEYYYY! I DID IT.
How does the censor board allow a film like this that depicts Muslims as the reason for population explosion and extends the relentless attack on the community. The brazen hate and Islamophobia when they use the image of a Muslim family and call it ‘Hum do Hamare Barah’.