𝗧𝗛𝗘 𝟰𝟰-𝗬𝗘𝗔𝗥 𝗪𝗔𝗜𝗧 𝗜𝗦 𝗢𝗩𝗘𝗥, 𝗧𝗛𝗘 𝗜𝗡𝗗𝗜𝗔𝗡 𝗪𝗢𝗠𝗘𝗡'𝗦 𝗧𝗘𝗔𝗠 𝗜𝗦 𝗔𝗦𝗜𝗔𝗡 𝗚𝗔𝗠𝗘𝗦 𝟮𝟬𝟮𝟲 𝗚𝗢𝗟𝗗 𝗠𝗘𝗗𝗔𝗟𝗟𝗜𝗦𝗧𝗦! 🇮🇳🥇
A 1-0 victory over World No. 4 China in the final seals a historic gold medal for the Indian Women’s Team, securing their second Asian Games title and their first since 1982! ❤️ Lalremsiami's 10th minute goal proves to be the winner!
The triumph also secures India a direct qualification to the LA 2028 Olympics. 🇮🇳🏑
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एक रात पढ़ कर सरकारी अफसर बनें !
यह सुविधा सिर्फ झारखंड के JSSC CGL अभ्यर्थियों के लिए... सीधे #JSSC कार्यालय में संपर्क करें, क्या पता अभी भी ऑफर का लाभ मिल जाए। #JPSC
•पार्टियां मैनीफेस्टो वाला वादा न पूरा करें तो?
•नेता और अधिकारी काम न करें तो?
•पुलिस FIR न लिखे तो?
•सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर इलाज न करे तो?
•सरकारी स्कूलों में अध्यापक पढ़ाएं न तो?
उनसे कैसे भुगतान लिया जाये?
> ब्रो का नाम प्रवेश वर्मा है।
> ब्रो दिल्ली के उपमुख्यमंत्री हैं।
> ब्रो का काम जनता की सेवा करना है।
> ब्रो से सड़क पर जनता सवाल पूछती है।
> ब्रो को सवाल पसंद नहीं आते, तो जवाब की जगह तमाचा दे देते हैं।
> ब्रो कहते हैं जनता की सेवा करनी है।
> ब्रो की सेवा का तरीका देखकर जनता भी सोच रही है कि ब्रो ने कहीं नशा तो नहीं किया है?
> ब्रो जनता के सवाल सुनने आए हैं या सवाल पूछने वालों को चुप कराने? 😏
> ब्रो की राजनीतिक योग्यता पिताजी दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
> ब्रो की राजनीतिक विरासत परिवार से मिली मजबूत शुरुआत।
> ब्रो को जनता ने वोट देकर पद दिया, लेकिन ब्रो को जनता के सवाल ही पसंद नहीं।
Rajsthan SI में सिर्फ 6.3% छात्र परीक्षा में दूषित पाए गए थे फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करार किया।
झारखंड में ये आंकड़ा कितना ज्यादा है हम सब जानते है।
JSSC CGL पेपर गड़बड़ी मामले की जांच कर रही CID की टीम ने रांची नगर निगम के फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार को गिरिडीह से गिरफ्तार किया है।
CID की टीम ने देर रात गिरिडीह जिले के गांवा थाना क्षेत्र के पिहरा स्थित उसके घर पहुंच के उसे गिरफ्तार करके रांची लाया गया।
रील मंत्री @AshwiniVaishnaw जी आपने सारा ठेका गुंडों को क्यों दे रखा है ?
आए दिन pantry staff and vendors लोगों को ऐसे ही ग्रुप बनाकर पीटते रहते है ,
इस पर कार्यवाही कीजिए वरना लोग इतना खुरपेंच करेंगे कि आप वंदे भारत की रील डालना भूल जाएंगे।
स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था झड़प के दौरान..
पुलिस का जवाब था- पहले जब कंप्लेंट की गई थी तब शिकायतकर्ता ने जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने का आरोप नहीं लगाया था। बाद में दूसरी बार जब बयान हुआ तो जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल का आरोप लगाया इसलिए स्वतंत्र पर SC/ST एक्ट लगा दिया गया।
क्या ये संभव है कि शिकायतकर्ता को पूरी घटना याद रही लेकिन जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल भी हुआ था ये याद आने में 70 दिन लग गए?
अभी तक जितने वीडियो आए हैं उनमें से किसी में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का ऑडियो सुनाई दिया है क्या?
लेकिन कोई कुछ नहीं कहेगा.. SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल पर कोई चर्चा नहीं होगी इस देश में। और SC/ST एक्ट लगवाने वाला भले खुद वीडियो में पीटता दिख रहा हो लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। भले वो वीडियो में खुद मान रहा हो कि उसने हालत बुरी कर दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होगी।
गजबे है। और ये गजबे है चलता रहेगा, खत्म ना होनेवाला।
स्वतंत्र भारद्वाज ने गलत किया तो 70 दिन बाद भी SC/ST लगा दिया जाएगा और वो जेल जाएगा लेकिन उसको पीटनेवाले वीडियो में दिख रहे हैं पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अजीत भारती को गाली देनेवाले का बाल भी बांका नहीं होगा लेकिन अजीत के जवाब पर SC/ST एक्ट भी लगेगा और उसको एंटीसिपेटरी बेल भी नहीं मिलेगी।
ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं हैं.. यही आज की डेट में हमारे समाज की सच्चाई है।
सवाल बस इतना है कि जब किसी के गलत पर होनेवाला कानूनी एक्शन उसकी जाति देखकर होता है तो वो प्रक्रिया बटेंगे तो कटेंगे की कैटेगरी में आती है या नहीं?
जब देश की व्यवस्था ही हमें एक नहीं मान रही तो काहे का एक हैं तो सेफ हैं फिर? आज कोई और है.. कल को हममें से कोई होगा। बस अपनी बारी का इंतजार कीजिए।
रात्रि काल में अचानक से कमरे में तापमान अत्यधिक बढ़ता अनुभव हुआ, पीली-पीली आग की लपटें दिख रही थी! हड़बड़ा कर उठा तो पाया कि बाबा साहेब संविधान में आग लगा रहे थे।
मैंने चेक किया तो पाया कि आज तो September 2, 1953 भी नहीं है, फिर बाबा साहेब ऐसा क्यों कर रहे होंगे! फिर अचानक से मैं जग कर बैठ गया। अजीत जी, आप एक ही सपने में दो बार कैसे जग गए?
इन्सेप्शन हो रहा था, सपने में सपना चल रहा था। अब मैं सोच रहा हूँ कि जिस बाबा साहेब को एक ब्राह्मण ने अपना उपनाम दिया, एक राजपूत ने पढ़ाया, और एक देश ने अपनाया, देश का भविष्य लिखने के लिए बी एन राव, राजेंद्र प्रसाद के समकक्ष उन्हें संविधान समिति में, बिना उनकी जाति देखे बिठाया, वो भला संविधान में आग क्यों लगाएँगे?
फिर मैंने देखा कि 40 दिन बाद यहाँ दलित को याद आता है कि उसे जातिसूचक गाली दी गई थी, एक भीड़ पुलिस स्टेशन को घेर कर धाराएँ जुड़वा देती है ताकि राहुल गांधी वहाँ आकर क्रेडिट ना ले ले, और फिर एक 14 वर्ष की बच्ची को स्कूल भेजने की जगह किसी गुंडे की राजनीति को आगे बढ़ाने का हथियार बनाया जाता है। ऐसे में यदि बाबा साहेब आज होते तो संविधान में तो आग लगा ही देते।
देश अब भीड़ से ही चल रहा है। आपके पास भीड़ है तो आप थाना घेर लीजिए, धाराएँ लगा दी जाएँगी। आपके देवी-देवताओं पर स्टेज से घटिया बातें की जाएँगी, पर त्रिपुंडधारी मोदी के मुँह से एक शब्द नहीं फूटेगा।
आपके देवी-देवताओं पर हर दिन हज़ारों ट्वीट, फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियोज डाले जाते रहेंगे, यही महामानव कभी भी इन्हें हटाने के लिए किसी भी tech प्लेटफार्म को नहीं बुलाएगा, पर हाँ इनका अपना पोस्ट डिलीट हो जाए तो तुरंत जवाब माँग लेगा।
मेरे जैसे लोग इतना कटु बोल कर भी केवल इसलिए बचे हुए हैं क्योंकि सरकार को लगता है कि अभी इसे उठाने का उचित समय नहीं है। जिस दिन उन्हें लगेगा, ऐसा हर व्यक्ति, ऐसे हर प्लेटफार्म से धीरे धीरे गायब हो जाएगा या मोदी चालीसा गाता हुआ वीडियो और पोस्ट डालने लगेगा।
मैं वैसे समय को लेकर चिंतित हूँ क्योंकि तब सब कुछ समाप्त हो जाएगा। इसलिए आप चाहे मोदी के फैन हों, या आलोचक, सही को सही कहिए, ग़लत को ग़लत। किसी के बाप का यह देश नहीं है, देश हमारा है, आपका है और हमने किसी पार्टी को देश का संचालन करने दिया है, यह उनकी बपौती नहीं है।
28.04.2023 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि
देवी-देवताओं के अपमान के मामले में पुलिस किसी के शिकायत की प्रतीक्षा नहीं करेगी बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर FIR करेगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है
WP(C) 943/2021
तरुण खटिक SC समुदाय से थे।
होली के दिन सांप्रदायिक विवाद में 14 से ज्यादा लोगों ने उनकी हत्या कर दी।
लेकिन कोई दलित नेता उनके लिए नहीं खड़ा हुआ, कोई प्रदर्शन नहीं हुआ, कोई नेता परिवार के साथ नहीं खड़ा हुआ, न ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठी।
वहीं निशु आजाद भी SC समुदाय से हैं। स्वतंत्र भारद्वाज से विवाद हुआ तो कई नेता उनके साथ खड़े हो गए, प्रदर्शन हुए और गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाया गया।
दो मामले, दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।
तरुण के मामले में आरोपी दूसरे धर्म के थे, निशु के मामले में सामने वाला जनरल कैटेगरी का था।
ये दोहरा मापदंड क्यों? न्याय सबके लिए समान होना चाहिए।
निशु आजाद के एक-एक ट्वीट पर हर जिले में ईशनिंदा कानून के तहत BNS 299/IPC 295A में केस होना चाहिए। ‘हिन्दू लीगल फंड’ को इसमें मोबिलाइज किया जाए।
इसके बाप पर काउंटर FIR होनी चाहिए। उसको बहुत ‘दो मिनट पुलिस नहीं आती’ करना है न, क्या @DelhiPolice इतनी नकारी है कि कोई भी गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति खुलेआम वीडियो बना कर धमकी देगा?
जब इनको FIR-FIR ही खेलना है, तो यही सही। फिर देखते हैं कि रावण और राहुल कितने थाने घेर लेता है। नरेन्द्र मोदी ने जो बवासीर बना दिया है, वह अब हिन्दू समाज हर दिन झेल रहा है। दुर्भाग्य यह है कि जो इसका प्रयोग कर रहे हैं वो मोदी के वोटर हैं ही नहीं।