मास्टर और एक मासूम बच्चे की दिल जीत लेने वाली नोकझोंक को सुनकर दिल खुश हो जाएगा
👉 बच्चा जिद कर रहा था कि उसे अभी बिस्कुट खाना है
👉 मास्टर जी बोले लंच के टाइम खाना बेटा
👉 बच्चा गुस्से में बोला स्कूल तोड़ दूंगा
👉 मास्टर जी ने नियम समझाया लंच में ही खाना
👉 बच्चे ने ऐसा मासूम सवाल पूछा कि मास्टर जी भी हैरान रह गए तो फिर आप बीच में खाने क्यों जाते हो
👉 बच्चा अंत में धमकी देते हुए बोला मैं हनुमान बनकर उड आऊंगा
बचपन की इस बेबाकी से प्यारी और सच्ची चीज़ दुनिया में कुछ नहीं हो सकती
“तुम्हे क्या लेना देना “ चंद्रशेखर आजाद संग गठबंधन पर बोले अखिलेश यादव!
@yadavakhilesh आपकी जानकारी के लिए बता दूँ आपका यह घमंड 2027 में टूट जाएगा मुंह छुपाने की जगह नहीं मिलेगी आपको अखिलेश भैया।
बनारस का संदेश साफ़ है — अब जुल्म की राजनीति नहीं, हक और स्वाभिमान का राज चलेगा!
शिवपुर विधानसभा में उमड़े इस ऐतिहासिक जनसैलाब ने साबित कर दिया कि 2027 में बदलाव तय है। संसद से लेकर सड़कों तक बहुजनों की बुलंद आवाज़, भाई चन्द्र शेखर आजाद जी के साथ पूरा बनारस मुस्तैदी से खड़ा है।
डर तो उन्हें भी लगता है जो सांप पकड़ने में माहिर होते हैं लेकिन इन मछुआरों का कलेजा देखकर हर कोई हैरान है
जब तालाब में महाजाल डालकर मछली निकाली जा रही थी तो मछलियों के साथ कई बड़े बड़े खतरनाक सांप भी जाल में फंस गए
आम तौर पर सांप देखते ही अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं लेकिन इन मछुआरों ने बिना डर के सांपों को ऐसे पकड़ा जैसे कोई आम मछली हो
बहुत बड़ी खबर 🚨
ये खबर निकल कर आ रहा है कि इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू जबरदस्त टक्कर के बाद भी चुनाव जीत चुके है
अगले प्रधानमन्त्री इजरायल के वही रहेंगे @grok इस खबर की पुष्टि करो।
बस्तर की चीख पुकार - आदिवासियों का सावल।
पहाड़ों का सीना चीरकर सड़कें बनाई जा रही हैं, प्रकृति को उजाड़कर विकास की कहानी लिखी जा रही है।
लेकिन सवाल यह है—क्या इस विकास में आदिवासियों का भी विकास होगा, या उनके हिस्से में आएगा सिर्फ़ जहरीला धुआँ, प्रदूषित पानी और फेफड़ों की गंभीर बीमारियाँ?
खदानों से निकलने वाला जहरीला धुआँ और प्रदूषित पानी किसकी ज़िंदगी को प्रभावित करेगा? खनिजों से मुनाफ़ा कौन कमाएगा और इसकी कीमत कौन चुकाएगा? ये सवाल आज इस क्षेत्र का आदिवासी पूछ रहा है।
यह दृश्य है छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले की पावन धरती का, जहाँ आदिवासियों के आराध्य देवता नंदराज पहाड़ का सीना छलनी किया जा रहा है।
आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति को पूजता आया है। उसके लिए पहाड़ केवल पत्थर नहीं, आस्था हैं; जंगल केवल संसाधन नहीं, जीवन हैं, और धरती केवल जमीन नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और अस्तित्व का आधार है।
विडंबना देखिए! जो समाज प्रकृति की रक्षा करता आया है, आज उसी समाज को अपने देवता और अपनी संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दुख तब और बढ़ जाता है, जब आदिवासियों की आस्था और संस्कृति की रक्षा करने वाले जनप्रतिनिधि भी मौन दिखाई देते हैं।
आखिर कब तक विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश होता रहेगा? कब तक मुनाफ़े की भूखी व्यवस्था आदिवासियों की आस्था, पहचान और अस्तित्व को कुचलती रहेगी?
याद रखिए, नंदराज पहाड़ केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि आदिवासियों की आस्था, संस्कृति और पुरखों की विरासत है।
प्रकृति बचेगी, तभी संस्कृति बचेगी, संस्कृति बचेगी, तभी पहचान बचेगी!
🌿 जल, जंगल, जमीन हमारी पहचान है, नंदराज पहाड़ हमारा स्वाभिमान है! 🙏
लड़के क्या इतना इनोसेंट होते है, देखने से तो नहीं लग रहा हैं 😱🤔
2 दिन पहले लड़के की शादी हुई है, जब रात का समय होता है
तो लड़के की बुआ ने लड़के को दुल्हन के घर में 12:00 बजे भेज देती है,
अब जैसे लड़के को कुछ मालूम ही नहीं की शादी के बाद क्या होता है,
वह एक किताब लेकर पढ़ने लगता है, जैसे कि उस किताब में सारी चीज़ सीखने को मिलेगी...1/2