पत्रकार :- नेचुरल मार्किट है , इनका हक बनता है ?
SDO :- कहा लिखा है ?
पत्रकार :- कानुन बना हुआ है
प्रशासन :- हुड्डा परमिशन ही नहीं देता
पत्रकार :- नेचुरल मार्किट के स्थान निर्धारित बिना कोई सेक्टर ही नहीं कट सकता है ।
SDO :- आप अपने घर के सामने लगा लो
SDO :- आप कौन हो
में वकील हुं 🔥💪
गलत पंगा पड़ गया एक वकील , एक पत्रकार और एक लोगों के लिए लड़ने वाला समाज कार्यकर्ता से जब हुडा प्रशासन का पाला पड़ गया ।
पढ़ाई में यही ताकत है 📚 आपको झुकने नहीं देती नौकरी आपको खड़ा नहीं होने देती है ।
सच बोलने से सब डर रहे है.इस देश के 5 हजार कथावाचक किन्नरों की भूमिका में खड़े है कोई कुछ नहीं बोल रहा है।
क्या हो गया है इन कथावाचकों को जो वेश्याओं की तरह कथा कहने से पहले सता साइट बांधते थे.क्यों नहीं बोल रहे है ?
डिबेट में बोले धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे
सीजन की पहली बारिश में ही वर्ल्ड क्लास दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस वे का हाल देख लीजिए।जिसे 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था और इसी 14 अप्रैल को PM मोदी ने इसका उदघाटन किया था। वो तो अच्छा हुआ कि ख़ुद की गाड़ी इस गड्ढे में जाने के बाद इन लोगों ने दूसरी गाड़ियों को नुकसान होने से बचा लिया…
कुछ लोगों को गडकरी के बेटे और अमित शाह के लड़के से बहुत प्रॉब्लम है.
अब तुम्हारे बच्चे कुछ कर नहीं पाए, उनमें टैलेंट नहीं है, तो इसमें इनकी क्या गलती.
ये दोनों अपनी मेहनत से आगे बढ़े हैं, इनका सम्मान करो.
“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान ANI हैंडल से डिलीट करा दिया गया है!
किस लॉबी ने डिलीट कराया @nitin_gadkari जी?
(Video posted by @AjitSinghRathi)
पहले दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले हिंदू से लड़वाया...
फिर दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले मुसलमान से भिड़ाया...
जब उससे भी मन नहीं भरा, तो मीडिया वाले, दाढ़ी वाले हिंदू को दाढ़ी वाले हिंदू से ही लड़वा रहे हैं... और खुद तमाशा देख रहे हैं.
वाह! क्या शानदार कारोबार है।
पहली बार यह देखने को मिल रहा है कि गिरफ्तार किए गए चोरों की पुलिस रिमांड नहीं मांगी गई। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस की दिलचस्पी इस चोरी की तह तक जाने में नहीं है। ऐसी ढील मुख्यमंत्री के इशारे के बिना नहीं हो सकती।
भजनलाल जी भागीरथ बनें घूम रहे हैं.. लेकिन शेखावाटी में तो पानी आया नहीं। भाजपा के कुशासन से परेशान जनता की आंखों में जरूर पानी आ रहा है।
मुख्यमंत्री से मंत्री नहीं संभल रहे, मंत्रियों से अपने विभाग नहीं संभल रहे, और अधिकारी खुद को RSS का बताने में लगे हैं.. क्योंकि वो जानते हैं पर्दे के पीछे सत्ता का असली मुखौटा RSS है।
हक मांगने पर युवाओं को लाठियां मिल रही हैं, धमकाने में लगे हैं। कान खोलकर सुन लें, अगर अन्याय किया तो ईंट से ईंट बजा देंगे, किसी को बख्शेंगे नहीं।
ये नितिन गडकरी का बहुत ही आपत्तिजनक बयान है!
इथेनॉल मिले पेट्रोल से तमाम समस्याएं हो रहीं हैं लेकिन नितिन गडकरी को ये “लॉबिज़” का काम लग रहा है! देश की जनता की तरफ़ से व्यक्त हर तकलीफ़ को ‘पैसा के बूते चलाया जा रहा कैंपेन’ बताना गडकरी का ओवर कॉन्फ़िडेंस दिखाता है। उल्टा विपक्षी पार्टियों का आरोप तो ये है कि अपने बेटे के बिज़नेस में फ़ायदा पहुँचने के लिए नितिन गडकरी ने इथेनॉल नीति बनायी है।
ख़ैर, जनता जब अपने कार-बाइक का कबाड़ इनके दरवाज़े पर रखना शुरू कर देगी तब शायद इनको एहसास होगा कि मंत्री पद के अहंकार में ये कितना आगे निकल चुके हैं!
मंदिर के रखवाले मंदिर के दानपात्र से पैसे चुरा रहे हैं। इससे हिन्दू आस्था का अपमान नहीं होता।
चोरी की जांच में पारदर्शिता न हो। इससे भी हिन्दू आस्था का अपमान नहीं होता।
पर अगर कोई चोर-चोर चिल्ला दे तो हिन्दू आस्था पर चोट हो जाती है। विहिप के विनोद बंसल टाइप लोग क्या खाकर आते हैं टीवी की बहसों में।
एक विद्वान, शास्त्र-पठित लगने वाले सज्जन से ‘स्वयंभू’ मंदिरों पर यहाँ चर्चा चल पड़ी है।
क्या सचमुच कुछ देव विग्रह/शिवलिंग/हनुमान मूर्तियाँ आदि स्वयंभू होते हैं? हो सकते हैं? वे स्वयंभू हैं, स्वतः ही प्रकट हुए हैं यह जानने की क्या विधियाँ हैं? जन आस्था को कुछ देर अलग रख कर वैज्ञानिक और शास्त्रीय दोनों दृष्टियों से देखने पर क्या मिलता है?
थोड़ी सी भी यात्राएँ करने वाले प्रत्येक भारतीय ने जगह-जगह ऐसे बोर्ड लगाए हुए ‘प्राचीन स्वयंभू’ मंदिर देखे होंगे। क्या उनकी प्राचीनता, असाधारणता, स्वयंभू होने को जानने की व्यवस्था तथा विधियाँ हैं?
कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार या अपराध हुआ तो तत्कालीन पीएम-सीएम जिम्मेदार
सपा सरकार में हुआ तो मुलायम सिंह यादव जिम्मेदार
ममता सरकार में हुआ तो ममता बनर्जी जिम्मेदार
लालू यादव सरकार में हुआ तो लालू यादव जिम्मेदार
लेकिन
भाजपा के डबल इंजन में राम मंदिर लुट गया तो टुन्नू यादव जिम्मेदार
धूर्तता की कोई तो सीमा होनी चाहिए मितरों !
@ShuklaRajiv छुटभैये जब जी हुजूरी से एकाएक बड़े पद पर पहुंच जाते है तो वो बौखला जाते है।
अगर चुनाव इनके नाम पर लड़ा गया होता तो इनको मालूम चलता कि सीएम बनने के लिए सिर्फ कुशवाह नहीं बल्कि एक एक बिहारी जनमानस जरूरी है।
क्या कोई मुख्यमंत्री इस तरह सिर्फ अपनी जाति की ही बात कर सकता है? वह कह सकते थे कि किसी बिहारी को छूने की हिम्मत किसी को नहीं करना चाहिए । केवल कुशवाहा जाति की बात क्यों ।
हर जानकर और भुक्तभोगी कह रहा है कि एथेनॉल से गाड़ी का एवरेज कम होता है।
तमाम वीडियो तैर रहे हैं जो दावा करते हैं कि एथेनॉल से गाड़ियों का बैंड बज रहा है।
फिर भी मोदी सरकार जबरन लोगों को एथेनॉल मिला ईंधन दे रही है।
अगर एथेनॉल इतना ही अच्छा है तो सरकार सबको दोनों तरह का(शुद्ध और मिलावटी) तेल उपलब्ध कराए। लोगों को जिसमें फायदा दिखेगा, वो वाला इस्तेमाल करेंगे।
@RahulDev718370 अब समीर भाई भी बोलेंगे कि बड़े लोगों का नाम लूंगा तो मैं खतरे में पड़ जाऊंगा।
दबदबा वाले नेताजी और बागेश्वर वाले बाबा तो पब्लिकली ये सच्चाई स्वीकार चुके है।
गहरे मोहभंग के बाद चिंतन से निकली यह अंतर्दृष्टि सराहनीय है, समीर। साधुवाद। यह प्रक्रिया जारी रहे। वैसे ऐसे महान नेता(ओं) के नाम भी ले लेते तो लोगों को भ्रम में रहने का बहाना न मिलता।