🌺रूपं देहि: हे देवी, मुझे रूप प्रदान करो।
🌺जयं देहि: हे देवी, मुझे विजय प्रदान करो।
🌺यशो देहि: हे देवी, मुझे यश प्रदान करो।
🌺द्विषो जहि: हे देवी, मेरे शत्रुओं का नाश करो।
🙏🏻शुभ महालया🙏🏻
एक हाथ से ख़ुद को, दूजे से उसे संभाल रही हूँ,
मजबूरी के आँसू पीकर, जैसे तैसे दिन काट रही हूँ।
माँ हूँ, इसलिए बच्चे के खातिर टूटने का हक़ नहीं है मुझे,
पर एक पल तो सोचते तुम, कि आज कितनी ज़रूरत थी तुम्हारी मुझे।
✿φꀎ៩៩ɳ✿
हालत ठीक नहीं मेरी, और गोद में बच्चा भी बीमार है,
अच्छी नहीं है सेहत मेरी, पर तुम्हें तो बस अपने काम से ही सरोकार है।
कैसे दवा, कैसे खाना, कैसे रखूँगी इस बीमार बच्चे का ख़याल,
तुमने दरवाज़ा बंद करते वक़्त, किया भी नहीं ये सवाल।
(आगे comments में पढ़ें )
जब हम अपने बारे में निर्णय लेने का अधिकार स्वयं तक ही रखते हैं,
तब उसके परिणाम के भार को किसी अन्य से बाँटने का अधिकार खो देते हैं।
निर्णय स्वयं का था तो....
परिणाम का भार भी स्वयं ही उठाना होगा!
घर पर बैठी
(हर मां को समर्पित कुछ पंक्तियां)
शायद आपको लगता है कि मैं बस घर पर बैठी रहती हूँ
लेकिन जो आपको शांति दिखती है वो असल में लगातार चलती जद्दोजहद है
ये छोटे-छोटे घुटनो सिर आंखों को चोट से बचाना है
एक हाथ से उसका ख��ना बनाना है,
जबकि दूसरा हाथ उसके आँसू पोंछ रहा होता है