मेरे आराध्य प्रभु श्रीराम समस्त मानवजाति के लिए एक उदाहरण हैं।कैसे भगवान होने के बाद भी कर्मों का फल उन्होनें भोगा।जो दूसरों के कष्ट को मिटाने वाले हैं मनुष्य रूप में आकर हर एक कष्ट सहा।पिता के वचनों का मान रखते हुए राजपाट छोड़ दिया त्याग मर्यादा की मूर्ति बन पुरुषोत्तम कहलाए।
आपको अयोध्या की "मीरा मांझी" याद हैं?!
वही "मीरा मांझी" जिनके घर PM "नरेंद्र
मोदी" आए और चाय पीकर गए थे,
आज "मीरा मांझी" बहुत कर्ज़ में है और रोज उनके घर रिकवरी एजेंट आ रहे हैं, परिवार का कहना है कि
"PM मोदी के आने के बाद उनका जीवन त्रस्त हो गया है और परिवार कर्ज़ में डूब गया है"
दरअसल बात ऐसी है कि,
PM मोदी के जाने के बाद इनके घर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी सहित बड़े बड़े अधिकारी पहुंचे।
अधिकारियों ने मीरा मांझी ने कहा कि फूल बेचने के आपको स्थायी पक्का जगह दे दिया जाएगा वहां फूल बेचिएगा
फिर अधिकारियों ने इनके पति "सूरज मांझी" से उनके व्यवसाय को लेकर जानकारी ली,
सूरज टेंट हाउस में काम करते थे तो अधिकारियों ने कहा कि आपके लिए टेंट हाउस की एक दुकान खोल दी जाए?!
सूरज ने मना कर दिया और कहा कि हमें एक नाव बनवा दी जाए, मांझी है, नदी किनारे चलाएंगे,
अब अधिकारियों ने लोन करवाकर इनके नाम से नाव तो बनवा दी लेकिन सूरज और उनकी पत्नी मीरा मांझी लोन को भरने में असमर्थ हो जाती हैं
यहां तक कि फूल बेचने के लिए मीरा मांझी को स्थाई जगह भी नहीं मिली,
अब इनलोगों के घर लोन रिकवरी एजेंट आ रहे हैं और धमका रहे हैं कि 3 लाख का लोन नहीं जमा हुआ तो कार्यवाही की जाएगी,
@rohanrgupta राहुल गांधी का छोड़ो अब तो मोदी जी की बात करते हैं तुम्हारे मोदी जी के बनारस में बीजेपी हार गई भाजपा की हर मतलब मोदी जी की हार मोदी जी हार गए।
@Radhika_Khera हर बात पर इतना क्यों चिल्लाना। गद्दारों को उनके लेवल के हिसाब से मिलता है।गद्दारों को जो भाजपा ने पहले दे दिया अब नहीं देगी क्योंकि उनके अपने कार्यकर्ताओं का भी प्रेशर है जो बेचारे सालों से उनकी विचारधारा पर चल रहे है। श्रीराम का साथ देने के बाद भी विभीषण का कोई सम्मान नहीं।
@RoaringOpinion@KirenRijiju Aaj jhoot bahut teji se bola ja raha hai. Jitna pahle nahin bola jata tha. Situations ka pata hi nahin hota Hai ki kya chal raha hai sirf har jagah Modi Naam Modi Nama Nehru ji Nehru ji Congress Congress bus yahi sunane ko mil raha hai.
@SachinPilot धरना प्रदर्शन तो आम आदमी पार्टी के अनुसार जनता का हक और अधिकार है।सही कहा था अटल बिहारी वाजपेई जी ने की सरकारें सभी एक जैसी होती हैं। उनके शासन प्रशासन में कोई अंतर नहीं होता चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो ।अभी तो बस पंजाब के युवाओं की बर्बादी देखकर तकलीफ हो रही है।
@ianuragthakur हुआ मेरे देश के वार्डर पर आघात मुंह में दही जमाकर चूपचाप बैठ जाऊंगा मैं। झूठा धर्मप्रेमी बनकर जनता को दिखाऊंगा। धर्म धर्म करके देश धर्म से आंखें मूंद लूंगा।
@Rewa_wale १०० गिनती करा सकती हूं। जो कहते हैं वह करते हैं पढ़े लिखे हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। मणिपुर गये। किसानों की बात सुनी छात्रों की आवाज बने। सबसे बढ़कर समर्थन करने वाली पार्टी को आगे बढ़ाया ना कि उन्हें खत्म करके खुद में मिला लिया। कार्यकर्ताओं की सुनते हैं एक बड़े भाई की तरह।
@BabitaPhogat मोदी भी जाएंगे और मोदी के चमचे भी जाएंगे इस बार इलेक्शन जीत नहीं पाएंगे। श्री राम का चंदा खा गए। जो श्री राम के सगे नहीं वह किसी के भी सगे नहीं। हनुमान जी की ऐसी गदा
चलेगी की एक-एक भाजपाई भागता
फिरेगा।
@KirenRijiju वह दिन आ गया है कि जब तुम्हारी सरकार जाने वाली देश का कोई भी नागरिक अरुणाचल के लिए तुम्हें माफ नहीं करेगा हम अपनी 1 इंच जमीन भी नहीं दे सकते और नहीं चाहिए ऐसी सरकार जो हमारे बॉर्डर की सुरक्षा न कर सके।
@KirenRijiju घृणा भड़कानेवाले और झूठ बोलने वाले तो तुम हो। क्या बोला था की अरुणाचल में कहीं चीनी नहीं है। कोई घुसपैठ नहीं हुई देश के साथ गद्दारी करने वाले भाजपाई हैं। ना देश के स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया और ना देश की स्वाधीनता को बचाकर रखने के लिए कोई काम किया।
@jgopikrishnan70 साधारण व्यक्ति यह बात समझ ही नहीं सकता। माफी देना बहुत बड़ी बात है साधारण लोगों के बस की बात नहीं है । केवल असाधारण व्यक्ति ही ऐसे माफी दे सकता है।
@JM_Scindia राहुल गांधी आपसे विनती है की कभी इस व्यक्ति को
कभी कांग्रेस में वापस मत लेना। ऐसे गद्दारों को कहीं सम्मान नहीं मिलता। आजम खान की इज्जत
मेरी नजरों में बहुत बढ़ गई है कितना भी कुछ उस
व्यक्ति के साथ हुआ लेकिन उसने सपा नहीं छोड़ी। अहंकार और गद्दारी का जीता जाता सबूत।
सुनिये @KirenRijiju Ji!
एक तरफ पंडित नेहरू थे, जो अपने पूर्वजों की भूमि कश्मीर को भारत का अंग बनाए रखना चाहते थे, जबकि राजमोहन गांधी जी की पुस्तक Patel: A Life के पृष्ठ 439 और रामचंद्र गुहा की पुस्तक India After Gandhi में उल्लेख है कि सरदार वल्लभभाई पटेल का कश्मीर को लेकर शुरुआती रुख अलग था कि अगर कश्मीर के शासक पाकिस्तान के साथ जाने का निर्णय लेते, तो तब उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं थी.
तो एक तरफ पंडित नेहरू थे, जो अपने पूर्वजों की जन्मभूमि को भारत के साथ बनाए रखने के लिए कृतसंकल्प थे,
और एक तरफ आप हैं, किरण रिजिजू,
जिनकी जन्मभूमि पर चीनी आक्रांताओं का कब्जा होने के बावजूद आपके मुँह से आवाज़ नहीं निकलती!
आपसे कई दर्जा बेहतर तो एक दौर में @TapirGao ही थे, जिन्होंने कम से कम इस मुद्दे पर संसद में आवाज़ तो उठाई थी….
बताइए न, जो अपनी जन्मभूमि के प्रति वफ़ादार नहीं है, वो भारत की मिट्टी के प्रति वफ़ादार कैसे होगा ?
जी. ये सवाल आप से ही है रिजुजू जी.