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सा विद्या या विमुक्तये
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस ‘डेमोक्रेसी की हत्या’, ‘सीट चोरी’ और ‘BJP-ECI सांठगांठ’ का राग अलाप रही है।
अरे भाई, याद करो 2021 केरल विधानसभा चुनाव। BJP के दो उम्मीदवारों के पर्चे साइन मिसिंग और एफिडेविट गलती पर रद्द हो गए थे। तब तो यही कांग्रेस नियमों की दुहाई दे रही थी।
बिहार में NDA की सीमा सिंह का भी टेक्निकल ग्राउंड पर नामांकन खारिज हुआ था।
हर चुनाव में सैकड़ों पर्चे (सभी पार्टियों के) गलत एफिडेविट, छिपाए केस या डॉक्यूमेंट्स की वजह से रद्द होते हैं। लेकिन जब अपना वक्त आता है तो ‘साजिश’ कह रहे हैं।
अब असली बात - मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश राज्यसभा की तीसरी सीट पर BJP के महेश केवट निर्विरोध जी��� गए। यानी एक सवर्ण कांग्रेस उम्मीदवार की जगह बहुजन, पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधि संसद पहुंच रहा है।
सवाल ये नहीं कि नामांकन रद्द हुआ। सवाल ये है कि सवर्ण-केंद्रित विपक्ष अब ‘एक नियम सबके लिए’ मानने को तैयार क्यों नहीं है?
भारत का लोकतंत्र बहुत महान है। यहां Returning Officer का फैसला, Election Commission की प्रक्रिया, Constitution का नियम और आखिरकार जनता/विधायकों का वोट सबसे ऊपर है। कोई राजा नहीं, कोई तानाशाह नहीं।
बहुजन की आवाज को दबाने वाले जितना चिल्लाएं, संविधान सबसे बड़ा है।
जय संविधान।
The @AITCofficial will ENDURE, GROW and emerge EVEN STRONGER. Our leader @MamataOfficial is UNIQUE and blessed by the people, blessed by Maa Kali of Kalighat, our cause is rooted in justice, equality and liberty for the PEOPLE, the grassroots constitutionalism that Mamata Banerjee has always embodied. Let the haters predict whatever they want, the @AITCofficial will grow ever stronger.
सनातन, सनातन चिल्लाने वालों को देवदत्त पटनायक का ये लेख पढ़ना चाहिए।
शास्त्रों के आधार पर वे सनातन की परत खोलते हुए कहते हैं कि सनातन कुछ है ही नहीं।
अगर सनातन का एक अर्थ पर्मानेंट है और केवल चेंज ही पर���मानेंट है तो सनातन भी हमेशा बदलते रहने वाला है। वह जड़ नहीं है, स्थिर नहीं है, न ही उसकी जड़ें कहीं आदिकाल में हैं। वह आज भी घटित हो रहा है, बदल रहा है-
महाभारत के आदि पर्व में सनातन धर्म (sanātana dharma) शब्द एक चौंकाने वाले प्रसंग में प्रकट होता है—ऋषि उद्दालक और उनके पुत्र श्वेतकेतु की कथा में। यह घटना तब घटित होती है जब श्वेतकेतु यह देखकर क्रोधित हो उठते हैं कि एक अन्य ब्राह्मण उनकी माता का हाथ पकड़कर उन्हें ले जा रहा है—वह भी उनके पति और पुत्र के समक्ष।
ग्रंथ कहता है:
तस्य पश्यत एवैतामृषिर्जग्राह वै करात्
*tasya paśyata evaitām ṛṣir jagrāha vai karāt*
"उसके देखते-देखते ही एक ऋषि ने उसका हाथ पकड़ लिया।"
जब युवा श्वेतकेतु क्रोध से भर उठे, तो उनके पिता उद्दालक ने उन्हें शांत करते हुए कहा:
मा तात कोपं कार्षीस्त्वमेष धर्मः सनातनः
*mā tāta kopaṁ kārṣīs tvam eṣa dharmaḥ sanātanaḥ*
"पुत्र, क्���ोध मत करो। यही सनातन धर्म है।"
उन्होंने आगे स्पष्ट किया:
स्त्रियः ह्यनावृताः सर्वा इति धर्मोऽभवत्पुरा
*striyaḥ hy anāvṛtāḥ sarvā iti dharmo 'bhavat purā*
"प्राचीन काल में स्त्रियाँ अनावृत (स्वतंत्र) थीं; ऐसा ही धर्म था।"
यहाँ सनातन धर्म का अर्थ कोई स्थिर धर्म, पवित्र ग्रंथ या शाश्वत धार्मिक व्यवस्था नहीं था। उद्दालक ने इस शब्द का प्रयोग केवल एक पुरानी सामाजिक प्रथा को इंगित करने के लिए किया, जिसे वे प्राचीन और स्वीकार्य मानते थे। यहाँ धर्म का अर्थ था—सामाजिक नियम या प्रचलित परंपरा, इससे अधिक कुछ नहीं।
परंतु यही कथा सनातनता के दावे को स्वयं ध्वस्त कर देती है। पुत्र ने उसे अस्वीकार कर दिया जिसे पिता ने सनातन कहा था। श्वेतकेतु ने इस पैतृक प्रथा को मानने से इनकार किया और स्त्री-पुरुष संबंधों के लिए एक नई मर्यादा स्थापित की:
चकार चैव मर्यादामिमां स्त्रीपुंसयोर्भुवि
*cakāra caiva maryādām imāṁ strīpuṁsayor bhuvi*
"उसने पृथ्वी पर स्त्री और पुरुष के बीच यह मर्यादा स्थापित की।"
जिसे पिता ने सनातन घोषित किया, उसे पुत्र ने एक ही पीढ़ी में पलट दिया। महाभारत ��्वयं यह सत्य उजागर करता है—सनातन धर्म वस्तुतः सनातन है ही नहीं। वह पिता से पुत्र तक, युग से युग तक बदलता रहता है, मनुष्यों द्वारा अपनी सुविधा अनुसार गढ़ा और पुनर्गढ़ा जाता है। वह कालातीत नहीं, केवल नाम से ही सनातन है—वास्तव में तो वह एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जो निरंतर बदलती, मिटती और पुनः रची जाती है।
Former PM of Pakistan Imran Khan, who was ousted by Pakistan Army Chief Asim Munir, told the people of Pakistan: "The court has acquitted me & there are no charges against me, yet, Asim Munir has besieged me & is conspiring to kill me. People of Pakistan must know the truth.
ना कोई लंब�� काफिला
ना दिखावा
सिर्फ एक गाड़ी, खुद ड्राइव करते हुए राहुल गांधी
और साथ में उनकी सांसद बहन।
यही सादगी और जमीन से जुड़ाव उन्हें अलग बनाता है.
दिल्ली के तीनमूर्ति हाउस में, जो बदल कर प्रधानमंत्री संग्रहालय बना दिया गया है, नेहरू की चित्र दीर्घा में मैंने देखा है वह छोटा सा प्यारा पत्र जो बालक जवाहर लाल ने अपनी माँ को हाथ से लिखा था। देवनागरी में लिखे उस ह्रदय स्पर्शी पत्र में उन्होंने माँ को ‘दिद्दा’ शब्द से संबोधित किया था।
पता नहीं पत्र अब वहाँ है कि नहीं।
Interestingly, this building also played an important role in Bengal’s revolutionary movement. In 1930, Benoy Basu, Badal Gupta, and Dinesh Gupta attacked British official N. S. Simpson here. This is why the nearby area came to be known as 'B.B.D. Bagh' - named after Benoy, Badal, and Dinesh.
#कलयुगमेंसतयुगकीशुरुआत_भाग6
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Writers' Building, designed by Thomas Lyon in 1777, served as headquarters of the EIC and later the entire British Raj. Since 1947, it housed the office of WB’s CM until 2013 when TMC came into power. The office of BJP’s CM will housed here henceforth.
बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP को आउटसाइडर बताकर खारिज करने की भरपूर कोशिश की गई।
अब तथ्य देखिए-
1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने, RSS के समर्थन से भारतीय जनसंघ की स्थापना की। और देश के पहले लोकसभा चुनाव मेें 3 सीटें जीती थीं-
📌 श्यामा प्रसाद मुखर्जी – दक्षिण कोलकाता
📌 दुर्गा चरण बनर्जी – झारग्राम (मिदनापुर)
📌 उमा शंकर त्रिवेदी – चित्तौड़, राजस्थान
1980 में यही जनसंघ भारतीय जनता पार्टी बना।
यानी BJP की नींव ही पश्चिम बंगाल की धरती से रखी गई थी।
#बंगाल_का_रिजल्ट
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BJP Bengal candidate Kalita Majhi, who works as a domestic worker in 4 households and earns ₹2,500 a month, wins from the Ausgram constituency. This is the power of the BJP, where even the most humble citizen can rise and script a truly inspiring journey.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाल की 35 सीटों पर प्रचार किया, जिनमें से 32 पर बीजेपी के उम्मीदवार को जीत मिली। इस हिसाब से योगी की रैली का स्ट्राइक रेट रहा 91.43%, यानी महाराष्ट्र चुनाव से भी बेहतर।
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'मेरे मन में एक जवाब आया है और मैं उसका सवाल ढूंढ रहा हूं'
'ऐसी मशीन लग सकती है जिसमें एक तरफ से आलू डालो और दूसरी तरफ से सोना निकले'
'अगर आपके पास गैस का चूल्हा नहीं है, तो आप स्टोव पर खाना बनाते हैं… और कोयला इस्तेमाल करते हैं…'
टेलीप्रॉम्टर देखकर पढ़ना इस तरह के बयान देने से लाख ���र्जे बेहतर है। ऐसा मेरा मानना है।